कैसे किसानों की किस्मत बदल रहा है एग्रीटेक स्टार्टअप ‘Fyllo’
एग्रीटेक स्टार्टअप Fyllo देशभर के अन्नदाताओं को IoT डिवाइस और AI समर्थित सलाह देकर स्मार्ट तरीके से खेती करने में मदद करता है. जानिए कैसे दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने नौकरी छोड़कर अपने गांव के अनुभवों से प्रेरणा ली और खेती को टेक्नोलॉजी से जोड़ने का सपना पूरा किया.
हाइलाइट्स
किसानों को स्मार्ट खेती की ताकत दे रहा है Fyllo
IoT और AI से मिल रही है फसल के लिए सटीक सलाह
8,000+ किसान और 50,000 एकड़ में हो रहा इस्तेमाल
कम लागत में बड़ी टेक्नोलॉजी पहुँची छोटे किसानों तक
Fyllo को मिल चुकी है $6 मिलियन से ज़्यादा की फंडिंग
स्पेन-मैक्सिको तक पहुँची भारत की खेती की क्रांति
भारत एक कृषि प्रधान देश है. देश की 60% से अधिक आबादी आज भी खेती से अपनी रोज़ी-रोटी कमाती है. लेकिन इसी कृषि व्यवस्था में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि किसान, जो हमें खाना देता है, वही सबसे ज़्यादा असुरक्षित है. मौसम की मार, कीटों का हमला, पानी की कमी, बढ़ती लागत और बाज़ार में मिलती कम कीमतें — ये सब रोज़ाना के संघर्ष हैं.
लेकिन अब ज़माना बदल रहा है. और इस बदलाव की बुनियाद रखी है कुछ ऐसे युवाओं ने, जो खेतों से निकले, दुनिया देखी, और फिर वापस अपनी मिट्टी में लौट आए.
आज हम आपको एक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी बताने जा रहे हैं — की. एक ऐसा स्टार्टअप जो खेती को स्मार्ट बना रहा है, किसानों की ज़िंदगी आसान कर रहा है, और तकनीक को खेतों तक पहुँचा रहा है.
शुरुआत
सुधांशु राय और सुमित श्योराण — ये नाम आज किसी भी एग्रीटेक सेक्टर में जाने-पहचाने नाम हैं. लेकिन इनकी जड़ें बेहद साधारण हैं. दोनों की परवरिश किसानों के घर में हुई. बचपन से देखा कि उनके माता-पिता कैसे हर साल बारिश की दया पर निर्भर रहते हैं, कैसे खाद कब डालनी है इसका अंदाज़ा खेत में खड़े होकर लगाया जाता है, और कैसे कीट लगने पर पता चलता है जब फसल आधी तबाह हो चुकी होती है.
इन दोनों ने आगे चलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और Infosys की सब्सिडियरी EdgeVerve में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम किया. लेकिन उनके दिल में अब भी खेतों की तस्वीर बसी थी.
YourStory हिंदी से बात करते हुए, सुधांशु बताते हैं, “हमने सोचा, क्या ऐसा कोई तरीका नहीं हो सकता जिससे किसान को पहले ही बता दिया जाए कि क्या करने से फसल को नुकसान नहीं होगा?”
एक अनुभव ने बदली ज़िंदगी
साल 2018 में एक रिसर्च ट्रिप के दौरान दोनों दोस्त नाशिक गए. वहाँ उन्होंने देखा कि अंगूर के बागानों में ज़रा-सी लापरवाही से लाखों का नुकसान हो जाता है. अगर किसान को समय पर जानकारी मिल जाए कि अगले 2 दिन में बारिश है, या मिट्टी में नमी कम हो गई है, तो वह तुरंत कदम उठा सकता है.
वहीं से विचार आया — एक ऐसा डिजिटल सिस्टम बनाया जाए जो किसान के मोबाइल पर सीधे, उसकी ज़बान में, उसके खेत के लिए सलाह भेजे.
यही सोच बन गई Fyllo की नींव. साल 2019 में उन्होंने बेंगलुरु से इस स्टार्टअप की शुरुआत की.

