स्किन प्रॉब्लम ने दिया बिजनेस आइडिया, Shark Tank India से मिली शोहरत — पर्सनल केयर ब्रांड imfresh की कहानी
स्प्रे और रोल-ऑन से अलग डियोड्रेंट क्रीम के साथ बाजार में उतरे imfresh ने कुछ ही वर्षों में अपनी अलग पहचान बनाई है. 5 लाख रुपये से शुरू हुई कंपनी वित्त वर्ष26 में 14.7 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल कर चुकी है. जानिए आस्था जैन, तनिष्क पांडे और पवनजोत कौर के बूटस्ट्रैप्ड बिजनेस की कहानी.
डियोड्रेंट खरीदते समय ज्यादातर लोग खुशबू और उसकी लॉन्ग-लास्टिंग के बारे में सोचते हैं. लेकिन आस्था जैन, तनिष्क पांडे और पवनजोत कौर के लिए सवाल कुछ अलग था. पारंपरिक डियोड्रेंट इस्तेमाल करने पर तनिष्क को स्किन में जलन होती थी. बेहतर विकल्प की तलाश ने तीनों को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या ऐसा डियोड्रेंट बनाया जा सकता है, जो खुशबू के साथ स्किन का भी ध्यान रखे.
यहीं से जून 2022 में दिल्ली स्थित imfresh की शुरुआत हुई. ₹5 लाख की शुरुआती पूंजी से शुरू हुई कंपनी ने डियोड्रेंट क्रीम को अपना प्रमुख प्रोडक्ट बनाया. कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष25 में उसका रेवेन्यू ₹2 करोड़ था, जो वित्त वर्ष26 में बढ़कर ₹14.7 करोड़ हो गया.
YourStory से बात करते हुए imfresh की को-फाउंडर और CEO आस्था जैन बताती हैं, “imfresh की शुरुआत किसी ट्रेंड को देखकर नहीं हुई थी. इसके पीछे एक ऐसी समस्या थी, जिसे हम खुद समझ रहे थे. तनिष्क को डियोड्रेंट इस्तेमाल करने पर बार-बार स्किन में जलन होती थी. जब हमने इसका विकल्प तलाशना शुरू किया, तो पता चला कि बहुत से लोग ऐसी ही परेशानियों से गुजर रहे हैं.”
अब कंपनी डियोड्रेंट क्रीम से आगे बढ़कर फ्रेगरेंस और स्किन केयर को जोड़ने वाले पर्सनल केयर पोर्टफोलियो पर काम कर रही है. हालांकि, बड़े और स्थापित ब्रांड्स वाले बाजार में एक नए ब्रांड के लिए अपनी जगह बनाए रखना आसान नहीं है.
इंजीनियरिंग कॉलेज से ऑन्त्रप्रेन्योरशिप तक
आस्था जैन के लिए ऑन्त्रप्रेन्योरशिप की शुरुआत कंपनी बनने से काफी पहले हो चुकी थी. पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने छोटे कारोबार शुरू किए और नेतृत्व की भूमिकाएं निभाईं. पढ़ाई के बाद स्टार्टअप्स के साथ काम करते हुए उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग, कंज्यूमर ब्रांडिंग और बिजनेस स्ट्रैटेजी को करीब से समझा.
इसके बाद उन्होंने तनिष्क पांडे के साथ Innovatia Marketing & Technology Solutions शुरू की. इसी दौरान डियोड्रेंट से जुड़ी समस्या सामने आई और दोनों ने इस कैटेगरी को करीब से समझना शुरू किया.
आस्था बताती हैं, “हमने पाया कि समस्या सिर्फ स्किन में जलन तक सीमित नहीं थी. कुछ लोग स्किन सेंसिटिविटी, अंडरआर्म पिग्मेंटेशन और खुशबू के कम समय तक टिकने जैसी समस्याओं का भी सामना कर रहे थे. हमें लगा कि इस कैटेगरी में कुछ अलग करने की गुंजाइश है.”
क्रीम फॉर्मेट को समझाना भी था चुनौती
imfresh ने डियोड्रेंट क्रीम के जरिए बाजार में उतरने का फैसला किया. कंपनी के अनुसार, इसके फॉर्मूलेशन में Alpha Arbutin का इस्तेमाल किया गया है और इसे अंडरआर्म पिग्मेंटेशन तथा शरीर की गंध से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
लेकिन प्रोडक्ट बनाना पहला कदम था. असली चुनौती ग्राहकों को एक ऐसे फॉर्मेट से परिचित कराना था, जो उनके लिए नया था. भारतीय उपभोक्ता लंबे समय से स्प्रे और रोल-ऑन डियोड्रेंट इस्तेमाल करते आए हैं.
आस्था के मुताबिक, “जब हमने डियोड्रेंट क्रीम लॉन्च की, तो सबसे पहले लोगों को यह समझाना पड़ा कि डियोड्रेंट सिर्फ स्प्रे या रोल-ऑन नहीं होता. नए फॉर्मेट पर भरोसा बनाना भी जरूरी था. इसलिए हमने ग्राहकों की प्रतिक्रिया को समझने और उसी आधार पर प्रोडक्ट को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया.”
