क्या बिना लक्षणों के हो सकती है फूड सेंसिटिविटी? जानिए नई स्टडी में क्या पता चला

By yourstory हिन्दी
December 11, 2022, Updated on : Sun Dec 11 2022 02:59:00 GMT+0000
क्या बिना लक्षणों के हो सकती है फूड सेंसिटिविटी? जानिए नई स्टडी में क्या पता चला
खाद्य एलर्जी, या भोजन की अतिसंवेदनशीलता, भोजन में आम तौर पर हानिरहित प्रोटीन के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली की अत्यधिक प्रतिक्रिया का परिणाम है. हल्की प्रतिक्रिया होने पर खुजली, लाली और सूजन और अधिक प्रतिक्रिया होने पर उल्टी, दस्त, सांस लेने में कठिनाई और जीवन को संकट में डालने वाले लक्षणों हो सकते है
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फूड एलर्जी की व्यापकता दुनियाभर में बढ़ रही है, कुछ क्षेत्रों में यह महामारी के स्तर तक पहुंच रही है. अकेले अमेरिका में, लगभग 10 प्रतिशत बच्चे और वयस्क फूड एलर्जी से पीड़ित हैं, जिनमें गाय के दूध, अंडे, मूंगफली और ट्री नट्स से एलर्जी सबसे आम है. कुछ रोगियों में हल्के लक्षण होते हैं जिन्हें चिकित्सकीय ध्यान देने की आवश्यकता नहीं होती है, इन मामलों के बारे में किसी को सूचित नहीं किया जाता है.


फूड एलर्जी, या भोजन की अतिसंवेदनशीलता, भोजन में आम तौर पर हानिरहित प्रोटीन के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली की अत्यधिक प्रतिक्रिया का परिणाम है. वे कुछ लक्षणों के रूप में प्रकट हो सकते हैं, हल्की प्रतिक्रिया होने पर खुजली, लाली और सूजन और अधिक प्रतिक्रिया होने पर उल्टी, दस्त, सांस लेने में कठिनाई और जीवन को संकट में डालने वाले लक्षणों हो सकते हैं.


खाद्य अलर्जी के बारे में खुद ही बताने के अलावा, इस तरह रोगियों के मुंह या त्वचा के माध्यम से आपत्तिजनक प्रोटीन, या एलर्जी की मात्रा का पता लगाने और उनकी तत्काल प्रतिक्रियाओं को देखकर फूड एलर्जी का निदान किया जा सकता है.


वैसे सामान्यतः, डॉक्टर इम्यूनोग्लोबुलिन ई, या आईजीई के स्तर को मापने के लिए रक्त परीक्षण करते हैं. यह एक विशेष एंटीबॉडी होता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली एलर्जी की पहचान करने और प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने के लिए उपयोग करती है. हालांकि स्वस्थ व्यक्तियों के रक्त में आईजीई का स्तर कम हो सकता है, फूड एलर्जी वाले रोगियों में इसका स्तर बहुत अधिक होता है जिससे गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया होने का खतरा बढ़ जाता है.


लेकिन कुछ लोग जो आईजीई में मध्यम वृद्धि के साथ त्वचा पर किए जाने वाले एलर्जी परीक्षणों में सकारात्मक पाए जाते हैं, जब वे ऐसे पदार्थ खाते हैं, जिनसे उन्हें एलर्जी होती है तो एलर्जी से संबंधित लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं.


इस स्थिति को कभी-कभी बिना लक्षण वाला संवेदीकरण कहा जाता है. कई मामलों में, इस स्थिति वाले लोगों को पता भी नहीं होता है कि उन्हें भोजन की अतिसंवेदनशीलता है.


क्या वे वास्तव में लक्षणहीन हैं, या क्या उनके शरीर के भीतर ऐसे प्रभाव हैं जिनके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है? मैं एक न्यूरोसाइंटिस्ट हूं जो अध्ययन कर रहा है कि फूड एलर्जी से मस्तिष्क कैसे प्रभावित होता है. मुझे इस विषय में दिलचस्पी तब हुई जब मैंने पाया कि मेरे परिवार के कुछ सदस्य गाय के दूध के प्रति अतिसंवेदनशील थे.


