बंधनों को तोड़कर बाल काटने वालीं नेहा और ज्योति पर बनी ऐड फिल्म

By जय प्रकाश जय
May 10, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:07 GMT+0000
बंधनों को तोड़कर बाल काटने वालीं नेहा और ज्योति पर बनी ऐड फिल्म
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शेव कराते सचिन तेंदुलकर

महाराष्ट्र की शांतिबाई के बारबर बनने के दो साल बाद अब यूपी की नेहा और ज्योति ने स्टीरियोटाइप तोड़ते हुए सामाजिक रूढ़ियों पर सीधा अटैक किया है। उनके इस साहस को यूट्यूब पर अब तक डेढ़ करोड़ से अधिक लोग सराह चुके हैं। सचिन तेंदुलकर भी उनसे शेविंग कराकर गर्व महसूस कर रहे हैं।

 

दो साल पहले महाराष्ट्र की जिस शांतिबाई यादव ने हज्जाम का रोजी-रोटी अपनाकर स्टीरियोटाइप तोड़े और दूसरी महिलाओं के लिए भी मिसाल बनीं, उन्ही की राह पर चल कर उत्तर प्रदेश के बनवारी टोला की दो सगी बहनें नेहा और ज्योति ने साबित कर दिया है कि अब आधी आबादी से कोई भी कार्यक्षेत्र अधूरा नहीं। नेहा और ज्योति की रोजी-रोटी का दर्द भी कमोबेश शांतिबाई जैसा ही है। शांतिबाई ने चार दशक पहले उस समय इस काम का बीड़ा उठाया था, जब पति के देहावसान के बाद उनके कंधे पर चार बेटियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई।


उस घटना के बाद उन्होंने सोचा कि अब क्या करें, अब घर-गृहस्थी कैसे चलेगी तो उन्होंने बारबर का काम शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों से उन्हें इस काम में मदद मिलने लगी। काम चल निकला। अब तो वे आसपास के गांवों में जाकर भैसों के भी बाल काटती हैं। शुरू में बाल काटने के एक रुपए, दाढ़ी बनाने के पचास पैसे मिलते थे, अब बाल काटने के तीस रुपए, दाढ़ी बनाने के बीस रुपए मिल जाते हैं।


वर्ष 2014 में जब नेहा और ज्योति के पिता ध्रुव नारायण पर फॉलिज का अटैक हुआ था, उस समय नेहा की उम्र 11 साल और ज्योति की 13 साल थी। घर की कमाई का स्रोत ठप गया तो पिता के इलाज और अपनी स्कूली पढ़ाई के लिए नेहा और ज्योति को बारबर का काम शुरू करना पड़ा। दोनो बहनें लड़कों के कपड़े पहन कर लोगों की हेयर कटिंग, शेविंग करती हैं। शुरुआत में दोनों को काफी परेशानी हुई लेकिन बाद में लोग उनके साहस को सलाम करने लगे। अब तो फरहान अख्तर, फिल्म 'दंगल' की कलाकार फातिमा सना शेख और सान्या मल्होत्रा, स्वरा भास्कर, राधिका आप्टे और हेयरस्टाइलिस्ट आलिम हकीम तक उनके प्रशंसकों की लिस्ट में शुमार हैं।


पिता से विरासत में मिली नाई की रोजी-रोटी संभालकर नेहा और ज्योति उन सामाजिक मिथकों को झुठला भी रही हैं, उन रूढ़ियों को तोड़ रही हैं, जिनसे मान्यता मिली हुई थी कि फलां-फलां काम औरतें नहीं कर सकती हैं। जब बेटियां अपने बड़ों को कंधा देने लगी हैं, क्रिया-कर्म करने लगी हैं, घोड़ी पर चढ़कर शादियां रचाने लगी हैं, फिर नेहा और ज्योति ने अपने काम से एक नई खिड़की खोली है तो हैरत की कोई बात नहीं होनी चाहिए। ध्रुव नारायण ने अपनी बारबर की दुकान का नाम भी बेटियों के नाम पर रखा है। दोनों बहनें मर्दों की शेविंग से लेकर चंपी तक करती हैं।


बारबर के पेशे में पहले भी कई चौंकानें वाली सूचनाएं सुर्खियां बन चुकी हैं। मसलन, सांगली (महाराष्ट्र) का उस्तरा मेन्स स्टूडियो, जिसमें ग्राहकों की हर वक्त भीड़ लगी रहने की एक और खास वजह है। इस सैलून के मालिक रामचंद्र दत्तात्रेय काशिद पुणे के एक कारीगर द्वारा तैयार किए गए अठारह कैरट के साढ़े दस तोले सोने के उस्तरे से लोगों की हजामत बनाते हैं। यह उस्तरा बनवाने में साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करने पड़े थे।


इस सैलून में हजामत के लिए वेटिंग लिस्ट होती है। फिलहाल, नेहा और ज्योति का नाम सुर्खियों में है। महान भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी उनसे शेविंग कराने के बाद गर्व का एहसास कर रहे हैं। नेहा और ज्योति यूट्यूब पर डेढ़ करोड़ से अधिक लोग देख चुके हैं। तेंदुलकर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है कि 'आप शायद इसे नहीं जानते, लेकिन मैंने कभी भी किसी से शेव नहीं बनवायी। आज यह रिकार्ड टूट गया। इन महिला हज्जाम से मिलना सम्मान की बात है।'


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