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घर बैठे पाइए रतलामी नमकीन, यक़ीन नहीं तो 'नमकीनवाले' पर क्लिक कीजिए...

जो उड़ान पंखो से नहीं हौसलों से भरते है।  ना ही वो किसी रुकावट से डरते है।। ऐसे जज़्बे जो सलाम है हमारा। जो अपनी सोच को असलियत में बदलते है।।

Shivangi Shukla
27th Mar 2015
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आज ज़माना ऊंगलियों के इशारे पर चलता है। बटन दबाया और सारी दुनिया आपके सामने। न तो उसके लिए चक्कर काटने की ज़रूरत, न रात दिन बेचैन रहकर उसके बारे चिंता करने की ज़हमत। एक जगह बैठ कर दुनिया के किसी भी कोने की वस्तु खरीद सकते हैं। आज जहाँ कपड़ा, खाना, घर - मकान, सोना, चांदी सबकुछ आपको घर पहुँच सेवा के साथ उपलब्ध है तो फिर खाने को और स्वादिष्ट बनाने वाला "नमकीन" क्यों अछूता रहे। इसी सोच के साथ युवा अंकुर फडनिस ने अक्टूबर 2013 में "नमकीनवाले" नाम से वेबसाइट स्थापित कर दुनियाभर में नमकीन घर-घर पहुँचाने की पहल की।

नमकीन की ऑनलाइन बिक्री का व्यस्वसाय नया नहीं हैं। बल्कि इस दौर में नमकीन के बड़े व्यवसायी जैसे हल्दीराम या आनंद स्वीट इस ऑनलाइन व्यवसाय में काफी अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं। देखा जाये तो पाकोमेनिआ नामक वेबसाइट घरों तक क्षेत्रीय पकवान पंहुचा कर ग्राहकों को बहुत लुभा रही है। वही दूसरी ओर इंदुबेन खाखरावाला के नाम से प्रसिद्ध गुजरती व्यंजनों का व्यवसाय कर रहा वेबसाइट भी ऑनलाइन बाजार मे उपलब्ध है। वैसे नमकीनवाले अभी सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही सीमित है, इसी सोच ने अंकुर को पूरी दुनिया में पहुंचने के लिए उत्साहित किया।

अंकुर का जन्म मध्य प्रदेश के रतलाम में हुआ था। अंकुर बताते हैं "मेरी पढ़ाई रतलाम में पूरी हुई और फिर मैं नौकरी के लिए टी सी एस, मुंबई को रवाना हो गया। मुझे हमेशा से पता था कि मुझे व्यवसाय करना है, मैं नौकरी के लिए नहीं बना।" चार साल नौकरी करने के बाद अपने ही साथी के साथ अंकुर ने "डायल यम्मी" वेबसाइट शुरू की। इस वेबसाइट के ज़रिये ग्राहकों को रेस्टोरेंट डिस्काउंट कूपन उपलब्ध कराये जाते थे।

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अंकुर अपने पहले व्यवसाय के बारे में बताते हुए कहते हैं " मेरी पहली पहल एक ऐसा पोर्टल बनाने की थी जहां सभी को छोटे-बड़े रेस्टोरेंट में भोजन करने के लिए डिस्काउंट कूपन उपलब्ध करवाये जाएं। मगर निवेशकों की कमी के चलते हमें यह वेबसाइट बंद करना पड़ा और तब मैंने घर लौट जाना ही बेहतर समझा।"

अंकुर ने रतलाम से इंदौर आते ही अपनी एक आईटी फर्म शुरू की। अंकुर का कहना है कि "मेरे माता पिता दोनों ही सरकारी कार्यरत हैं। वह मेरे व्यवसाय के विचार से पूरी तरह सहमत नहीं थे ना ही मैं जानता था कि मुझे अब आगे क्या करना है। मगर जब मेरे द्वारा स्थापित नयी कंपनी ने अच्छा व्यवसाय करना शुरू किया तब मैंने विचार किया कि क्यों न व्यवसाय उस दिशा में किया जाये जिसके बारे में मुझे और दूसरी चीज़ों से ज्यादा जानकारी है, जिसमें उत्पाद विकास और विस्तार (product conceptualisation and development) की समझ है। उसके बाद ही "नमकीनवाले" की शुरूआत हुई।"

