पैरों की साइज बनी बिजनेस आइडिया और खड़ा कर दिया फुटवियर ब्रांड House of Avi
बड़े या छोटे पैर वाले लोगों के लिए सही जूते ढूंढ़ना आसान नहीं होता. इसी समस्या को बिजनेस अवसर में बदलते हुए अवि कुमार ने House of Avi की शुरुआत की. पढ़िए कैसे यह बूटस्ट्रैप्ड ब्रांड भारत से लेकर ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोप तक अपनी खास पहचान बना रहा है.
कल्पना कीजिए कि आप बाजार या मॉल में जाएं और घंटों घूमने के बाद भी अपने पैर की साइज के जूते न मिले. यही अनुभव दुनिया भर में लाखों लोग हर बार जूते खरीदते समय करते हैं. ज्यादातर लोग अपनी पसंद, रंग और डिजाइन पर ध्यान देते हैं. लेकिन जिन लोगों के पैरों का साइज सामान्य रेंज से बड़ा या छोटा होता है, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती पसंद नहीं, बल्कि सही फिट का जूता ढूंढ़ना होती है. बाजार में अधिकांश ब्रांड सीमित साइज रेंज पर ही फोकस करते हैं, जिससे लाखों ग्राहकों के पास विकल्प बेहद कम रह जाते हैं.
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले इंडियन ऑन्त्रप्रेन्योर अवि कुमार (Avi Kumar) ने इसी अनदेखी जरूरत को कारोबारी अवसर (business opportunity) के रूप में देखा. उन्होंने House of Avi (HO) की शुरुआत इस उद्देश्य से की कि हर व्यक्ति को उसके पैर के आकार के अनुरूप आरामदायक, टिकाऊ और प्रीमियम फुटवियर मिल सके. आज कंपनी भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोप के ग्राहकों तक पहुंच बना रही है.
यह ऐसे समय की कहानी है, जब भारत का फुटवियर बाजार तेजी से बदल रहा है. IMARC Group के अनुसार, 2025 में भारतीय फुटवियर बाजार का आकार करीब 20.7 अरब डॉलर था और 2033 तक इसके 47 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है. वहीं, Grand View Research के मुताबिक वैश्विक फुटवियर बाजार 2025 में लगभग 476 अरब डॉलर का था और 2033 तक इसके 675 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है.
इस तेजी से बढ़ते बाजार के बीच House of Avi ने बड़े और कम प्रचलित साइज वाले ग्राहकों पर फोकस करके अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है. इसकी स्थापना 2019 में अवि कुमार ने की थी. भारत में कंपनी का हेडक्वार्टर मेरठ (उत्तर प्रदेश) में है जबकि इसकी ग्लोबल हेडक्वार्टर ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन (Brisbane) में है.

अवि कुमार, फाउंडर और CEO — House of Avi
कॉर्पोरेट करियर छोड़ शुरू किया फुटवियर बिजनेस
अवि कुमार का शुरुआती जीवन मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बीता. उन्होंने सिंधिया स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए, जहां से MBA किया. कई वर्षों तक उन्होंने Corporate Strategy & Workplace Management से जुड़े सेक्टर्स में काम किया. इसी दौरान उन्हें बड़ी कंपनियों की कार्यप्रणाली और उपभोक्ता व्यवहार को करीब से समझने का अवसर मिला.
फुटवियर इंडस्ट्री का अध्ययन करते समय उन्होंने महसूस किया कि अधिकांश कंपनियां केवल सबसे ज्यादा बिकने वाले साइज पर ध्यान देती हैं. जिन लोगों के पैरों का आकार सामान्य साइज से अलग होता है, उनके लिए विकल्प बेहद सीमित हैं. यही समस्या आगे चलकर House of Avi की नींव बनी.
इस बारे में YourStory से हुई हालिया बातचीत में अवि कुमार कहते हैं, “मैं फैशन इंडस्ट्री में पहचान बनाने के लिए नहीं आया था. मेरा अनुभव कॉर्पोरेट रणनीति का रहा है. जब मैंने फुटवियर बाजार को करीब से देखा, तो महसूस हुआ कि लाखों ग्राहकों की जरूरतों को लगभग नजरअंदाज किया जा रहा है. मुझे लगा कि अगर इस समस्या का समाधान किया जाए, तो यह सिर्फ बिजनेस नहीं बल्कि एक सार्थक बदलाव भी हो सकता है.”
