Budget 2023: क्या बजट से पूरी होंगी सोशल सेक्टर की अपेक्षाएं? जानिए उनकी मांगें क्या हैं

By Vishal Jaiswal
January 25, 2023, Updated on : Sat Jan 28 2023 12:12:21 GMT+0000
Budget 2023: क्या बजट से पूरी होंगी सोशल सेक्टर की अपेक्षाएं? जानिए उनकी मांगें क्या हैं
आज भी भारत सरकार द्वारा सोशल सेक्टर और एजुकेशन के लिए किया जाने वाला खर्च जीडीपी का लगभग तीन फीसदी ही है. फाइनेंशियल 2023-24 के लिए केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले बजट से पहले हमने हेल्थकेयर, एजुकेशन, ग्रामीण सुधार की दिशा में काम करने वाले एक्सपर्ट्स और एनजीओ से बात की.
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आर्थिक प्रगति के मामले में भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. हालांकि, सोशल सेक्टर अभी भी जीडीपी के अनुपात में रफ्तार नहीं पकड़ पाया है. मानव विकास सूचकांक के मामले में 189 देशों में भारत का स्थान 131 है. भारत हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे सेक्टर्स में सबसे नीचे वाले देशों में देशों में आता है.


आज भी भारत सरकार द्वारा सोशल सेक्टर और एजुकेशन के लिए किया जाने वाला खर्च जीडीपी का लगभग तीन फीसदी ही है.

फाइनेंशियल 2023-24 के लिए केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले बजट से पहले हमने हेल्थकेयर, एजुकेशन, ग्रामीण सुधार की दिशा में काम करने वाले एक्सपर्ट्स और एनजीओ से बात की.


पर्यावरण की दिशा में काम करने वाली संस्थाएं पर्यावरण को तो बेहतर बनाना ही चाहती हैं लेकिन इस दौरान वे यह भी चाहती हैं कि छोटे कारोबारियों को इससे नुकसान न पहुंचे और सरकार इस दिशा में भी कदम उठाए.  


इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (IPCA) के फाउंडर आशीष जैन ने कहा, ‘हाल ही में, 1 जुलाई, 2022 से केंद्र सरकार ने 19 एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाया है, जिसकी वजह से काफी सारी लघु एवं मध्यम इकाइयां बंद हो गई है या बंद होने की कगार पर है. हमें उम्मीद है की आने वाले बजट में इन लघु एवं मध्यम इकाइयों की मदद का विशेष प्रावधान होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सम्बंधित मदद इन इकाईयो को प्रदान की जाएगी.‘


उन्होंने आगे कहा, ‘इसके साथ ही, हमारा सुझाव है की इन प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के विकल्पों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल जोन हर राज्य में बनाये जाएं, इससे विकल्पों के उत्पादन में वृद्धि होगी और लघु-मध्यम इकाइयों को भी मदद मिलेगी. बजट में पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) जैसे मुद्दों के लिए विशेष बजट निर्धारित किया जाए.‘


इसी तरह, एजुकेशन और हेल्थकेयर सेक्टर में काम करने वाली संस्थाएं इन दोनों ही क्षेत्रों में भारत की दयनीय स्थिति को देखते हुए इन पर खर्च बढ़ाने और इनमें टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस को शामिल करने की भी मांग कर रही हैं.


वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण और आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में कार्य करने वाले गैर-लाभकारी संगठन लोटस पेटल फाउंडेशन (Lotus Petal Foundation) के फाउंडर कुशल चक्रवर्ती ने कहा, ‘निपुण भारत के क्रियान्वयन के लिए सक्रिय सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से रिमोट टीचिंग मॉडल का प्रयोग करते हुए एडटेक को अपनाना गेम चेंजर साबित हो सकता है. इस क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाना स्वागतयोग्य कदम होगा.’


उन्होंने आगे कहा, ‘नई शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के तहत शैक्षणिक व्यवस्था में सर्वोच्च प्राथमिकता सभी में आधारभूत साक्षरता और 2025 तक प्राथमिक स्कूल स्तर के छात्रों में अंकज्ञान सुनिश्चित करना है. ASER की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में क्लास-3 और क्लास-5 के छात्रों में पढ़ने एवं गणना करने की क्षमता में गिरावट आई है. आधारभूत स्तर की पढ़ाई की इस जरूरत (पढ़ना, लिखना और आवश्यक गणना करने में सक्षम होना) के लक्ष्य को पाने के लिए निपुण भारत योजना का आवंटन बढ़ाने की आवश्यकता होगी.‘


चक्रवर्ती ने आगे कहा, ‘साथ ही, विस्तृत भौगोलिक संरचना, अध्यापकों की कमी और अध्यापकों के लिए प्रशिक्षण की जरूरत को देखते हुए कम लागत में व समयबद्ध तरीके से इसका क्रियान्वयन बड़ी चुनौती है. एडटेक के तहत इनोवेटिव लाइव डिजिटल अध्यापन को अपनाकर इस चुनौती से निपटा जा सकता है. महामारी के दौरान लोटस पेटल फाउंडेशन समेत विभिन्न संगठनों ने रिमोट अध्यापन के माध्यम से बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने के तरीके विकसित किए थे. अब स्मार्टफोन और डिजिटल डिवाइस की उपलब्धता बढ़ी है. ऐसे में इन टीचिंग मॉडल का प्रयोग निपुण भारत योजना के क्रियान्वयन में किया जा सकता है. विशेषरूप से वंचित वर्ग में डिजिटल भेदभाव को कम करने के लिए फंड आवंटन बढ़ाए जाने की उम्मीद है.‘


