कैसे फ्लाइट बुकिंग को आसान बना रहा है स्टार्टअप Away AI, मिलेगी सस्ती टिकट?
Away AI एक AI-समर्थित ट्रैवल प्लेटफॉर्म है. इसकी शुरुआत 2026 में हुई थी. स्टार्टअप का लक्ष्य यात्रियों को सही फ्लाइट चुनने में मदद करना है. यह सिर्फ फ्लाइट्स की लंबी लिस्ट नहीं दिखाना चाहता. कंपनी समय, कीमत और यात्री की जरूरत के आधार पर बेहतर विकल्प सुझाने की कोशिश करती है.
हाइलाइट्स
Away AI स्टार्टअप AI की मदद से सही फ्लाइट चुनने में मदद करता है
सुकेश शेट्टी ने Cleartrip के अनुभव से स्टार्टअप शुरू किया
प्लेटफॉर्म कीमत, समय और जरूरत के आधार पर विकल्प सुझाता है
AI ट्रैवल में सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों का भरोसा है
ऑनलाइन फ्लाइट बुक करना स्क्रीन पर जितना आसान दिखाई देता है, फैसला लेना उतना ही मुश्किल हो सकता है. एक ही रूट पर दर्जनों फ्लाइट्स. अलग-अलग एयरलाइंस. अलग कीमतें. अलग समय. कोई टिकट सस्ता है, लेकिन उसका समय सुविधाजनक नहीं. कोई महंगा है, लेकिन यात्रा के कई घंटे बचा सकता है.
ऐसे में यात्री के सामने सवाल सिर्फ टिकट खरीदने का नहीं होता. सवाल होता है कि उपलब्ध विकल्पों में उसके लिए सबसे सही विकल्प कौन सा है.
भारत में ट्रैवल बुकिंग तेजी से डिजिटल हो चुकी है. Google और Kantar की India Travel 2025 रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 85 प्रतिशत यात्री अपनी ट्रैवल बुकिंग ऑनलाइन बुक करना पसंद करते हैं. वहीं, 44 प्रतिशत यात्री छुट्टी की प्लानिंग और बुकिंग करने में औसतन एक सप्ताह से अधिक समय लेते हैं.
यही वह समस्या है, जिस पर मुंबई में जन्मे और पले-बढ़े सुकेश शेट्टी ने काम करने का फैसला किया.
उनके स्टार्टअप Away AI ने एक AI-समर्थित ट्रैवल प्लेटफॉर्म बनाया है. कंपनी का दावा है कि उसका उद्देश्य यात्रियों को सिर्फ फ्लाइट्स की लंबी लिस्ट दिखाना नहीं, बल्कि उनकी जरूरत के हिसाब से बेहतर विकल्प चुनने में मदद करना है.
लेकिन AI के जरिए ट्रैवल प्लान करना और किसी यात्री की ओर से वास्तविक बुकिंग का फैसला लेना, दो अलग-अलग बातें हैं. यही अंतर Away AI के बिजनेस मॉडल और उसकी सबसे बड़ी चुनौती दोनों को बयां करता है.
हाल ही में YourStory ने Away AI के फाउंडर और CEO सुकेश शेट्टी से बात की. इस दौरान उन्होंने अपनी ऑन्त्रप्रेन्योरशिप जर्नी, Away AI शुरू करने के पीछे की सोच और AI के जरिए ट्रैवल बुकिंग के भविष्य पर विस्तार से बात की.
Cleartrip से Away AI तक
सुकेश शेट्टी का जन्म और शुरुआती जीवन मुंबई में बीता. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत होटल प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सिस्टम्स और जर्नी मैनेजमेंट ऑपरेशंस से की. लेकिन 2011 में Cleartrip से जुड़ने के बाद ट्रैवल इंडस्ट्री उनके पेशेवर जीवन का मुख्य हिस्सा बन गई.
आने वाले वर्षों में उन्होंने ट्रैवल बिजनेस को अलग-अलग स्तरों पर देखा. होटल टेक्नोलॉजी, ट्रैवल ऑपरेशंस और B2B (बिजनेस टू बिजनेस) ट्रैवल बिजनेस में काम करने के बाद उन्होंने 2020 और 2021 के दौरान अपना वेंचर शुरू किया.
यह एक व्हाइट-लेबल B2B प्लेटफॉर्म और API (Application Programming Interface) था, जिसे उन कंपनियों के लिए तैयार किया गया था जो ट्रैवल बिजनेस में एंट्री करना चाहती थीं.
