हॉस्टल के कमरे से शुरू हुआ आइडिया, आज हजारों किसानों की जिंदगी बदल रहा है Animall
Animall एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म बना जहां किसान अपने पशुओं की जानकारी अपलोड कर सकते हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों के खरीदार उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं. इससे बिचौलियों की भूमिका कम होने लगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने का रास्ता खुला.
भारत की असली ताकत उसके गांवों में बसती है. गांवों की अर्थव्यवस्था में खेती के साथ पशुपालन की भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है. करोड़ों किसान गाय और भैंसों के सहारे अपने परिवार का खर्च चलाते हैं. लेकिन वर्षों तक पशुओं की खरीद और बिक्री का बाजार पूरी तरह बिखरा हुआ रहा. सही कीमत की जानकारी नहीं होती थी. बिचौलियों का दबदबा था. कई बार किसानों को अपने पशु की उचित कीमत भी नहीं मिल पाती थी.
इसी समस्या को दो छात्राओं ने अवसर में बदल दिया. IIT दिल्ली की छात्राओं नीतू यादव और कीर्ति जांगड़ा ने एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया, जिसने पशु व्यापार की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी. जिस काम को कभी लोग असंभव मानते थे, उसे इन दोनों ने मोबाइल ऐप के जरिए संभव बना दिया. आज Animall हजारों किसानों के लिए भरोसे का नाम बन चुका है.
नीतू यादव का बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता था. उन्होंने करीब से देखा था कि पशुपालन किसानों की आय का बड़ा स्रोत है, लेकिन पशुओं की खरीद और बिक्री की प्रक्रिया बेहद असंगठित है. IIT दिल्ली में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात कीर्ति जांगड़ा से हुई. दोनों ने मिलकर इस क्षेत्र में कुछ बड़ा करने का फैसला किया.
साल 2019 में दोनों ने एक छोटे से वीकेंड प्रोजेक्ट के रूप में काम शुरू किया. शुरुआत में उनका उद्देश्य केवल यह समझना था कि आखिर किसानों की सबसे बड़ी समस्याएं क्या हैं. इसके लिए उन्होंने गांवों का दौरा किया, डेयरी किसानों से बातचीत की और पशु व्यापार की पूरी व्यवस्था को करीब से समझा.
जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि भारत का पशु बाजार बहुत बड़ा है, लेकिन तकनीक की पहुंच यहां लगभग नहीं के बराबर है. किसानों के पास खरीदारों तक पहुंचने का आसान तरीका नहीं था. इसी सोच से Animall का जन्म हुआ.

Animall एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म बना जहां किसान अपने पशुओं की जानकारी अपलोड कर सकते हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों के खरीदार उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं. इससे बिचौलियों की भूमिका कम होने लगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने का रास्ता खुला.
शुरुआत आसान नहीं थी. उस समय बहुत से लोगों को लगता था कि कोई किसान मोबाइल ऐप पर गाय या भैंस नहीं खरीदेगा. लेकिन नीतू और कीर्ति को अपने विचार पर पूरा भरोसा था. उन्होंने ऐप को पूरी तरह किसानों की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया. स्थानीय भाषा पर विशेष ध्यान दिया गया ताकि ग्रामीण उपयोगकर्ता इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें.
उनकी मेहनत रंग लाई. कुछ ही महीनों में Animall ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. शुरुआती दौर में कंपनी को फंडिंग मिली और फिर कई बड़े निवेशकों ने इसमें भरोसा जताया. साल 2020 में कंपनी ने तेजी से निवेश जुटाया. बाद में Sequoia Capital, Beenext, Omnivore और अन्य प्रमुख निवेशकों ने भी कंपनी का समर्थन किया. Tracxn के अनुसार Animall ने अब तक कुल 24.7 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है.
Animall की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि उसने किसानों का विश्वास जीता. कंपनी के प्लेटफॉर्म पर लाखों किसानों ने जुड़ना शुरू किया. पशुओं की खरीद और बिक्री के अलावा कंपनी ने पशु स्वास्थ्य, बीमा, कृत्रिम गर्भाधान, फाइनेंसिंग और विशेषज्ञ सलाह जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराईं. इससे यह केवल एक मार्केटप्लेस नहीं रहा बल्कि पशुपालकों के लिए एक संपूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम बन गया.
कंपनी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Animall ऐप को Google Play Store पर 4.6 रेटिंग मिली है. इसे 1 करोड़ से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया है. कई किसानों ने इसे अपने व्यवसाय के लिए गेम चेंजर बताया.
Animall ने यह साबित किया कि तकनीक केवल शहरों के लिए नहीं होती. अगर सही समस्या को पहचाना जाए और उसका समाधान सरल तरीके से किया जाए तो गांवों में भी डिजिटल क्रांति लाई जा सकती है.
आज भारत का डेयरी बाजार दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में गिना जाता है. Fortune Business Insights की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसकी संभावित वैल्यू 18,975 अरब रुपये आंकी जाती है. ऐसे विशाल बाजार में पारदर्शिता और संगठन लाने का काम Animall जैसे स्टार्टअप कर रहे हैं. यही वजह है कि निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों ने भी इस मॉडल को भविष्य की बड़ी संभावना माना है.
नीतू यादव और कीर्ति जांगड़ा की कहानी सिर्फ एक सफल स्टार्टअप की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है जो समस्या में अवसर देखती है. यह उस विश्वास की कहानी है जो लोगों की हंसी और संदेह के बावजूद अपने लक्ष्य पर डटा रहता है.
एक हॉस्टल के कमरे में जन्मा विचार आज हजारों किसानों के जीवन को आसान बना रहा है. यह कहानी बताती है कि बड़ा बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती. कई बार एक सही विचार, लोगों की समस्या को समझने की क्षमता और लगातार मेहनत ही इतिहास रच देती है.