सांझी सिखिया (Sanjhi Sikhiya) फाउंडेशन की रिसर्च एंड डिजाइन लीड ममता बिष्ट ने कहा, ‘आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए, भारत सरकार इस वर्ष 76वां वित्तीय बजट पेश करेगी. राष्ट्र की प्राथमिक आवश्यकताओं में से एक होने पर भी, शिक्षा बजट पिछले कुछ सालों से केवल 3 फीसदी के आसपास ही रहा है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कहा गया है कि बजट का कम से कम 6 फीसदी शिक्षा के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए. हालांकि यह समझ में आता है कि बजट एक वर्ष के अंतराल में दोगुना नहीं होगा, लेकिन इस ओर कुछ पॉज़िटिव प्रयास जरूर किए जा सकते हैं, ताकि एक राष्ट्र के तौर पर हमारी शिक्षा की बुनियाद और मजबूत हो सके.‘


ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं की मांग है कि वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार विशेष ध्यान देने की जरूरत है. वहां, खेती और पशुपालन जैसे उद्योगों को विशेष सहायता देकर दोबारा खड़ा करने की भी जरूरत है.


गैर-सरकारी संस्था (NGO) प्रोफेशनल असिस्टेंट फॉर डेवलपमेंट एक्शन (PRADAN) के इंटीग्रेटर नरेंद्रनाथ दामोदरन कहते हैं, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत ही धीमी स्पीड से रिकवरी कर रही है. आज के वक्त में सबसे जरूरी है ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की. ध्यान रखना होगा कि जैसी स्थिति कोरोना के वक्त हुई थी, वैसे हालात दोबारा ना पैदा हों. ऐसे में जरूरत है ग्रामीण इलाकों के लिए अधिक बजट देकर उसे बेहतर बनाने की, खासकर एग्रीकल्चर को. खेती और पशुपालन को इंसेंटिव देने की जरूरत है, ताकि ग्रामीण लोगों की आय बढ़ाई जा सके. एमएसएमई सेक्टर पर भी ध्यान देने की जरूरत है, खासकर उन पर जो फूड प्रोसेसिंग के बिजनेस में हैं. उन्हें इंसेंटिव देने की जरूरत है, ताकि बड़ी मात्रा में रोजगार पैदा हो सके.’


उन्होंने आगे कहा, ‘वोकल फॉर लोकल के तहत सरकार को जरूरत है कि वह लोकल प्रोडक्शन और मार्केटिंग क्लस्टर बनाने के लिए निवेश करे. ग्रामीण क्षेत्र को दो तरह के निवेश की जरूरत है. पहला वो जिससे पैसे कमाने के मौके पैदा हो सकें और दूसरा वो जिससे मौजूदा हालात में सुधार लाया जा सके. बजट में इन सभी को ध्यान में रखने की जरूरत है.’


सागर विश्नोई, जोकि एक राजनीतिक विश्लेषक हैं, बताते हैं, "केंद्रीय बजट 2023 में कुछ जरूरी सुधारों को लागू करना चाहिए. इस बजट में हमारी आयात पॉलिसी के सेक्शन 18 में सुधार की जरूरत है, जो हाल ही में टेक्निकली एडवांस्ड प्रोडक्ट के आयात के दौरान विवाद की वजह बनी थी. हम उम्मीद करते हैं कि बजट में बैंक गारंटी की जगह बॉन्ड जमा करने का प्रावधान किया जाएगा, जिससे सामान के क्लीयरेंस में आसानी हो जाएगी. सरकार का यह कदम न सिर्फ व्यापार को सुविधाजनक बनाएगा, बल्कि गुड्स आयातक पर कम वित्तीय बोझ डालेगा."


वे आगे कहते हैं, "मौजूदा दौर टेक्नोलॉजी का है. टेक्नोलॉजी ने हर सेक्टर में बड़े बदलाव किए हैं. ऐसे में भारत के पास शानदार मौका है कि वो कारोबार में एडवांस्ड AI, इंटरनेट डिजिटल टेक की मदद से अपने ऑर्डर के स्केल को बढ़ा सकता है. साथ ही कारोबार में बढ़ोतरी कर सकता है. इस शानदार मौके का फायदा उठाने के लिए आगामी बजट में सरकार को रिसर्च और डेवलपमेंट और प्रोडक्ट इनोवेशन के मामले में निवेश करना जरूरी होगा, जिससे देश को बेहतर बनाने में टेक्नोलॉजी की मदद मिल सकेगी. इसमें 5G सर्विस, स्टेट ऑफ द आर्ट इन्क्यूबेशन सेंटर्स और भारत की स्किल्ड ह्यूमन पूंजी जैसी सर्विसेस भारत के टेक्निकल डेवलपमेंट में मदद कर सकती हैं. इस तरह के निवेश से भारत में आइडिया और बिजनेस को फर्म और ग्लोबल कारपोरेशन में बदला जा सकता है. हमें एक कदम आगे बढ़कर इंडस्ट्री और अकैडिमिक के बीच सहयोग स्थापित करना चाहिए, जिससे भारत को टेक्नोलॉजी इनोवेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सर्विस का हब बनाया जा सके. इस बार का आगामी बजट भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और फ्यूचर सक्सेस की राह आसान बना सकता है."