₹5 लाख से शुरू हुआ बूटस्ट्रैप्ड बिजनेस
imfresh ने अब तक किसी भी बाहरी इंवेस्टर से फंडिंग नहीं जुटाई है. कंपनी ने बूटस्ट्रैपिंग मॉडल पर भरोसा किया है. फाउंडर्स ने शुरुआत में ₹5 लाख लगाए और कंपनी के अनुसार, बाद में कारोबार से आने वाले रेवेन्यू को ही रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग, टीम और मार्केटिंग में लगाया गया.
आस्था कहती हैं, “हमने शुरुआत से ही बाहर से पैसा जुटाने के बजाय अपने संसाधनों का इस्तेमाल किया. शुरुआती ₹5 लाख रिसर्च और डेवलपमेंट में लगाए. इसके बाद कारोबार से जो कमाई हुई, उसे वापस बिजनेस में लगाया.”
कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष25 के ₹2 करोड़ के रेवेन्यू से वित्त वर्ष 26 में ₹14.7 करोड़ तक पहुंचने में प्रोडक्ट इनोवेशन, ग्राहक प्रतिक्रिया और ऑनलाइन-ऑफलाइन वितरण ने भूमिका निभाई.
बूटस्ट्रैपिंग ने कंपनी को कारोबार पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद की है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि विस्तार के लिए संसाधन मुख्य रूप से आंतरिक कैश फ्लो से आते हैं. ऐसे में इन्वेंट्री, मार्केटिंग खर्च और ग्राहक हासिल करने की लागत को संतुलित करना महत्वपूर्ण होगा.

(L-R) तनिष्क पांडे, आस्था जैन और पवनजोत कौर, को-फाउंडर — imfresh
Shark Tank India से मिली शोहरत
imfresh को Shark Tank India में आने के बाद बड़ी ऑडियंस तक पहुंचने का मौका मिला. कंपनी के मुताबिक, इससे ब्रांड की विजिबिलिटी बढ़ी और नए ग्राहकों तक पहुंच बनी.
आज कंपनी अपनी वेबसाइट के साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, क्विक कॉमर्स ऐप्स और ऑफलाइन रिटेल के जरिए प्रोडक्ट बेचती है. Redseer के मई 2026 के विश्लेषण के अनुसार, ऑनलाइन BPC बिक्री में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी वित्त वर्ष25 के करीब 9% से बढ़कर वित्त वर्ष26 में लगभग 18% हो गई. इस चैनल पर BPC की बिक्री वित्त वर्ष26 में 120% से अधिक बढ़ी.
आस्था के लिए Shark Tank India का अनुभव सिर्फ ब्रांड विजिबिलिटी तक सीमित नहीं था. वह कहती हैं, “इसने हमें बड़ी ऑडियंस के सामने पहुंचाया, लेकिन लंबे समय तक टिकने वाले ब्रांड के लिए सिर्फ चर्चा में आना काफी नहीं है. लगातार इनोवेशन और ग्राहक का भरोसा बनाए रखना ज्यादा जरूरी है.”
अब फ्रेगरेंस पर्सनल केयर पर नजर
imfresh अब बॉडी मिस्ट, रोल-ऑन और दूसरे पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर काम करने की तैयारी कर रहा है. कंपनी का लक्ष्य फ्रेगरेंस को केंद्र में रखकर एक बड़ा पर्सनल केयर ब्रांड बनाना है.
आस्था कहती हैं, “हम imfresh को सिर्फ एक सफल डियोड्रेंट क्रीम तक सीमित नहीं रखना चाहते. हर नया प्रोडक्ट किसी वास्तविक ग्राहक समस्या का समाधान करेगा. हमारे लिए ज्यादा प्रोडक्ट लॉन्च करना लक्ष्य नहीं है, सही प्रोडक्ट बनाना लक्ष्य है.”
यह विस्तार ऐसे बाजार में होगा जहां पहले से Vini Cosmetics, ITC, Nivea, Reckitt और कई अन्य कंपनियों के ब्रांड मौजूद हैं. Fogg, Engage, Wild Stone, Park Avenue, Nivea, Axe, Set Wet और Dove भी इस बाजार में प्रतिस्पर्धा करते हैं.
इस लिहाज से imfresh के लिए अगला चरण केवल नए प्रोडक्ट लॉन्च करने का नहीं, बल्कि एक कैटेगरी से दूसरी कैटेगरी में ग्राहक भरोसा और ब्रांड पहचान ले जाने का होगा. व्यक्तिगत समस्या से शुरू हुई कंपनी अब बड़े पर्सनल केयर बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है. वित्त वर्ष 26 में ₹14.7 करोड़ के बताए गए रेवेन्यू के बाद उसकी अगली परीक्षा यही होगी कि क्या वह इस शुरुआती गति को लंबे समय तक कायम रख पाती है.




