लोहे का छोटा काम करने वाले के बेटे का बड़ा कमाल, माइक्रोसॉफ्ट ने दिया 1.20 करोड़ का जॉब पैकेज

By Rimpi kumari
February 06, 2016, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:18:13 GMT+0000
लोहे का छोटा काम करने वाले के बेटे का बड़ा कमाल, माइक्रोसॉफ्ट ने दिया 1.20 करोड़ का जॉब पैकेज
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वेल्डर के बेटे वात्सल्य को माइक्रोसाॅफ्ट से मिला 1.2 करोड़ का जाॅब आॅफर... 

आईआईटी, खडगपुर से कर रहे हैं बीटेक...


कई लोग सफलता की कहानी लिखते तो हैं पर कहा ये जाता है कि उनको तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जाती रहीं या उन्हें सारी सुविधाएं मिलती रहीं। पर बड़ी सफलता वो कहलाती है जो तमाम मुश्किलों के साथ चलकर अपनी राह बनाते हैं और सफल होकर मंजिल पर अपना पताका लहराते हैं। वात्सल्य सिंह चौहान ने सफलता का ऐसा ही झंडा गाड़ा है, जिसके बारे में आम लोग कल्पना तक नहीं कर सकते। माइक्रोसाॅफ्ट रेडमंड, वाशिंगटन ने आईआईटी, खड़गपुर में बीटेक कम्प्यूटर साइंस फाइनल ईयर के छात्र वात्सल्य सिंह चौहान को सालाना 1. 20 करोड़ रू. सैलेरी पेकेज का जाॅब आॅफर दिया है। आईआईटी में 1 से 20 दिसम्बर तक हुए कैंपस प्लेसमेंट में साॅफ्टवेयर इंजीनियर के पद लिए उन्हें यह सबसे बड़ा पैकेज मिला।

बिहार के खगड़िया कस्बे में सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले वात्सल्य ने 12 वीं तक अपनी पूरी पढ़ाई हिंदी माध्यम से की। एक तो साइंस और उसके ऊपर से हिन्दी माध्यम? जो हीन भावना की खाई हिन्दी और अंग्रेजी के बीच तैर रही है वो किसी से छुपी नहीं है। ज़ाहिर है हिन्दी माध्यम से बारहवीं करने वाले वात्सल्य को भी उस फर्क से गुजरना पड़ा। खैर, हिन्दी से 12वीं बोर्ड परीक्षा दी और 75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। आज के दौर में 12 वीं 75 फीसदी लाने वाला छात्र किसी भी सूरत में अच्छा नहीं माना जाता है। लेकिन कहते हैं जिसकी मंजिल बड़ी होती है, जिसे पहुंचना कहीं और होता है उसके लिए ऐसी छोटी बातें मायने नहीं रखतीं। वात्सल्य ने 12वीं के साथ जेईई की परीक्षा दी। सफलता तो मिली पर अच्छी वरीयता नहीं मिली। बस यही वो समय था जिसने वात्सल्य को एकदम से बदल कर रख दिया। उन्होंने इसे चुनौती के तौर पर लिया और तय किया कि वो अच्छी वरीयता के साथ आईआईटी में पहुंचेंगे और आगे का रास्ता तय करेंगे। वात्सल्य ने खुद के लिए मंजिल बनाई, वहां तक पहुचने के लिए तरीके बनाए और जुट गए ईमानदार कोशिश के साथ।

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वात्सल्य ने अपनी इस कोशिश में एलेन कॅरिअर इंस्टीट्यूट का साथ लिया। कोटा के इस इंस्टीट्यूट में आकर जमकर तैयारी की और आईआईटी-जेईई, 2012 में आॅल इंडिया रैंक-382 पाकर आईआईटी, खड़गपुर मे बीटेक कम्प्यूटर साइंस ब्रांच मे दाखिला लिया। साल गुजरा, लेकिन वात्सल्य ने खुद को मांजना जारी रखा। कहते हैं कि जब सारी कोशिशें एक साथ होती हैं तो पूरी कायनात भी उसे पूरा करने में जुट जाती है। दिसंबर महीने में कैंपस सलेक्शन के लिए यूएस की प्रमुख माइक्रोसाॅफ्ट रेडमंड कंपनी खड़गपुर आई और साॅफ्टवेयर इंजीनियर के लिए आईआईटी में ग्रेजुएट छात्रों का कोडिंग में आॅनलाइन टेस्ट लिया। फिर लिखित टेस्ट और इंटरव्यू। हर परीक्षा में वात्सल्य ने अपना जौहर दिखाया और परिणाम जो है वो आपके सामने है, उन्हें माइक्रोसाॅफ्ट ने 1.20 करोड़ रूपए की सालाना सैलेरी पर जाॅब आॅफर दिया।