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यह जानते हुए कि खाद्य पदार्थ और पकवानों की बिक्री के व्यवसाय में बहुत मुनाफा है। अंकुर ने खाद्य से जुड़े लाभकारी क्षेत्रों में खोज करना शुरू की। "मैंने पाया की नमकीन का क्षेत्र बिलकुल अछूता है। मध्य प्रदेश का मालवा क्षेत्र और खासकर रतलाम नमकीन के लिए प्रसिद्ध है। हर कहीं प्रामाणिक और स्वादिष्ट नमकीन पाना बहुत मुश्किल है। कई सारे नमकीन उत्पाद जो बाज़ारो में उपलब्ध हैं वो प्रामाणिक नहीं होते" अंकुर स्पष्ट करते हैं।

और विस्तार से बताते हुए अंकुर कहते है कि "देश भर में नमकीन की बहुत माँग है और घर से दूर रह रहे कई युवा अपने क्षेत्र के नमकीन और पकवान पाने के लिए लालायित रहते हैं। "नमकीनवाले" के द्वारा हम आप तक रतलाम की गलियों में बन रहे प्रामाणिक व स्वादिष्ट नमकीन आपके घर तक पहुंचाने का दावा करते हैं।"

वो उनकी पहली नौकरी और पहली वेबसाइट का शुक्रिया अदा करते हैं जिससे प्राप्त आईटी के ज्ञान ने उन्हें "नमकीनवाले" बनाने में काफी सहायता की। अंकुर बताते है "वेबसाइट बनाना और उसे इ कॉमर्स से जोड़ना आसान था क्यूंकि मैं अपनी पहली नौकरी और वेबसाइट पर इन सब पर काम कर चूका था। पर सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण कार्य था उत्पादों की पैकेजिंग और इनकी सप्लाई। मैंने कुछ समय लिया और एक अच्छी कुरियर कंपनी से टाई अप किया। अच्छी पकैजिंग पर शोध कर बेहतर पैकेजिंग फाइनल की क्यूंकि ख़राब पैकिंग सारे नमकीन को ख़राब कर देती है ।"

वेबसाइट की जाँच और सारी प्रक्रिया को सही तरीके से संचालित करने के लिए अंकुर ने अपने दोस्तों से सहायता। उनसे वेबसाइट पर जाकर आर्डर करने की गुजारिश की। जब अंकुर को आर्डर से लेकर पैसे लेन देन और सप्लाई की प्रक्रिया सही होती दिखी तब अंकुर ने वेबसाइट पब्लिक के लिए शुरू कर दी। अंकुर कहते है "जबसे मैंने नमकीनवाले वेबसाइट शुरू की है तब से प्रोग्रामर्स, पैकर्स, और नमकीन बनाने वाले साथियों की पूरी टीम है।"

शुरुआत में वेबसाइट पर कुछ 15 से 20 आर्डर आते थे हर महीने पर (SEO) एस ई ओ सर्विस के ज़रिये अब वेबसाइट पर रोज़ाना 100 से 200 आर्डर आते हैं। अपने भविष्य की योजना को साझा करते हुए अंकुर बताते है "मुझे अब भारत के बाहर (US and UK) से मैसेज आने लगे हैं कि यह सेवा भारत से बाहर भी उपलब्ध करायी जाये। इसी को ध्यान में रखकर अब मैंने वेबसाइट को ओवरसीज़ मार्केट के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। मेरी चाहत है कि मैं और कुछ पकवान और नमकीन अपनी वेबसाइट में जोड़ूं। लेकिन उससे पहले मैं नमकीनवाले वेबसाइट को और विस्तृत करना चाहता हूं । ओवरसीज़ मार्केट में पूर्ण रूप से पकड़ बनाने के बाद और अपने उत्पाद को और विशिष्ट बनाकर निवेशकों तक पहुँचना चाहूँगा।"

ऐसे नवजवानों के जज़्बे को हम सलाम करते है जो एक के बाद एक सीढ़ी चढ़कर अपनी मंजिल तक पहुँचना जानते है ।

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