संविधान दिवस: आखिर कैसे बना था हमारे देश का संविधान

संविधान दिवस: आखिर कैसे बना था हमारे देश का संविधान

Saturday November 26, 2022,

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विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की व्यवस्था को संचालित करने वाला विश्व का सबसे बड़ा संवैधानिक लिखित दस्तावेज, भारत का संविधान, को लागू हुए आज 73 साल पूरे हो गये. भारत के संविधान में ’हम’ भारत के लोगों के लिये दी गयी कुछ गारंटियां अवश्य ही ढीली पड़ गयी हैं लेकिन हमारा संविधान आज भी उतना ही महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है.


इसकी प्रासंगिकता और इसमें निहित संवैधानिक मूल्यों को याद दिलाने के लिए हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस (Constitution Day) मनाया जाता है. हालांकि आजाद भारत में 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू किया गया था, लेकिन 26 नवंबर का दिन ख़ास है क्योंकि आज के ही दिन साल 1949 में भारत की संविधान सभा ने संविधान को विधिवत अपनाया था.

26 नवंबर को क्यों मनाया जाता है संविधान दिवस

भारत में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने का सिलसिला बहुत पुराना नहीं है, लेकिन इस दिन को राष्ट्रीय कानून दिवस (National Law Day) के तौर पर पर जानने का इतिहास ज़रूर रहा है. और इसके पीछे की कहानी यह है कि 1930 में कांग्रेस लाहौर सम्मेलन में पूर्ण स्वराज की प्रतिज्ञा को पास किया गया था, इसी घटना की याद में कानून दिवस मनाया जाता रहा.


26 नवंबर की खासियत यह है कि इस दिन भारत के संविधान को स्वीकार किया गया था. हम जानते हैं कि 26 जनवरी 1950 के दिन (Republic Day of India) भारत का संविधान लागू हुआ था, लेकिन उससे दो महीने पहले 26 नवंबर 1949 को संविधान बनाने वाली सभा (Constitution Assembly) ने कई चर्चाओं और संशोधनों के बाद आखिरकार संविधान को अंगीकार किया था.

उसके बाद, साल 2015 में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. Bhimrao Ambedkar) की 125वीं जयंती मनाई जा रही थी. संविधान के निर्माता डॉ. अम्बेडकर को श्रद्धांजलि देने के प्रतीक के रूप में भारत सरकार ने इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाए जाने का एलान किया. और तब से साल 2015 से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरुआत हुई. 

कैसे बना संविधान

29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति की स्थापना हुई जिसमें अध्यक्ष के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति की गई थी. जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे.


2 साल 11 महीने और 18 दिन तक चली मैराथन बैठकों के बाद संविधान बना और फाइनल ड्राफ्ट 26 नवंबर 1949 को तैयार हुआ. संविधान को पूरी तरह अपनाए जाने से पहले संविधान सभा ने दो साल 11 महीने और 18 दिन के समय में 166 बार मुलाकात की थी. 24 जनवरी 1950 में संविधान सभा ने हाथ से लिखी गई संविधान के दो कॉपियों पर संसद भवन के सेंट्रल हॉल में दस्तखत किए थे. दो दिन बाद, 26 जनवरी, को इसे लागू किया गया था.


26 नवंबर 1949 से 26 जनवरी तक लगे दो महीनों के दौरान संविधान का पाठ किया गया और इसे अंग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद किया गया था.


संविधान में 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 94 संसोधन शामिल हैं. इसमें 48 आर्टिकल हैं. भारत का संविधान एक हस्तलिखित दस्तावेज़ है. संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों में ही हस्तलिखित और कॉलीग्राफ्ड थी, इसमें किसी भी तरह की टाइपिंग या प्रिंट का प्रयोग नहीं किया गया. अंग्रेज़ी भाषा में इसे सुंदर कैलिग्राफी में हाथ से लिखने का काम प्रेमबिहारी नारायण रायज़ादा ने 6 महीनों में किया था. जबकि हिंदी भाषा में वसंत कृष्ण वैद्य ने हाथ से लिखा था. नंदलाल बोस ने संविधान के पन्नों पर चित्रांकन किया था.


भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है. इसके कई हिस्से यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान के संविधान से लिए गए हैं.


संविधान की ये ओरिजनल हस्तलिखित कॉपियां संसद भवन की लाइब्रेरी में एक खास हीलियम केस में रखी गई हैं.

संविधान का महत्त्व

डॉ. भीमराव अंबेडकर  और संविधान सभा ने देश को एक ऐसा कल्पनाशील दस्तावेज़ दिया, जिसमें राष्ट्रीय एकता को बनाए रखते हुए विविधता के प्रति गहरा सम्मान दिखाई देता है. भारत का संविधान भारत को संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक गणतंत्र घोषित करता है और अपने नागरिकों के लिए समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है. और संविधान के मूल्यों की रक्षा करना हमारे हाथ में है.