ब्रांड को सफल बनाने का हुनर जानते हैं दो दोस्त

    Airwoot नाम से इनकी कंपनी करती है कामब्रांड के लिए सोशल मीडिया से मदददिल्ली से संचालित होता है कारोबार

    8th Jul 2015
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    ये कहानी है उन दो लोगों की है, जो मिलते हैं अंजान देश में, पढ़ाई करते हैं एक साथ लेकिन कुछ वक्त बाद जाते हैं बिछुड और जब वो दोबारा मिलते हैं तो शुरू करते हैं अपना कारोबार। ये दो लोग हैं सौरभ अरोड़ा और प्रभात सारस्वत जिन्होने मिलकर Airwoot की स्थापना की। साल 2008 में डेनमार्क के तकनीकी विश्वविद्यालय में इनकी मुलाकात होती है जब ये दोनों यहां पर मास्टर्स और पीएचडी करने के लिए पहुंचते हैं। दोनों दोस्त बन जाते हैं और जब उनमें बातचीत होती है तो पता चलता है कि उनके शौक भी एक दूसरे से मेल खाते हैं। जैसे आर्ट, म्यूजिक और इनसे बड़ी चीज उनके अपने विचार, जिसकी ताकत से किसी को भी प्रभावित किया जा सकता है।

    प्रभात और सौरभ

    प्रभात और सौरभ


    कोर्स पूरा करने के बाद प्रभात डेनामार्क में अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने में जुट जाते हैं वहीं सौरभ डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए बर्लिन में हैसो-प्लैटनर संस्थान चले जाते हैं। इस दौरान वो कभी कभार ही एक दूसरे से बातचीत करते, लेकिन उन दोनों की जिंदगी में एक खास मोड़ तब आया जब इन लोगों को किन्ही कारणों से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ भारत लौटना पड़ा। जिसके बाद साल 2011 में सौरभ डिजिटल मीडिया कंपनी 'प्लूइड' में काम करने लगे, जबकि प्रभात अपना बैग पैक कर भारत घुमने के लिए निकल गये। थोड़े वक्त बाद इन दोनों ने मिलकर मेमेटिक लैब्स की स्थापना की जहां पर ये अपने विचारों को जमीनी हकीकत में उतार सकें। ये दोनों चाहते थे कि कोई ऐसा ऐप जो किसी भी संगीत को सुने और उसे गिटार और तबले की थाप में बदल दे। इसके अलावा एक ऐसा सामाजिक ऐप जो ट्विटर की मदद से ये पता लगाये कि कौन क्या पढ़ रहा है।

    सौरभ

    सौरभ


    इन दोनों ने एल्गोरिदम तरीके से खास तरीके की खोजबीन शुरू की और ट्विटर के जरिये ये पता लगाया कि खरीदारी को लेकर उपभोक्ता क्या सोचता है? उन्होने ये अनुमान लगाने की कोशिश की कि उपभोक्ता अपना अगला खर्च किस चीज पर करने वाला है। डाटा देखने के बाद इन लोगों को महसूस हुआ कि उपभोक्ताओं को किसी भी उत्पाद को अपनाने से ज्यादा उसको लेकर शिकायत ज्यादा होती है। जिसके बाद इन लोगों ने ट्विटर के जरिये 35 खास इंटनेशनल ब्रांड पर नजर रखनी शुरू कर दी। जिसका परिणाम ये हुआ कि barometer.airwoot.com अस्तित्व में आया।

    प्रभात

    प्रभात


    इन लोगों के मुताबिक barometer एक इंफोग्राफिक है जो बताता है कि कोई ब्रांड ग्राहकों के बीच कितना सटीक बैठता है। barometer ग्राहक और उत्पादक के बीच ट्विटर पर होने वाली बातचीत के आधार पर अपना परिणाम निकालता है। कंपनी के सह-संस्थापक सौरभ के मुताबिक इसने Airwoot के लांच करने के लिए बढ़िया प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया। जो एक सामाजिक ग्राहक सहायता हेल्पडेस्क है। Airwoot का कारोबार दिल्ली से संचालित होता है। ये विभिन्न ब्रांड के लिए काम करता है ऐसे ब्रांड जो जानना चाहते हैं कि सोशल मीडिया में उनके बारे में लोगों के क्या विचार हैं, वो उनके सामने आएं। सोशल मीडिया एक ऐसी जगह है जहां पर विभिन्न ब्रांड की एक ओर तारीफ होती है तो वहीं किसी को शिकायत भी होती है। जिनको मानवीय तरीके से नहीं समझा जा सकता। यही काम Airwoot का है जो ब्रांड को ना सिर्फ लोगों की राय बताने का काम करता है बल्कि प्राथमिकता के आधार पर तय समय में उचित कदम उठाये जा सकें। फिलहाल Airwoot विभिन्न ब्रांड के लिए काम कर रहा है।

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    उद्यमशीलता की दुनिया में निवेश ढूंढना सबसे बड़ी चुनौतियों में एक होती है। कंपनी के सह-संस्थापक सौरभ के मुताबिक छोटे से बजट में काफी कुछ हासिल करना मुश्किल काम है इसलिए ये लोग निवेश की तलाश में लगे हैं। इसके लिए इन लोगों ने जल्दी में एक रास्ता निकाला और चंडीगढ़ की The Morpheus से 5 लाख रुपये की मदद हासिल की। The Morpheus को समीर और नंदनी मिलकर चलाते हैं और उनके पोर्टफोलियों में 70 से ज्यादा कंपनियां हैं। नंदनी के मुताबिक इन लोगों के काम के प्रति जुनून और पागलपन से ये लोग खासे प्रभावित हुए। नंदनी को विश्वास है कि इनके उत्पाद से ब्रांड को लेकर आम राय बनाने में मदद मिल सकती है जिससे इनकी आय का इजाफा हो सकता है। इस पैसे का इस्तेमाल ये लोग अपने उत्पाद के विकास पर खर्च करने जा रहे हैं। फिलहाल इनका विचार अपनी टीम को बढ़ाने का है क्योंकि अब तक टीम के नाम पर सिर्फ सौरभ और प्रभात के अलावा एक डेवलवर काम कर रहा है।

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