पढ़ाई का आधा सिलेबस हटाने की सलाह क्यों दे रहे हैं प्रो. डॉ. अशोक झुनझुनवाला, जानिए पूरा विजन
पद्मश्री प्रो. अशोक झुनझुनवाला ने भारत के लिए 2 करोड़ उद्यमी तैयार करने का विजन पेश किया. उन्होंने इंजीनियरिंग और स्कूलों का 50 फीसदी सिलेबस हटाने की वकालत की और IIT Madras Research Park के 70,000 करोड़ रुपये के स्टार्टअप इकोसिस्टम की सफलता की कहानी भी साझा की.
भारत में डीप-टेक (DeepTech) इकोसिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने वाले पद्मश्री प्रो. डॉ. अशोक झुनझुनवाला (Prof Ashok Jhunjhunwala) का मानना है कि देश की असली ताकत कुछ दर्जन या कुछ लाख स्टार्टअप नहीं, बल्कि करोड़ों नए उद्यमी होंगे. उनका कहना है कि अगर भारत 20 मिलियन (2 करोड़) उद्यमी तैयार कर लेता है, तो देश की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है.
दिल्ली में उनकी अधिकृत जीवनी Roots & Wings: Building India's Deep Tech Ecosystem के लॉन्च के दौरान उन्होंने यह बात कही. इस कार्यक्रम में उनकी बातचीत YourStory और The Bharat Project की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा (Shradha Sharma) के साथ हुई.
यह किताब उद्यमी सलोनी मल्होत्रा (Saloni Malhotra) ने लिखी है. उन्होंने प्रो. झुनझुनवाला के साथ सात वर्षों तक काम किया और उनसे मार्गदर्शन लिया. किताब में 1981 में भारत लौटने के बाद से लेकर पिछले चार दशकों में उनके संस्थान निर्माण के सफर को विस्तार से बताया गया है. इसमें खास तौर पर IIT Madras Research Park की कहानी शामिल है, जिसने भारत में अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के साथ काम करने का तरीका बदल दिया.
कार्यक्रम के दौरान प्रो. झुनझुनवाला ने कहा कि देश को केवल 20 या 200 उद्यमियों की जरूरत नहीं है. दो मिलियन (20 लाख) भी काफी नहीं हैं. असली बदलाव तब आएगा, जब भारत 20 मिलियन (2 करोड़) उद्यमी तैयार करेगा.
70,000 करोड़ के स्टार्टअप्स
उन्होंने अपने सफर से जुड़े कुछ ऐसे आंकड़े भी साझा किए, जिन्होंने वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया.
उन्होंने बताया कि IIT Madras Research Park के निर्माण के दौरान उन्होंने सरकार से फंड नहीं लिया. उनका मानना था कि आसानी से मिलने वाला पैसा कई बार विकास में बाधा बन जाता है. इसलिए उन्होंने करीब 300 से 350 करोड़ रुपये का बैंक लोन लिया. बाद में पूरा कर्ज चुका दिया और 80 करोड़ रुपये का नकद मुनाफा भी कमाया.
उन्होंने बताया कि जून 2024 तक Research Park से 350 स्टार्टअप निकल चुके हैं. आज इन स्टार्टअप्स की कुल वैल्यू करीब 70,000 करोड़ रुपये है. खास बात यह है कि इस पूरे सफर में सरकार का खर्च सिर्फ 2 से 3 करोड़ रुपये के आसपास रहा.
प्रो. झुनझुनवाला का मानना है कि भारत के पास करीब 1.5 लाख वैज्ञानिक हैं. ये शोध पत्र तो लिखते हैं, लेकिन उनकी रिसर्च अक्सर बाजार तक नहीं पहुंच पाती. अगर इन वैज्ञानिकों को 22 साल के ऐसे युवाओं के साथ जोड़ा जाए, खासकर मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के युवाओं के साथ, जो कुछ नया बनाने का जज्बा रखते हैं, तो देश में बड़े बदलाव संभव हैं.
इसी सोच के साथ वह अब अपने नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. वह ITEL Foundation के चेयरमैन हैं. इस संस्था के नेतृत्व में कई संगठन मिलकर एक सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल शहरी परिवहन प्रणाली विकसित कर रहे हैं. उनका दावा है कि इससे लोग 15 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 20 मिनट में तय कर सकेंगे.
उन्होंने बताया कि इस मॉडल का कैंपस में सफल परीक्षण किया जा चुका है. अब अगले साल इसे Sri City में शुरू करने की योजना है. इसके लिए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अपने राज्य को पहला स्थान बनाने की पेशकश की है.
क्यों कही आधा सिलेबस हटाने की बात?
शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए प्रो. झुनझुनवाला ने सबसे बड़ा और विवादित सुझाव दिया. उनका कहना है कि इंजीनियरिंग और स्कूलों के मौजूदा सिलेबस का लगभग 50 फीसदी हिस्सा हटाया जा सकता है.
उनका मानना है कि स्कूल और कॉलेज का उद्देश्य छात्रों को परीक्षा पास कराना नहीं होना चाहिए. संस्थानों को उन्हें सीखना सिखाना चाहिए और कुछ नया बनाना सिखाना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों को मिलकर काम करना और नई चीजें बनाना सीखना होगा. यही भविष्य की जरूरत है.
उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी यह राय विवादास्पद हो सकती है, लेकिन वह इस पर पूरी तरह कायम हैं.
उन्होंने IIT में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि जब IIT में छात्राओं के लिए सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव आया था, तब इसका काफी विरोध हुआ था. लेकिन बाद में इसी फैसले ने संस्थानों की तस्वीर बदल दी.
उन्होंने बताया कि जब वह IIT Kanpur में पढ़ते थे, तब 400 छात्रों की उनकी पूरी बैच में सिर्फ दो छात्राएं थीं. वहीं आज IIT Madras में 1,000 अंडरग्रेजुएट छात्रों की एक बैच में करीब 250 छात्राएं हैं.
Artificial Intelligence यानी AI पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज भी बैटरी सेल से लेकर चिप्स तक लगभग हर अहम तकनीक विदेशों से आयात करता है. ऐसे में भारत को सबसे पहले अपनी समस्याओं का समाधान खुद विकसित करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ट्रैफिक, कचरा प्रबंधन, जलभराव और उर्वरकों के आयात जैसी समस्याएं देश के सामने बड़ी चुनौतियां हैं. लेकिन यही चुनौतियां नए स्टार्टअप्स और डीप-टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़े अवसर भी हैं.
प्रो. झुनझुनवाला ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने जीवन में IIT के डायरेक्टर बनने जैसे कई बड़े अवसर ठुकराए. उनका कहना है कि उन्हें न पैसा चाहिए, न प्रसिद्धि और न ही कोई शक्ति. उनका केवल एक सपना है कि भारत बड़े स्तर पर बदले और देश के लोग खुशहाल जीवन जीएं.
उन्होंने भरोसा जताया कि अगर भारत 20 मिलियन उद्यमी तैयार करने में सफल हो जाता है, तो देश का भविष्य उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से बदल सकता है.
Edited by Ravi Pareek