अवि बताते हैं कि शुरुआत से ही उनका फोकस केवल जूते बेचने पर नहीं, बल्कि डिजाइन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर रहा. उनका मानना है कि तैयार डिजाइन खरीदकर बेचने के बजाय किसी प्रोडक्ट को शुरुआत से विकसित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है. इसी सोच के साथ कंपनी हर फुटवियर का डिजाइन खुद तैयार करती है और अलग-अलग जरूरतों के अनुसार उसे विकसित करती है.
अनदेखी जरूरत से बना बिजनेस
House of Avi की सबसे बड़ी पहचान इसकी एक्सटेंडेड साइज रेंज है. कंपनी US Size 4 से लेकर US Size 20 तक फुटवियर तैयार करती है. यह उन ग्राहकों के लिए खास है, जिन्हें सामान्य बाजार में अपनी जरूरत का साइज मुश्किल से मिलता है.
अवि कुमार के मुताबिक बड़े साइज का जूता बनाना सिर्फ लंबाई बढ़ाने का काम नहीं है. इसके लिए पूरे डिजाइन, वजन के संतुलन, संरचना और मजबूती पर दोबारा काम करना पड़ता है. यही वजह है कि कंपनी इसे अपनी सबसे बड़ी विशेषज्ञता मानती है.
अवि कुमार कहते हैं, “समावेशिता हमारे लिए कोई मार्केटिंग कैंपेन नहीं है, बल्कि प्रोडक्ट फिलॉसफी का हिस्सा है. बड़े साइज का जूता बनाते समय उसकी पूरी इंजीनियरिंग बदल जाती है. जब कोई ग्राहक वर्षों बाद अपनी जरूरत का सही फुटवियर पाता है, तो वही हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है.”
कंपनी का दावा है कि इसी रणनीति के कारण उसे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों का भरोसा मिला. दुनिया की सबसे बड़े महिला पैरों वाली गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर तान्या हर्बर्ट और किन्नर अधिकारों की प्रमुख आवाज लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भी House of Avi का फुटवियर इस्तेमाल कर चुकी हैं. अवि कुमार इसे किसी प्रचार अभियान से ज्यादा ग्राहकों के भरोसे की पहचान मानते हैं.

House of Avi की टीम
बूटस्ट्रैप मॉडल पर खड़ी की कंपनी
House of Avi की शुरुआत पूरी तरह बूटस्ट्रैप मॉडल पर हुई. शुरुआती पूंजी अवि कुमार ने स्वयं लगाई. उनका मानना था कि शुरुआती दौर में बाहरी निवेशकों से फंडिंग लेने से कंपनी पर तेज़ी से विस्तार का दबाव बन सकता है, जिससे प्रोडक्ट की क्वालिटी और मूल उद्देश्य प्रभावित होने का खतरा रहता है.
आज भी कंपनी ने अपने विकास का आधार बाहरी निवेश के बजाय प्रोडक्ट, ग्राहक अनुभव और मुनाफे को बनाया है. कंपनी की बिक्री मुख्य रूप से अपनी ऑनलाइन वेबसाइट और इंटरनेशनल होलसेल नेटवर्क के जरिए होती है. हालांकि कंपनी ने अपने रेवेन्यू के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन उसका दावा है कि भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोप से ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं.
इंडियन फुटवियर इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों में डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स की संख्या तेजी से बढ़ी है. अधिकांश कंपनियां डिजिटल मार्केटिंग और ग्राहक अधिग्रहण पर भारी निवेश कर रही हैं. ऐसे माहौल में House of Avi ने सीमित लेकिन स्पष्ट रणनीति अपनाई—पहले प्रोडक्ट को मजबूत बनाना और फिर ग्राहकों के भरोसे के आधार पर कारोबार बढ़ाना.