कैसे काम करता है Fyllo?
Fyllo एक IoT (Internet of Things) आधारित एग्रीटेक प्लेटफॉर्म है. इसमें खेत में एक छोटा सा डिवाइस लगाया जाता है, जो लगातार मिट्टी की नमी, तापमान, हवा की गति, वर्षा की संभावना और अन्य डेटा इकट्ठा करता है.
इस डेटा का विश्लेषण कंपनी के बनाए गए खास AI (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) और मशीन लर्निंग (ML) मॉडल करते हैं. फिर किसान को मोबाइल ऐप या SMS के ज़रिए सटीक और फसल-विशेष सलाह दी जाती है — जैसे,
- आज पानी मत दो,
- अगले दो दिन में फंगल अटैक का खतरा है,
- अभी छिड़काव मत करो क्योंकि बारिश होगी,
- मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी है.
Fyllo की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसके पीछे तकनीकी दिमाग और ज़मीन से जुड़ा दिल दोनों हैं. सुधांशु और सुमित, दोनों जानते थे कि किसान को सिर्फ ऐप नहीं चाहिए, उसे भरोसा चाहिए. इसलिए उन्होंने एक हाइब्रिड मॉडल अपनाया — डिजिटल टेक्नोलॉजी के साथ-साथ 25 से ज़्यादा एग्रोनॉमिस्ट और फील्ड एक्सपर्ट्स की टीम, जो गांव-गांव जाकर किसानों की मदद करती है.
बढ़ता नेटवर्क, बढ़ता भरोसा
2024 तक, Fyllo देश के 8,000 से ज़्यादा किसानों तक पहुँच चुका है. इसका नेटवर्क अब 50,000 एकड़ से ज़्यादा खेतों में काम कर रहा है.
राज्य जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इसकी खास उपस्थिति है. खासतौर पर अंगूर, अनार, सेब, टमाटर और मिर्च जैसे हॉर्टिकल्चर फसलों में इसका इस्तेमाल हो रहा है.
अब कंपनी धान, तिलहन, दालें और अन्य फील्ड फसलों पर भी काम कर रही है.
बिज़नेस मॉडल
Fyllo का बिज़नेस मॉडल किसानों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. कंपनी की IoT डिवाइस की शुरुआती कीमत ₹5,999 है, जिसे किसान अपनी खेती के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. पहले साल के बाद किसान केवल ₹200 प्रति माह के शुल्क पर डिजिटल कृषि सलाह प्राप्त कर सकते हैं.
सुधांशु बताते हैं, “छोटे और सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए Fyllo ने क्लस्टर मॉडल भी विकसित किया है, जिसमें एक IoT डिवाइस को 50 किसान तक साझा कर सकते हैं, जिससे लागत काफी कम हो जाती है.”
कंपनी का मोबाइल ऐप कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि अगर कोई किसान पढ़ा-लिखा न भी हो, तब भी वह इसे आसानी से इस्तेमाल कर सके.
फंडिंग और ग्रोथ
Fyllo को शुरुआत से ही निवेशकों का मजबूत भरोसा मिला है. साल 2024 में कंपनी ने $4 मिलियन (करीब ₹33 करोड़) की फंडिंग जुटाई, जिसमें India Quotient और SIDBI Ventures प्रमुख निवेशक रहे. अब तक Fyllo कुल $6 मिलियन से ज़्यादा की फंडिंग हासिल कर चुकी है.
इस पूंजी का उपयोग कंपनी ने कई अहम क्षेत्रों में किया है—नई फसलों पर रिसर्च करने, डेटा मॉडल्स को और बेहतर बनाने, एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स और इंजीनियर्स को टीम में शामिल करने, देशभर में अपना नेटवर्क फैलाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू करने जैसे कदमों के लिए इन निवेशों का लाभ उठाया गया है.
चुनौतियां
हर स्टार्टअप की तरह, Fyllo को भी अपनी शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ी चुनौती थी किसानों को तकनीक पर भरोसा दिलाना, क्योंकि वे पारंपरिक तरीकों के आदी थे. इसके साथ ही, गांवों में इंटरनेट और नेटवर्क की सीमित पहुंच ने काम को और कठिन बना दिया.