सुकेश कहते हैं, “मेरे करियर में एक बात लगातार रही है. मुझे ऐसी चीजें बनाना पसंद है जो अभी मौजूद नहीं हैं. होटल टेक्नोलॉजी से लेकर ट्रैवल ऑपरेशंस और फिर B2B प्लेटफॉर्म तक, मैंने अलग-अलग तरह के काम किए.”
इसके बाद वह 2022 में फिर Cleartrip से जुड़े. यहां उन्होंने कंपनी के B2B बिजनेस को ज़ीरो से खड़ा करने पर काम किया. इसमें ट्रैवल एजेंसी, कॉरपोरेट और API बिजनेस शामिल थे. इन सेक्टर्स में काम करने के बाद उन्होंने सितंबर में कंपनी छोड़ी और Away AI पर काम शुरू किया.
वेबसाइट से बेहतर निकले ट्रैवल एजेंट
बेंगलुरु स्थित Away AI का आइडिया किसी लैब में हुए AI प्रयोग से नहीं निकला. इसकी शुरुआत एक बिजनेस अनुभव से हुई. Cleartrip में B2B बिजनेस संभालते हुए सुकेश और उनकी टीम ने ट्रैवल एजेंट्स के काम करने के तरीके को करीब से देखा. सैद्धांतिक रूप से ऑनलाइन ट्रैवल वेबसाइट के पास कई फायदे होते हैं. उसके पास बड़ी इन्वेंट्री होती है. सर्च फास्ट होती है. कस्टमर कुछ सेकंड में सैकड़ों विकल्प देख सकता है.
लेकिन वास्तविक दुनिया में ट्रैवल एजेंट कई ग्राहकों के लिए अलग तरह की वैल्यू देते हैं. वे सिर्फ उपलब्ध टिकट नहीं दिखाते. वे ग्राहक की जरूरत समझते हैं. सप्लायर्स से बात करते हैं. बेहतर डील तलाशते हैं और कई बार यात्रा की पूरी योजना के आधार पर विकल्प सुझाते हैं.
यह मॉडल आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
सुकेश बताते हैं, “हमने देखा कि एक अच्छा ट्रैवल एजेंट सिर्फ टिकट नहीं बेचता. वह ग्राहक के लिए मेहनत करता है. वह सप्लायर से बात करता है, बेहतर डील तलाशता है और यात्रा की जरूरत को समझता है.”
उनके मुताबिक, सामान्य ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म अक्सर विकल्पों की लंबी सूची दिखाते हैं और अंतिम फैसला यात्री पर छोड़ देते हैं.
यहीं से Away AI का आइडिया आया और 2026 में इसे लॉन्च किया गया. कंपनी ऐसा अनुभव तैयार करना चाहती है, जहां AI सिर्फ सर्च करने में मदद न करे, बल्कि उपलब्ध विकल्पों का आकलन भी करे.

सवाल सिर्फ सबसे सस्ती फ्लाइट का नहीं है
आज ज्यादातर ऑनलाइन फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म सर्च और डिस्कवरी पर काम करते हैं. यात्री शहर चुनता है. तारीख डालता है. फिर उसे फ्लाइट्स की लिस्ट दिखाई जाती है. इसके बाद वह कीमत, समय, स्टॉप और दूसरी सुविधाओं के आधार पर फैसला करता है.
Away AI इसी प्रक्रिया में AI को ज्यादा सक्रिय भूमिका देना चाहता है. कंपनी के मुताबिक, उसका सिस्टम समय, कीमत और यात्रा की परिस्थितियों के बीच संतुलन को समझने की कोशिश करता है.
मसलन, कोई फ्लाइट थोड़ी महंगी हो सकती है, लेकिन वह यात्री को अगले दिन सुबह की महत्वपूर्ण मीटिंग तक समय पर पहुंचा सकती है. दूसरी फ्लाइट सस्ती हो सकती है, लेकिन उसमें लंबा लेओवर हो सकता है.
सुकेश कहते हैं, “हमारा लक्ष्य सिर्फ सबसे सस्ती सीट ढूंढना नहीं है. कभी बेहतर कीमत जीत होती है और कभी बेहतर शर्तें.”
उनके मुताबिक, कुछ यात्रियों के लिए रिफंडेबल टिकट ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है. किसी दूसरे यात्री के लिए कम कैंसिलेशन चार्ज या अतिरिक्त बैगेज बेहतर विकल्प हो सकता है.
यह आइडिया उस बड़े बदलाव से भी जुड़ा है, जिसमें डिजिटल ट्रैवल प्लेटफॉर्म सिर्फ सर्च इंजन नहीं, बल्कि ज्यादा व्यक्तिगत अनुभव देने की कोशिश कर रहे हैं.