कुछ पूरी तरह से डेयरी उत्पादों से बचते हैं क्योंकि उन्हें गंभीर, जीवन को खतरे में डाल देने वाले लक्षणों का अनुभव होता है. जिन लोगों को विशिष्ट एलर्जी प्रतिक्रियाएं नहीं होती हैं, वे कभी-कभी डेयरी उत्पाद खाते हैं, लेकिन एक या दो दिन बाद उन्हें लगता है कि उनके शरीर में कुछ बीमारियों का विकास हो रहा है.


मैंने और अन्य शोधकर्ताओं ने जो पाया है वह यह है कि फूड एलर्जी आपके मस्तिष्क और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है यदि आप अतिसंवेदनशील हैं, भले ही आपको विशिष्ट फूड एलर्जी के लक्षण न हों.

व्यवहार संबंधी विकार से जुड़ी फूड एलर्जी

शोधकर्ताओं ने दशकों से व्यवहार संबंधी विकारों के संभावित कारण के रूप में खाद्य अतिसंवेदनशीलता पर संदेह किया है.1949 के एक मामले की रिपोर्ट में दूध और अंडे जैसे कुछ खाद्य पदार्थ खाने के बाद रोगियों में व्यवहार और मनोदशा में गड़बड़ी का वर्णन किया गया है.

संदिग्ध खाद्य पदार्थों को अपने आहार से हटाने के बाद उनके लक्षणों में सुधार हुआ, यह सुझाव देते हुए कि एक खाद्य अतिसंवेदनशीलता ही रोग का कारण थी.


लोगों में हाल के कई अध्ययनों ने अवसाद, चिंता, अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर और ऑटिज्म सहित फूड एलर्जी और विभिन्न न्यूरोसाइकिएट्रिक विकारों के बीच संबंध का समर्थन किया है. वे इस संभावना को मजबूत करते हैं कि फूड एलर्जी की कुछ प्रतिक्रियाओं में तंत्रिका तंत्र शामिल हो सकता है और व्यवहार संबंधी विकारों के रूप में प्रकट हो सकता है.


हालांकि, अध्ययनों में विसंगतियों के कारण खाद्य अतिसंवेदनशीलता के कारण न्यूरोसाइकिएट्रिक विकार का विचार अभी भी विवादास्पद है. अध्ययन प्रतिभागियों के बीच एलर्जी के प्रकार, जातीय पृष्ठभूमि, आहार संबंधी आदतों और अन्य कारकों में अंतर परस्पर विरोधी परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं.


इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ अध्ययनों में खुद बताने वाले फूड एलर्जी से प्रभावित लोग शामिल थे, जबकि अन्य में केवल लैब-पुष्ट फूड एलर्जी वाले लोग शामिल थे. यह जांच केवल लक्षण वाले व्यक्तियों तक सीमित है.

खाद्य अतिसंवेदनशीलता, मस्तिष्क और व्यवहार

मेरी प्रयोगशाला ने परीक्षण किया कि क्या फूड एलर्जी व्यवहार संबंधी लक्षणों के रूप में प्रकट हो सकती है, विशेष रूप से बिना लक्षण वाले संवेदनशील व्यक्तियों में. हम यह पता लगाना चाहते थे कि क्या अन्य स्पष्ट गंभीर प्रतिक्रियाओं के अभाव में भी आपत्तिजनक खाद्य पदार्थ खाने से संवेदीकरण के बाद मस्तिष्क की सूजन और व्यवहार में परिवर्तन हो सकता है.


मानव अध्ययनों में पाए गए व्यक्तिगत अंतरों को कम करने के लिए, हमने चूहों के साथ काम करने का निर्णय लिया. हमने एक ही उम्र और आनुवंशिक पृष्ठभूमि के चूहों को सामान्य दूध एलर्जेन ß-लैक्टोग्लोबुलिन या बीएलजी के प्रति संवेदनशील बनाया और उन्हें एक ही कमरे में एक ही आहार खिलाया.


हमने पाया कि बीएलजी-संवेदी चूहों ने आईजीई के काफी ऊंचे स्तर का उत्पादन किया, लेकिन उन्होंने तत्काल एलर्जी प्रतिक्रिया नहीं दिखाई. आईजीई के ऊंचे स्तर को बनाए रखने के बावजूद, वे बिना किसी स्पष्ट लक्षण दिखाए दो सप्ताह तक दूध एलर्जी युक्त भोजन भी खा सकते थे. इससे संकेत मिलता है कि वे बिना लक्षण वाले रूप से संवेदनशील थे.


