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कैसे इस शख्स ने खड़ा किया 158 करोड़ रुपये का पैकेजिंग बिजनेस? Patanjali, Mamaearth, FabIndia को करते हैं सप्लाई

गौरव डागा ने कॉस्मेटिक, फूड और फार्मा कंपनियों के लिए पैकेजिंग मैटेरियल डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में 1997 में AG Poly Packs की शुरुआत की थी. वित्त वर्ष 22 में, उनके बिजनेस ने 158 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया. यहां हम बता रहे हैं कि उन्होंने यह कैसे किया...

Rishabh Mansur

रविकांत पारीक

कैसे इस शख्स ने खड़ा किया 158 करोड़ रुपये का पैकेजिंग बिजनेस? Patanjali, Mamaearth, FabIndia को करते हैं सप्लाई

Tuesday April 11, 2023 , 4 min Read

जब कॉस्मेटिक या फार्मा की बोतलें एक शेल्फ में लाइन से रखीं होती हैं, तो आपकी आंखें पहले उनकी बाहरी पैकेजिंग-डिज़ाइन और यहां तक कि शायद बोतल के आकार को निहारती हैं. संभावना है कि यदि आपने Patanjali,Mamaearth, Fabindia या VLCC का कोई प्रोडक्ट खरीदा है, तो आपने AG Poly Packs का प्रोडक्ट भी खरीदा है.

जब गौरव डागा ने 1997 में बोतलें बनाने के लिए कानून (law) में एक संभावित करियर को पीछे छोड़ दिया, तो उन्होंने एक बड़े बिजनेस की संभावना देखी.

“मेरे चचेरे भाई ने मुझे बताया कि शुरू से कानून में करियर बनाना मुश्किल था. मैं कोई बिजनेस शुरू करने के बारे में सोच रहा था, जब मुझे एहसास हुआ कि नए जमाने के पैकेजिंग सेक्टर में उस समय ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं थी," उन्होंने YourStory को बताया.

पैकेजिंग इंडस्ट्री उस समय मुद्दों से व्याप्त थी, जिसमें कांच की बोतलें इन उद्योगों पर हावी थीं. इन बोतलों के अपने मुद्दे थे, जैसे बार-बार टूटना, एक नए समाधान के लिए जगह तैयार करना जो लागत प्रभावी था और टूटता नहीं था.

यही वो दौर था जब डागा ने AG Poly Packs की शुरुआत की और काम पर लग गए. डागा कहते हैं, “हमने प्लास्टिक और पॉलीमर की बोतलों के डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में शुरुआत की. ये अधिक किफायती, कम भारी और टूटने वाली नहीं थी.”

उनकी मेहनत रंग लाई. आज, यह फार्मा, ब्यूटी और फूड सेक्टर के लिए पैकेजिंग की विविध रेंज को लागू करने वाली भारत की शुरुआती कंपनियों में से एक है, जिसने वित्त वर्ष-22 में 158 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया है.

खुद का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट

AG Poly Pack की शुरुआत के समय, एक और प्रमुख खिलाड़ी था—Pearl Polymers, जो अपनी पर्लपेट रेंज के लिए प्रसिद्ध था और घरेलू जरूरतों के लिए बोतलें बेच रहा था.

डागा बताते हैं, "वे खुदरा बिक्री में थे, संस्थागत नहीं. बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) पैकेजिंग में प्लास्टिक के लिए एक बड़ा अवसर पैदा हुआ, जहां बोतलों का इस्तेमाल कन्फेक्शनरी आइटम, चाय पाउडर और अन्य वस्तुओं की पैकिंग और भंडारण के लिए किया जा सकता था.”

इसलिए, उन्होंने मैन्युफैक्चरर्स से प्रोडक्ट खरीदना और उन्हें फार्मा और फूड सेक्टर में ग्राहकों को बेचना शुरू किया. डागा कहते हैं, ग्राहकों ने भी इस बिजनेस की ओर रुख किया क्योंकि वे अलग-अलग मैन्युफैक्चरर्स को देखे बिना एक ही छत के नीचे चीजों को सुरक्षित करने में सक्षम थे.

हालांकि, उन्होंने पाया कि बड़े पैमाने पर डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार करना एक चुनौती थी.

वे आगे कहते हैं, “शुरुआत में, हमने अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैक्टरी शुरू करने के बारे में सोचा भी नहीं था. हमारा बिजनेस अच्छे से चल रहा था, लेकिन हमारी खुद की मैन्युफैक्चरिंग फैक्टरी नहीं थी. ऐसे में बड़े ऑर्डर मिलना मुश्किल हो गया."

2012 में, फर्म ने गाजियाबाद में अपना पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया, जो आज तक 2,800 टन सालाना की क्षमता तक पहुंच गया है. इसके बाद उन्होंने 2019 में 2,200 टन क्षमता के साथ एक और प्लांट लगाया. डागा कहते हैं कि इन यूनिट्स को शुरू करने में काफी खर्चा आया, खासकर इसलिए क्योंकि ग्राहकों को उम्मीद थी कि मैन्युफैक्चरर के पास पैकेजिंग बोतलों के विभिन्न डिजाइन तैयार करने के लिए सेटअप होंगे.

"यह एक चुनौती और एक अवसर दोनों था. मशीन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत अधिक थी. लेकिन इसका मतलब यह भी था कि इस बिजनेस में अन्य फर्में इतनी तेजी से नहीं थीं कि वे अवसर को हड़प सकें," डागा ने कहा.

आज, AG Poly Packs अपने कारोबार का लगभग 70% सौंदर्य प्रसाधन फर्मों से प्राप्त करता है, जबकि शेष फार्मा और खाद्य ग्राहकों के बीच विभाजित है.

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बाजार में आगे रहना

डागा कहते हैं, "प्लांट ने हमें अपने खुद के साँचे और डिज़ाइन बनाने और ग्राहकों को नए विचार देने में मदद की."

जबकि दूसरी पैकेजिंग कंपनियां और डिस्ट्रीब्यूटर मुख्य रूप से सीमित संख्या में उद्योगों को आपूर्ति करते हैं, या सीमित संख्या में ग्राहक हैं, AG Poly Packs इन प्लांट्स के साथ इन-हाउस होने के साथ प्रतिस्पर्धा से पहले नए प्रोडक्ट्स की पेशकश करने में सक्षम है.

यह अब हिमाचल प्रदेश में एक नया प्लांट लगाने पर काम कर रहा है, क्योंकि यह ई-कॉमर्स और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांडों से ऑफलाइन और ऑनलाइन खुदरा चैनलों के माध्यम से बिक्री करने वाले पैकेजिंग प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग को पूरा करना चाहता है.

भारत में, पैकेजिंग बाजार का अनुमान 2021 में 81 बिलियन डॉलर था. इंडस्ट्री एनालिटिक्स फर्म MaximizeMarketResearch के आंकड़ों के अनुसार, इसके 2027 तक 26% की दर से लगभग 325 बिलियन डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है.

डागा कहते हैं, “वित्त वर्ष 23 में, हम 173 करोड़ रुपये का आंकड़ा छूने की उम्मीद कर रहे हैं. जब मैंने 1997 में AG Poly Packs को शुरू किया था, तो मुझे नहीं लगा था कि यह इतना बड़ा हो सकता है.”

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