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण सवाल बना रहता है — किसी AI सिस्टम द्वारा सुझाया गया “बेहतर” विकल्प आखिर किस आधार पर तय होगा?
यात्रा में बेहतर विकल्प हमेशा एक जैसा नहीं होता. एक बिजनेस ट्रैवलर और परिवार के साथ यात्रा कर रहे व्यक्ति की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं. इसलिए किसी भी AI-समर्थित सिस्टम की उपयोगिता उसके सुझावों से ज्यादा इस बात पर निर्भर करेगी कि वह यात्री की प्राथमिकताओं को कितनी सही तरह समझता है.
छह महीने की तैयारी और एक कठिन सवाल
Away AI को सार्वजनिक रूप से लॉन्च करने से पहले टीम ने करीब छह महीने आइडिया, प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी पर काम किया. इसके बाद शुरुआती यूजर्स के लिए ऐप का इनवाइट-ओनली वर्जन लॉन्च किया गया.
सुकेश के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ इंजीनियरिंग की नहीं थी. सवाल यह था कि क्या कंपनी का AI वास्तव में किसी सामान्य AI मॉडल से अलग और उपयोगी काम कर सकता है.
Claude और Gemini जैसे बड़े AI मॉडल आज ट्रैवल प्लान तैयार करने, डेस्टिनेशन सुझाने और ट्रैवल प्रोग्राम तैयार करने में मदद कर सकते हैं.
लेकिन सुकेश का मानना है कि असली चुनौती प्लान बनाने के बाद शुरू होती है.
वह कहते हैं, “हमने खुद से पूछा कि ऐसा कौन सा काम है जिसमें सामान्य AI मॉडल अभी गहराई से काम नहीं कर सकते. हमारे लिए जवाब था एक्जीक्यूशन.”
यात्रा का सुझाव देना अपेक्षाकृत आसान है. लेकिन सही सप्लायर चुनना, वास्तविक बुकिंग करना, बदलाव संभालना और किसी गलती की स्थिति में जिम्मेदारी लेना कहीं ज्यादा जटिल काम है.
Away AI का फोकस इसी हिस्से पर है. कंपनी के अनुसार, वह अपने AI को सिर्फ यात्रा की जानकारी देने के बजाय यात्रा से जुड़े फैसलों और एक्जीक्यूशन में उपयोगी बनाने की कोशिश कर रही है.
फंडिंग से पहले प्रोडक्ट को साबित करने की कोशिश
Away AI की शुरुआती फंडिंग फाउंडर्स ने खुद की है. कंपनी ने शुरुआत में किसी बाहरी इन्वेस्टर से फंडिंग लेने के बजाय पहले प्रोडक्ट और उसके उपयोग को समझने पर ध्यान देने का फैसला किया.
यह शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए असामान्य रणनीति नहीं है, लेकिन AI-समर्थित ट्रैवल बिजनेस में आगे चलकर टेक्नोलॉजी, सप्लायर इंटीग्रेशन और कस्टमर सपोर्ट के लिए फंडिंग की जरूरत बढ़ सकती है.
फिलहाल कंपनी किसी बड़े स्केल के आंकड़े पेश करने के बजाय अपने शुरुआती प्रोडक्ट को डेवलप करने में लगी है.
AI ट्रैवल का भविष्य और भरोसे की समस्या
Away AI की शुरुआत फिलहाल फ्लाइट्स पर केंद्रित है. कंपनी का मानना है कि फ्लाइट बुकिंग ट्रैवल के सबसे जटिल हिस्सों में से एक है. यहां कीमतें बदलती रहती हैं, नियम अलग होते हैं और कैंसिलेशन या बदलाव की स्थिति में ग्राहक अनुभव जल्दी खराब हो सकता है.
भारत का एविएशन सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, 2025 में भारत में करीब 7.86 करोड़ अंतरराष्ट्रीय यात्रियों ने हवाई यात्रा की. यह संख्या 2024 में 7.25 करोड़ थी. यानी एक साल में अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रियों की संख्या करीब 8.4 प्रतिशत बढ़ी.
यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ डिजिटल बुकिंग अनुभव का महत्व भी बढ़ रहा है.
लेकिन AI के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुविधा नहीं, भरोसा हो सकती है.
IATA की Global Passenger Survey (GPS) 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, यात्री यात्रा के अलग-अलग चरणों में डिजिटल टूल्स और स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल चाहते हैं. सर्वे में 78 प्रतिशत यात्रियों ने कहा कि वे डिजिटल वॉलेट, पासपोर्ट और लॉयल्टी कार्ड जैसी सुविधाओं को एक ही ऐप में देखना चाहते हैं.