अवि कुमार बताते हैं, “शुरुआत से हमारा लक्ष्य केवल वैल्यूएशन बढ़ाना नहीं था. हम ऐसा ब्रांड बनाना चाहते थे, जिस पर ग्राहक लंबे समय तक भरोसा करें. अगर शुरुआती दौर में केवल तेज़ ग्रोथ के दबाव में हम आसान रास्ता चुनते, तो House of Avi का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाता.”
अवि का कहना है कि कंपनी की प्राथमिकता नए ग्राहकों को आकर्षित करने से पहले मौजूदा ग्राहकों का भरोसा जीतना है. उनके मुताबिक, किसी भी प्रीमियम ब्रांड की सबसे बड़ी ताकत दोबारा खरीदारी करने वाले ग्राहक होते हैं, न कि केवल विज्ञापनों के जरिए आने वाली बिक्री.
क्वालिटी और कारीगरी पर खास जोर
अवि कुमार का मानना है कि किसी भी फुटवियर ब्रांड की असली पहचान उसकी फैक्ट्री से शुरू होती है. इसी सोच के साथ कंपनी ने उत्तर प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों के साथ मिलकर अपना मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क विकसित किया है. प्रत्येक जूते की सिलाई, लेदर की क्वालिटी, फिनिशिंग और टिकाऊपन की अलग-अलग स्तर पर जांच की जाती है. यदि कोई प्रोडक्ट तय गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसे बाजार में नहीं उतारा जाता.
बड़े साइज के फुटवियर का निर्माण सामान्य जूतों की तुलना में अधिक जटिल माना जाता है. ऐसे जूतों में वजन का संतुलन, सोल की मजबूती और लंबे समय तक आराम सुनिश्चित करने के लिए अलग डिजाइन और इंजीनियरिंग की जरूरत होती है. यही कारण है कि House of Avi अपने प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को केवल डिजाइन नहीं, बल्कि तकनीकी प्रक्रिया मानता है.
अवि कुमार कहते हैं, “भारत के पास दुनिया के बेहतरीन कारीगर हैं. जरूरत उन्हें सही प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों के साथ जोड़ने की है. हमारे लिए हर जूता सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि उस कारीगर की मेहनत और हमारी प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है.”
उनका मानना है कि आज बाजार में हल्की क्वालिटी वाले और डूप्लीकेट प्रोडक्ट्स की भरमार है. ऐसे माहौल में किसी नए ब्रांड के लिए ग्राहक का भरोसा जीतना आसान नहीं होता. लेकिन अगर प्रोडक्ट की क्वालिटी बरकरार रहे, तो वही भरोसा लंबे समय में सबसे बड़ी पूंजी बन जाता है.
बाजार में बनाई अपनी खास पहचान
भारत का फुटवियर बाजार काफी प्रतिस्पर्धी है. Bata, Relaxo, Campus, Liberty और Metro Brands जैसे स्थापित ब्रांड बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन और मुख्यधारा के उपभोक्ताओं पर फोकस करते हैं. ऐसे बाजार में किसी नए ब्रांड के लिए अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता.
House of Avi ने प्रतिस्पर्धा का रास्ता कीमत या बड़े पैमाने पर प्रोडक्टन के बजाय निश (Niche) सेगमेंट के जरिए चुना. कंपनी का फोकस उन ग्राहकों पर है जिन्हें सामान्य बाजार में अपनी जरूरत के मुताबिक साइज, फिटिंग और प्रीमियम क्वालिटी वाला फुटवियर नहीं मिल पाता.
अवि कुमार का कहना है कि उनकी रणनीति अधिक से अधिक लोगों को जूते बेचने की नहीं, बल्कि ऐसे ग्राहकों के लिए समाधान तैयार करने की है जिनकी जरूरतें लंबे समय तक बाजार की प्राथमिकता नहीं रहीं. उनका मानना है कि यदि कोई ब्रांड किसी वास्तविक समस्या का समाधान करता है, तो ग्राहक केवल प्रोडक्ट नहीं, बल्कि भरोसा भी खरीदता है.