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21 वर्षीय वात्सल्य के पिता चंद्रकांत सिंह खगड़िया में ग्रिल व शटर बनाने का काम करते हैं। वात्सल्य कुल तीन भाई व तीन बहन हैं। ज़ाहिर है परिवार की आमदनी इतनी नहीं है कि बच्चों को मन मुताबिक पढ़ाई कराई जा सके। तमाम योग्यता के बावजूद वात्सल्य के पिताजी इस स्थिति में नहीं थे वो अपने बेटे को कोचिंग के लिए राजस्थान के कोटा भेज सकें। लेकिन कहते हैं एक राह रुकती है तो दूसरी का पता चलता है। पिता के संघर्ष और वात्सल्य की प्रतिभा देख एलेन निदेशक श्री राजेश माहेश्वरी ने कोटा में नि:शुल्क क्लासरूम कोचिंग और हाॅस्टल सुविधा देकर उसका हौसला बढ़ाया और देखभाल भी की। इससे वात्सल्य को घर जैसा वातावरण मिला। यहां ओपन सेशन मे उसे बहुत मोटिवेशन मिला।

बीमारी के बावजूद सफल रहा

वात्सल्य ने अपनी पढ़ाई कोटा में शुरू की। जब परीक्षा का समय तो वात्सल्य को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। वात्सल्य ने योरस्टोरी को बताया, 

"आईआईटी-जेईई से 4 दिन पहले अचानक मेरी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। तेज गर्मी में सिर धोकर मैं पेपर देने पहुंचा। पेपर-1 आसान था लेकिन बीमारी के चलते मामूली बिगड़ गया। फिर से हिम्मत जुटाई और पेपर-2 कठिन होते हुए भी उसमें ज्यादा स्कोर किया। उसी समय में मुझे लगा कि इस बार परिणाम अच्छा आना चाहिए।"

इससे पहले वो एआई ईईई में बिहार और झारखंड में स्टेट टाॅपर रहे। भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) और आईआईएसई में भी वे क्वालिफाई हुए लेकिन उन्होंने बीटेक के लिए आईआईटी को चुना।

गरीब छात्रों को पढ़ाने का जुनून

वात्सल्य का कहना है,

"छुट्टियों में घर जाकर गरीब बच्चों को पढ़ाना मुझे अच्छा लगता है। आईआईटी कैंपस में भी मैं आॅटोचालकों के कुछ बच्चों को पढ़ाता हूं। मैं और मेरे तीन और आईआईटीयन दोस्तों ने तय किया है कि हम भविष्य में बिहार में एक अलग माॅडल स्कूल खोलने के प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। इसमें आईआईटी छात्र छुट्टियों में स्कूल जाकर 4 माह तक बच्चों को पढाएंगे। बाकी समय अन्य टीचर्स पढ़ाएंगे। सामान्य बच्चों को कम फीस लेकर और गरीबों को निशुल्क पढ़ाने की योजना है।" 

वात्सल्य बिहार में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नई जेनरेशन को शिक्षा से जोड़ना चाहते हैं।

भविष्य में नए स्टार्टअप की योजना

अपने परिवार के साथ वातसल्य

अपने परिवार के साथ वातसल्य


वातसल्य का कहना है कि भविष्य में वो अपना स्टार्टअप शुरु करेंगे। आईआईटी के अपने बैचमेट के साथ मिलकर एक स्टार्टअप को डिजाइन भी किया है। हाथ की रिंग में लगाने वाली एक मिनी स्मार्ट डिवाइस तैयार की, जिससे इंटरनेट के जरिए एक्सेसिंग आसान होगी। वात्सल्य का भविष्य में यूएस जाकर माइक्रोसाॅफ्ट रेडमंड में लीक से हटकर कुछ नया करने का इरादा है। रिसर्च में रूचि होने से एडवांस्ड टेक्नोलाॅजी पर आधारित इनोवेटिव प्रोजेक्ट करने का इरादा है।