वहीं, AI के मामले में भरोसे की समस्या अभी भी बनी हुई है.
Expedia Group की 2026 की AI Trust Gap रिपोर्ट, जिसमें भारत सहित अमेरिका और ब्रिटेन के 5,700 से अधिक लोगों को शामिल किया गया, के अनुसार करीब 70 प्रतिशत यात्रियों ने AI चैटबॉट या एजेंट की तुलना में बुकिंग के लिए भरोसेमंद ट्रैवल ब्रांड को प्राथमिकता दी. यानी यात्री AI से सुझाव लेने के लिए तैयार हो सकते हैं, लेकिन पैसे खर्च करने और वास्तविक बुकिंग के मामले में भरोसा अभी भी एक बड़ा मुद्दा है. यही चुनौती Away AI जैसे प्लेटफॉर्म के सामने भी होगी.
सुझाव से आगे, जिम्मेदारी तक
Away AI के फाउंडर और CEO सुकेश शेट्टी का मानना है कि आने वाले वर्षों में ट्रैवल इंडस्ट्री में AI की भूमिका बदल सकती है. आज AI मुख्य रूप से सुझाव देता है. भविष्य में वह बुकिंग कर सकता है, बदलाव संभाल सकता है, कैंसिलेशन प्रक्रिया में मदद कर सकता है और यात्रा के दौरान सहायता दे सकता है.
सुकेश कहते हैं, “आज हम कई बटन दबाकर और दर्जनों पेज देखकर टिकट बुक करते हैं. निकट भविष्य में AI सीधे ट्रैवल सिस्टम्स के साथ बातचीत कर सकता है.”
लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी के सवाल भी जुड़े हैं. अगर AI ने गलत टिकट बुक कर दिया तो जिम्मेदार कौन होगा? अगर यात्री की प्राथमिकताओं को गलत समझ लिया गया तो क्या होगा? अगर फ्लाइट बदल गई या कैंसिल हो गई तो AI-समर्थित सिस्टम ग्राहक की समस्या कितनी तेजी से हल कर पाएगा?
यही वे सवाल हैं जो AI ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के भविष्य को तय करेंगे.
सुकेश कहते हैं, “AI के साथ भरोसा कोई अतिरिक्त चीज नहीं है. वही प्रोडक्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है.”
उनके मुताबिक, किसी AI सिस्टम को पहले छोटे कामों में भरोसेमंद साबित होना होगा. इसके बाद ही ग्राहक उसे बड़े फैसलों की जिम्मेदारी देगा.
Away AI के सामने असली परीक्षा
Away AI की यात्रा अभी शुरुआती दौर में है. कंपनी के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि AI ट्रैवल प्लान बना सकता है या नहीं. आज के जनरेटिव AI मॉडल यह काम काफी हद तक कर सकते हैं.
असली सवाल यह है कि क्या यात्री सैकड़ों विकल्पों की जगह किसी AI सिस्टम की सिफारिश पर भरोसा करेंगे? क्या AI एक अच्छे ट्रैवल एजेंट की तरह ग्राहक की जरूरत समझ पाएगा? क्या वह सही समय पर सही विकल्प चुन सकेगा?
और सबसे महत्वपूर्ण, क्या वह अपने फैसले के नतीजे की जिम्मेदारी लेने लायक सिस्टम बना पाएगा?
सुकेश AI सेक्टर में आने वाले नए ऑन्त्रप्रेन्योर्स को भी इसी अनुभव के आधार पर सलाह देते हैं कि सिर्फ किसी बड़े AI मॉडल के ऊपर एक साधारण फीचर बनाना पर्याप्त नहीं है.
उनके मुताबिक, असली अवसर वहां है जहां किसी उद्योग की जटिल समस्या को गहराई से समझकर हल किया जाए.
Away AI इसी विचार पर अपना दांव लगा रहा है. फिलहाल यह एक शुरुआती प्रयोग है, जिसकी सफलता का फैसला टेक्नोलॉजी से ज्यादा यात्रियों के व्यवहार से होगा.
ट्रैवल टेक्नोलॉजी लंबे समय तक बेहतर सर्च और ज्यादा विकल्प देने की दौड़ में रही है. अब अगला सवाल शायद यह है कि क्या टेक्नोलॉजी यात्रियों को विकल्पों की भीड़ से निकालकर बेहतर फैसला लेने में मदद कर सकती है?
Away AI इसी सवाल का जवाब खोजने की कोशिश कर रहा है.




