Budget 2024: गरीब का कल्याण, देश का कल्याण, बीते 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए- वित्त मंत्री

इस बजट को पेश करने के साथ ही निर्मला सीतारमण देश की ऐसी दूसरी वित्त मंत्री बन चुकी हैं, जिन्होंने लगातार पांच पूर्ण बजट और एक अंतरिम बजट पेश किया.

Budget 2024: गरीब का कल्याण, देश का कल्याण, बीते 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए- वित्त मंत्री

Thursday February 01, 2024,

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) आज, 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश कर रही हैं. नरेंद्र मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में यह दूसरा अंतरिम बजट है. पिछली बार की भांति इस बार भी बजट पेपरलेस यानी डिजिटल रूप में ही पेश किया जा रहा है.

वित्त मंत्री ने संसद भवन में बजट भाषण पढ़ते हुए कहा, "पिछले 10 साल में भारत की अर्थव्यवस्था ने बेहतर प्रदर्शन किया. सरकार सबका साथ सबका विकास के मंत्र पर काम कर रही है. देश को नई दिशा और उम्मीदें मिलीं. सबके लिए मकान, सबके लिए जल और हर घर बिजली पर जोर रहेगा. 2014 में, देश भारी चुनौतियों का सामना कर रहा था, सरकार ने उन चुनौतियों पर काबू पाया और संरचनात्मक सुधार किए, जन हितैषी सुधार किए गए. 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई. किसानों के लिए MSP बढ़ाई गई. हमारी सरकार देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में काम कर रही है."

वित्त मंत्री ने कहा, "हमारे युवा देश में उच्च आकांक्षाएं हैं, अपने वर्तमान पर गर्व है और उज्ज्वल भविष्य के लिए आशा और विश्वास है. हम उम्मीद करते हैं कि हमारी सरकार को उसके शानदार काम के आधार पर लोग फिर से शानदार जनादेश देंगे."

निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सरकार का फोकस गरीब, महिलाओं, युवा और अन्नदाताओं को और सक्षम बनाने पर है. सरकार ने बीते 10 साल में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता हासिल की है. चार करोड़ किसानों का फसल बीमा योजना का लाभ मिला है. DBT के जरिए लोगों को 34 लाख करोड़ रुपए दिए गए. 11.8 करोड़ किसानों को पीएम किसान सम्मान योजना का लाभ मिला.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पीएम जनमन योजना उन आदिवासी समूहों की मदद करती है जो विकास के दायरे से बाहर रह गए हैं. स्किल इंडिया मिशन के तहत 1.4 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग दी गई. पीएम विश्वकर्मा योजना से बड़ी आबादी को फायदा पहुंचा है. और ये आगे भी ऐसे ही जारी रहेगा. सरकार ने बीते कुछ सालों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सात आईआईटी, 17 ट्रिपल और 3000 नए आईटीआई खोले हैं. इससे युवाओं को और बेहतर शिक्षा मिलेगी. बड़ी संख्या में संस्थागत उच्च शिक्षा, अर्थात् 7 आईआईटी, 16 आईआईआईटी, 7 आईआईएम , 15 एम्स और 390 विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं.

वित्त मंत्री ने कहा, "PM MUDRA योजना के तहत 43 करोड़ लोन दिए गए, PM MUDRA योजना के तहत 22.5 लाख करोड़ रुपए के लोन बांटे गए. 10 साल में उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी 28 फीसदी बढ़ी. PM आवास के तहत ग्रामीण इलाकों में 70 फीसदी मकान महिलाओं को दिए गए."

निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरा नारी शक्ति और मजबूत बनाने के लिए खास तौर पर काम किया है. वित्तमंत्री ने कहा आज हमारे देश की अर्थव्यवस्था विश्व की कुछ चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं में से है जो लगातार आगे की तरफ बढ़ रही है. सभी इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स समय से पूरे किए जा रहे हैं. टैक्स रिफॉर्म्स से टैक्स का दायरा बढ़ा. एशियाई खेलों में भारत के युवाओं को कामयाबी मिली है. तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित किया है. महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के लिए कानून लेकर आए हैं.

‘नारी शक्ति’ पर वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि 10 सालों में उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 28% बढ़ा है, STEM पाठ्यक्रमों में लड़कियों और महिलाओं का नामांकन 43% है, जो दुनिया में सबसे अधिक में से एक है. ये सभी कदम परिलक्षित होते हैं.

बता दें कि इस बजट को पेश करने के साथ ही निर्मला सीतारमण देश की ऐसी दूसरी वित्त मंत्री बन चुकी हैं, जिन्होंने लगातार पांच पूर्ण बजट और एक अंतरिम बजट पेश किया. यह उपलब्धि अब तक केवल पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम है.

वित्त मंत्री सीतारमण ने एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करने के साथ, मनमोहन सिंह, अरुण जेटली, पी चिदंबरम और यशवंत सिन्हा जैसे पूर्व वित्त मंत्रियों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया. मोदी सरकार ने 2019 के आम चुनावों के बाद सीतारमण को वित्त विभाग की जिम्मेदारी सौंपी. वह इंदिरा गांधी के बाद बजट पेश करने वाली दूसरी महिला बनीं.

इस साल अंतरिम बजट कई मायनों में अहम है. दरअसल, इस साल लोकसभा चुनाव होने हैं. इसलिए यह पूर्ण बजट नहीं है. आम चुनावों के बाद नई सरकार वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पूर्ण बजट लेकर आएगी. आम तौर पर, अंतरिम बजट में प्रमुख नीतिगत घोषणाएं नहीं होती हैं, लेकिन सरकार पर ऐसे कदम उठाने से कोई नहीं रोक नहीं है जो अर्थव्यवस्था के सामने आने वाले मुद्दों से निपटने के लिए जरूरी हैं.