सुधांशु राय बताते हैं, “अलग-अलग राज्यों की भाषाएं, फसलें और मिट्टी की विविधता के अनुसार ऐप को लोकल स्तर पर एडजस्ट करना भी आसान नहीं था. इसके अलावा, देशभर में स्थानीय टीम बनाना और उन्हें सही ट्रेनिंग देना भी एक बड़ा टास्क था.”
लेकिन इन सभी मुश्किलों को Fyllo की टीम ने समझदारी, धैर्य और अपने जुनून के दम पर पार किया.

Fyllo की टीम
Fyllo की खासियतें
Fyllo दूसरे प्लेटफॉर्म्स से कई मायनों में अलग है. सबसे पहली खासियत है इसका स्वदेशी रूप से विकसित किया गया IoT हार्डवेयर और AI/ML एल्गोरिदम, जो भारतीय परिस्थितियों और फसलों के लिए खास तौर पर तैयार किए गए हैं. यह किसानों को सामान्य सलाह नहीं, बल्कि उनकी जमीन और फसल के अनुसार विशेष, क्रियाशील सिफारिशें देता है.
दूसरा बड़ा अंतर है इसकी किफायती और सुलभ तकनीक. Fyllo ने खुद की ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है जो मिट्टी की नमी को सटीक रूप से कम लागत में माप सकती है, जिससे बाजार में उपलब्ध महंगे मॉडल्स की तुलना में इसकी कीमत काफी कम है. साथ ही क्लस्टर-बेस्ड अप्रोच और लचीली योजनाओं के ज़रिए छोटे किसान भी इस अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकते हैं.
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Fyllo का फोकस सिर्फ डिजिटल अलर्ट देने तक सीमित नहीं है—इसके पास 25 से अधिक प्रशिक्षित एग्रोनॉमिस्ट्स और फील्ड टीम्स का मजबूत नेटवर्क है जो किसानों को व्यक्तिगत सलाह और ऑन-ग्राउंड सपोर्ट देते हैं. यह डिजिटल और फिजिकल का हाइब्रिड मॉडल न सिर्फ भरोसा बढ़ाता है, बल्कि किसानों के परिणामों को भी बेहतर बनाता है.
भविष्य की योजनाएं
Fyllo का उद्देश्य है — हर भारतीय किसान तक "स्मार्ट खेती" की पहुँच. भले ही उसका खेत छोटा हो, लेकिन उसकी सोच बड़ी होनी चाहिए. यह स्टार्टअप किसानों को सिर्फ सलाह नहीं देता, उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाता है.
सुधांशु राय बताते हैं, “अगले पांच सालों में हम पूरे भारत के मुख्य फसल क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहते हैं. साथ ही, हम दालों, तिलहन और चावल जैसी नई फसलों के लिए भी सपोर्ट शुरू करेंगे. हमारा लक्ष्य है कि कम से कम 20 लाख भारतीय किसानों को अपनी सेवा दें.”
वे आगे बताते हैं, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमने स्पेन, फ्रांस, तुर्की और मेक्सिको में पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिए हैं. यहां हमारा फोकस अंगूर की खेती और दूसरी हाई-वैल्यू बागवानी फसलों पर है. हम दुनिया भर के छोटे किसानों के लिए भरोसेमंद और प्रमुख एग्रीटेक पार्टनर बनना चाहते हैं.”
Fyllo की कहानी हमें सिखाती है कि बदलाव लाना हो तो नज़र सिर्फ शहरों की ओर नहीं, गांव की धूल और मिट्टी में भी झांकनी पड़ती है. सुधांशु और सुमित जैसे युवा जब अपनी जड़ों की ओर लौटे, तो साथ लाए टेक्नोलॉजी, सपना और समर्पण. Fyllo आज सिर्फ एक कंपनी नहीं, एक उम्मीद बन चुका है — हर उस किसान के लिए जो बेहतर भविष्य का हकदार है.