दुनिया भर में फैला कारोबार
House of Avi के मुताबिक, आज ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोप उसके सबसे मजबूत बाजार हैं. इन क्षेत्रों में ऐसे ग्राहकों की संख्या अधिक है, जो प्रीमियम लेदर फुटवियर और एक्सटेंडेड साइज विकल्प तलाशते हैं. वहीं भारत में भी उपभोक्ताओं के बीच आरामदायक फिटिंग, टिकाऊपन और क्वालिटी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, जिससे प्रीमियम फुटवियर सेगमेंट का विस्तार हो रहा है.
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय फुटवियर बाजार में ई-कॉमर्स और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल के बढ़ने से छोटे और विशिष्ट (Niche) ब्रांड्स के लिए नए अवसर बने हैं. पहले जहां सीमित शेल्फ स्पेस के कारण ऐसे प्रोडक्ट बड़े पैमाने पर ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाते थे, वहीं डिजिटल कॉमर्स ने विशेष जरूरतों वाले उपभोक्ताओं तक पहुंच आसान कर दी है.
अवि कुमार का कहना है कि यही बदलाव House of Avi के विस्तार में भी मददगार साबित हुआ. उनके अनुसार, जब किसी ग्राहक को स्थानीय बाजार में अपनी जरूरत का साइज नहीं मिलता, तो वह ऑनलाइन ऐसे ब्रांड की तलाश करता है जो उसकी समस्या का समाधान कर सके.
भविष्य की योजनाएं
कंपनी अब अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करने की तैयारी में है. अवि कुमार के मुताबिक, आने वाले समय में House of Avi नई फुटवियर कैटेगरी पर काम कर रही है. इसके अलावा, कंपनी किन्नर अधिकारों की प्रमुख आवाज लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ मिलकर एक एक्सक्लूसिव कलेक्शन भी तैयार कर रही है.
उनका कहना है कि कंपनी केवल नए डिजाइन लॉन्च करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपनी एक्सटेंडेड साइजिंग विशेषज्ञता को भविष्य में अन्य प्रोडक्ट कैटेगरी तक भी ले जाने की योजना बना रही है.
हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि वैश्विक बाजार में विस्तार के साथ नई चुनौतियां भी सामने आती हैं. सप्लाई चेन, क्वालिटी कंट्रोल, रिटर्न मैनेजमेंट और हर बाजार की अलग उपभोक्ता अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालना किसी भी उभरते ब्रांड के लिए आसान नहीं होता.
अवि कुमार बताते हैं, “हमारा लक्ष्य सिर्फ एक और फुटवियर ब्रांड बनाना नहीं है. मैं चाहता हूं कि अगर किसी व्यक्ति के पैर सामान्य साइज से अलग हैं, तो उसे कभी यह महसूस न हो कि उसके पास विकल्प नहीं हैं. अगर हम लोगों की वास्तविक समस्या का समाधान कर सके, तो वही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी.”
House of Avi की कहानी सिर्फ एक नए फुटवियर ब्रांड की नहीं, बल्कि उस कारोबारी सोच की है जिसमें बाजार की अनदेखी जरूरत को अवसर में बदला गया. ऐसे समय में जब अधिकांश फुटवियर कंपनियां बड़े पैमाने पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, कंपनी ने उन ग्राहकों को अपना केंद्र बनाया है जिन्हें लंबे समय तक बाजार ने सीमित विकल्प दिए.
बेशक, किसी भी नए ब्रांड की दीर्घकालिक सफलता का फैसला बाजार और ग्राहक ही करते हैं. House of Avi भी इससे अलग नहीं है. लेकिन यह कंपनी इस बात का उदाहरण जरूर पेश करती है कि इनोवेशन केवल नई टेक्नोलॉजी डेवलप करने में ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की समस्याओं को पहचानकर उनके व्यावहारिक समाधान तैयार करने में भी छिपा होता है.
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर प्रोड्यूसर है और प्रीमियम फुटवियर की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में यदि House of Avi अपनी क्वालिटी, डिजाइन और एक्सटेंडेड साइजिंग रणनीति को लगातार बनाए रखता है, तो उसके लिए घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी आगे बढ़ने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं.





