3.5 लाख में खरीदा बैंक का पुराना सर्वर, बेंगलुरु का इंजीनियर अब हर महीने कमा रहा 27 लाख रुपये
बेंगलुरु के 27 वर्षीय प्रोग्रामर राज ने सरकारी निलामी में 3.5 लाख रुपये में पुराना बैंक सर्वर खरीदकर AI सेटअप तैयार किया. उनका दावा है कि अब वह 11 अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करते हुए हर महीने 27 लाख रुपये कमा रहे हैं. जानिए इस अनोखी सफलता की पूरी कहानी...
अगर कोई आपसे कहे कि बैंक का पुराना सर्वर खरीदकर हर महीने लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं, तो शायद यकीन करना मुश्किल होगा. लेकिन बेंगलुरु के 27 वर्षीय प्रोग्रामर राज की कहानी कुछ ऐसी ही है. राज का दावा है कि उन्होंने सरकारी IT नीलामी से एक पुराना बैंक सर्वर खरीदा और उसी की मदद से अपना AI कारोबार खड़ा कर लिया.
राज बेंगलुरु में एक बेडरूम वाले फ्लैट में रहते हैं और वहीं से कोडिंग का काम करते हैं. कुछ महीने पहले उन्होंने ऐसा कदम उठाया, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. उन्होंने सरकारी IT नीलामी में हिस्सा लिया.
सरकारी नीलामी ने बदली किस्मत
भारत में समय-समय पर सरकारी विभाग और बैंक अपने पुराने सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और दूसरे IT उपकरणों की नीलामी करते हैं. यह ऐसा हार्डवेयर होता है जिसे संस्थाएं इस्तेमाल से बाहर कर चुकी होती हैं. आमतौर पर इन नीलामियों में बहुत कम लोग पहुंचते हैं.
राज ने इसी नीलामी से चार स्टोरेज शेल्फ, 96TB हार्ड ड्राइव और एक मैनेज्ड स्विच खरीदा. उनका कहना है कि जब यह सिस्टम नया था, तब इसकी कीमत 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा थी. लेकिन उन्हें यह पूरा सेटअप सिर्फ 3.5 लाख रुपये में मिल गया.
पुराना सर्वर बना AI की ताकत
हालांकि केवल पुराना सर्वर खरीद लेने से AI का काम शुरू नहीं हो सकता था. स्टोरेज सिस्टम केवल डेटा रखने का काम करता है. AI मॉडल चलाने के लिए पावरफुल ग्राफिक्स कार्ड की जरूरत होती है.
राज ने इसके बाद दो कंप्यूटर टावर खरीदे और उनमें दो RTX 3090 ग्राफिक्स कार्ड लगाए. इन दोनों कार्ड में कुल 48GB VRAM है. उनके मुताबिक इससे वह अपने फ्लैट में ही Llama 3.3 70B जैसे बड़े AI मॉडल चला पाते हैं. इसके लिए उन्हें किसी डेटा सेंटर या क्लाउड सर्विस पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
अपना AI, अपनी कमाई
राज का दावा है कि आज वह अमेरिका की 11 सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए AI मॉडल Fine Tune करने का काम करते हैं. पूरा काम बेंगलुरु से उनके अपने सिस्टम पर होता है.
उनके मुताबिक हर महीने बिजली का बिल करीब 5 हजार रुपये आता है. क्योंकि पूरा सेटअप उनका अपना है, इसलिए उन्हें क्लाउड कम्प्यूटिंग का लगातार बढ़ता खर्च नहीं उठाना पड़ता. न कोई रेट लिमिट होती है और न ही हर नए प्रोजेक्ट के साथ बढ़ता हुआ क्लाउड बिल.
राज का दावा है कि वह हर महीने करीब 27 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनका यह भी कहना है कि 3.5 लाख रुपये का शुरुआती निवेश केवल चार दिन में निकल आया.
हालांकि YourStory इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका. लेकिन इंडस्ट्री में यह बात मानी जाती है कि अगर AI मॉडल लंबे समय तक लगातार चलाने हों, तो अपना हार्डवेयर रखना कई मामलों में क्लाउड सर्विस से सस्ता साबित हो सकता है. खासकर तब, जब सिस्टम रोजाना आठ घंटे या उससे ज्यादा समय तक इस्तेमाल हो.
कैसे होती है सरकारी IT Auction
राज की कहानी में सबसे दिलचस्प हिस्सा सरकारी नीलामी है. AI मॉडल चलाने का असली काम ग्राफिक्स कार्ड करते हैं, लेकिन कम कीमत में एंटरप्राइज हार्डवेयर मिल जाना उनके पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी ताकत बना.
भारत सरकार के अधीन कंपनी MSTC Limited समय-समय पर सरकारी विभागों और PSUs के अतिरिक्त और पुराने उपकरणों की E-Auction कराती है. कई बैंक भी अपने पुराने IT उपकरणों की अलग से नीलामी करते हैं.
दिसंबर 2025 में बेंगलुरु कस्टम्स ने भी MSTC Portal के जरिए जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप, iPad और TV की नीलामी की थी.
इन नीलामियों में हिस्सा लेने की प्रक्रिया भी ज्यादा मुश्किल नहीं है. इच्छुक व्यक्ति पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करता है. इसके बाद KYC पूरी करनी होती है. फिर सिक्योरिटी डिपोजिट जमा करके बोली लगाई जाती है. सफल बोलीदाता को सामान मिल जाता है.
ऐसे उपकरण अक्सर कम कीमत पर इसलिए बिक जाते हैं क्योंकि संबंधित विभाग उन्हें जल्दी हटाना चाहता है और नीलामी में बहुत कम लोग हिस्सा लेते हैं.
सबसे बड़ा सबक
राज की कहानी केवल लाखों रुपये कमाने के दावे तक सीमित नहीं है. यह इस बात की भी याद दिलाती है कि भारत में सरकारी गोदामों में बड़ी मात्रा में पुराना एंटरप्राइज हार्डवेयर मौजूद है. सही जानकारी, सही योजना और AI जैसी नई टेक्नोलॉजी के साथ यही हार्डवेयर कई लोगों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है.
हर किसी को राज जैसी सफलता मिले, इसकी कोई गारंटी नहीं है. लेकिन यह जरूर है कि कई बार बड़े मौके वहीं छिपे होते हैं, जहां बहुत कम लोग देखने जाते हैं.
Edited by Ravi Pareek