हमने तब देखा कि क्या उन्होंने भावनात्मक रूप से संचालित व्यवहार में कोई बदलाव दिखाया है. क्योंकि हम चूहों से नहीं पूछ सकते थे कि उन्हें कैसा लगा, हमने उनके सामान्य, उत्तरजीविता-उन्मुख व्यवहार से परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए उनकी ‘‘भावनाओं’’ का पता लगाया.


संभावित खतरे से बचते हुए चूहे सहज रूप से भोजन और आश्रय की तलाश के लिए अपने वातावरण का पता लगाते हैं. हालांकि, ‘‘चिंतित’’ चूहे सुरक्षित रहते हुए छिपने में अधिक समय व्यतीत करते हैं. हमने ‘‘उदास’’ चूहों को पूंछ से पकड़कर उनकी पहचान की. अधिकांश चूहे असहज स्थिति से बाहर निकलने के लिए लड़ते रहे, जबकि उदास चूहे जल्दी हार मान लेते हैं.


हमारे प्रयोगों को उन स्थितियों का अनुकरण करने के लिए डिज़ाइन किया गया था जहां लक्षणों के बिना संवेदनशील व्यक्ति एक दिन में या तो बड़ी मात्रा में एलर्जीयुक्त भोजन खाएंगे या कुछ हफ्तों के लिए हर दिन छोटी मात्रा में. हमने फीडिंग ट्यूब के साथ संवेदनशील चूहों के पेट में सीधे दूध एलर्जन की एक बड़ी मात्रा डालकर, या उन्हें एक बार में थोड़ा-थोड़ा करके एलर्जेन युक्त माउस चाउ देकर इन स्थितियों की नकल की.


दिलचस्प बात यह है कि बड़ी मात्रा में एलर्जेन प्राप्त करने के एक दिन बाद बीएलजी-संवेदी चूहों ने चिंता जैसा व्यवहार दिखाया. संवेदनशील चूहों के एक अन्य समूह ने दो सप्ताह तक थोड़ी मात्रा में एलर्जेन खाने के बाद अवसाद जैसा व्यवहार विकसित किया.


इसके अलावा, बीएलजी-संवेदी चूहों ने मस्तिष्क की सूजन और न्यूरोनल क्षति के लक्षण दिखाए, यह सुझाव दिया कि मस्तिष्क में परिवर्तन उनके व्यवहार संबंधी लक्षणों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. हमने एक महीने के लिए एलर्जेन युक्त आहार पर बीएलजी-संवेदी चूहों को रखकर एलर्जेन की खपत के दीर्घकालिक प्रभाव की भी जांच की.


हमने पाया कि महीने के अंत तक संवेदनशील चूहों में आईजीई के स्तर में गिरावट आई है, यह दर्शाता है कि एलर्जेन की थोड़ी मात्रा लगातार खाने से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कम हो जाती है. इसके विपरीत, मस्तिष्क की सूजन के लक्षण बने रहे, जिससे पता चलता है कि एलर्जी का हानिकारक प्रभाव मस्तिष्क में बना रहता है.

पुरानी मस्तिष्क सूजन

शोधकर्ताओं ने अभी तक उन लोगों में लंबे समय तक मस्तिष्क की सूजन, या न्यूरोइन्फ्लेमेशन का अध्ययन नहीं किया है, जो बिना लक्षण के संवेदनशील हैं. सामान्य तौर पर, हालांकि, तंत्रिका तंत्र में लंबे समय की सूजन न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में एक ज्ञात योगदानकर्ता है, जैसे कि मल्टीपल स्केलेरोसिस और अल्जाइमर रोग, हालांकि इन बीमारियों के सटीक कारण अज्ञात हैं.


न्यूरो प्रदाह में एलर्जेंस की भूमिका की बेहतर समझ से शोधकर्ताओं को यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि क्या फूड एलर्जी पुरानी सूजन को ट्रिगर करती है जो इन बीमारियों को जन्म दे सकती है. यह देखते हुए कि आपका मस्तिष्क आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन के प्रति प्रतिक्रिया करता है, ‘‘जैसा होगा अन्न, वैसा होगा मन’’ वाक्यांश को एक नया अर्थ देता है.


Edited by Vishal Jaiswal