कॉलेज में पढ़ने वाले ये स्टूडेंट्स गांव वालों को उपलब्ध करा रहे साफ पीने का पानी

कॉलेज में पढ़ने वाले ये स्टूडेंट्स गांव वालों को उपलब्ध करा रहे साफ पीने का पानी

Friday May 03, 2019,

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ग्रामीण महिला को फिल्ट प्रदान करतीं छात्राएं (तस्वीर साभार एफर्ट्स फॉर गुडः

हमारे समाज में कई तरह की कमियां हैं जिन्हें देखकर हमारा दिल दुखता है और हम व्यवस्था को कोसते रह जाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो खुद ही सिस्टम को सही करने निकल पड़ते हैं। कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ने वाले कुछ छात्र ऐसे ही गांव के लोगों को साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए निकल पड़े हैं। स्टूडेंट्स के इस ग्रुप का नाम टीम इनैक्टस है। ये अपने प्रॉजेक्ट कलाकृति और प्रॉजेक्ट शुद्धि के जरिए पश्चिम बंगाल के गांवों में महिलाओं और पुरुषों को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।


प्रॉजेक्ट कलाकृति की शुरुआत 2016 में हुई थी। इसके माध्यम से फूलों के गुलदस्तों का विकल्प तलाशा जा रहा है। गुलदस्ते की वजह से पर्यावरण में काफी कचरा उत्पन्न होता है। इनकी जगह पर छोटे गमलों का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रॉजेक्ट पर काम कर रहीं उन्नति नरसरिया कहती हैं कि इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता और कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। स्टूडेंट्स की टीम बंगाल के गांवों में जाकर ग्रामीणों को गमले को पेंट करने का प्रशिक्षण देती है।


इनमें वे महिलाएं भी शामिल हैं जो कभी ड्रग्स की शिकार थीं और गांव वालों ने उनसे नाता तोड़ लिया था। अब ये महिलाएं नियमित तौर पर आजीविका कमा रही हैं और अब उन्होंने ड्रग्स भी छोड़ दिया है। इस प्रॉजेक्ट के तहत अभी तक कोलकाता के शहरी बाजार में 3,500 से अधिक पॉट बेचे जा चुके हैं। इन पॉट्स को आकर्षक बनाने के लिए इन्हें नई थीम में पेंट किया जाता है। छात्रों का दावा है कि इस प्रॉजेक्ट से 360 टन कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सकेगा। छात्रों ने लगभग 1,650 टन प्लास्टिक के उपयोग को रोका है।


पॉट्स को रंगतीं महिलाएं

बंगाल में गाँव के लोगों को सशक्त बनाने के साथ ही छात्रों की यह टीम गांवों में पानी के दूषित होने के मुद्दे का भी मुकाबला कर रही है। 2018 में प्रॉजेक्ट शुद्धि की शुरुआत की गई थी। इसके जरिए गांवों में पानी को साफ किया जाता है और उसे पीने योग्य बनाया जाता है। ये फिल्टर नौ लीटर, 24 लीटर और 70 लीटर के अलग-अलग साइज में आते हैं। इसमें लाल मिट्टी, नदी की रेत और चूरे जैसी सामग्री होती है जिससे पानी को साफ किया जाता है।


कॉलेज की वेबसाइट के अनुसार प्रॉजेक्ट शुद्धि के तहत 20,00,000 लीटर से अधिक पानी को फिल्टर किया गया है। इससे 10,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर लाभ पहुंचा है।


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