स्टार्टअप Resilience AI कैसे बदल रहा है Climate Risk को समझने का तरीका? जानिए
Resilience AI भारत में बढ़ते क्लाइमेट रिस्क को कम करने पर काम कर रहा है. सम्हिता आर की अगुवाई में शुरू हुआ यह स्टार्टअप AI और डेटा से बाढ़, चक्रवात, गर्मी जैसी आपदाओं के जोखिम को समझता है. इसका Resilience360 प्लेटफॉर्म बेहतर फैसले लेने में मदद करता है.
भारत में बाढ़, चक्रवात, गर्मी, भूस्खलन और दूसरी चरम मौसम की घटनाएं अब असामान्य नहीं रह गई हैं. इनका असर सिर्फ जनजीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घरों, सड़कों, बिजली व्यवस्था, कारोबार और पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी पड़ता है.
World Bank के मुताबिक, भारत की 80% से ज्यादा आबादी ऐसे जिलों में रहती है, जो जलवायु से जुड़े खतरों के जोखिम में हैं. पिछले एक दशक में चरम मौसम की घटनाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान भी दोगुना हुआ है.
ऐसे में चुनौती केवल यह जानना नहीं है कि कोई आपदा आने वाली है. बड़ा सवाल यह है कि जोखिम की जानकारी मिलने के बाद क्या किया जाए, किस संपत्ति को पहले सुरक्षित किया जाए और सीमित संसाधनों का इस्तेमाल कहां किया जाए.
इसी सवाल पर काम कर रहा है स्टार्टअप Resilience AI. इसकी शुरुआत 2023 में हुई थी और बेंगलुरु में इसकी हेडक्वार्टर है. सम्हिता आर इसकी CEO और को-फाउंडर हैं.
ग्रामीण भारत में पली-बढ़ीं सम्हिता ने अपने करीब दो दशक लंबे करियर में Honeywell, EY और Microsoft जैसी कंपनियों में डिजिटल और टेक्नोलॉजी से जुड़े बड़े कार्यक्रमों में लीडरशिप की भूमिका निभाई. पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा प्रबंधन से जुड़े काम ने उन्हें यह समझने में मदद की कि जोखिम (रिस्क) की जानकारी तभी उपयोगी है, जब वह सही समय पर लिए गए फैसले में बदल सके.
सम्हिता का शुरुआती जीवन ग्रामीण भारत में बीता. सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़ने के अनुभव ने उनके सोचने के तरीके को प्रभावित किया.
उन्होंने Shri Ram College of Commerce (SRCC) से पढ़ाई की और Indian School of Business (ISB) से MBA किया. इसके बाद Honeywell, EY और Microsoft में करीब 20 साल तक लीडरशिप भूमिकाओं में काम किया.
पब्लिक सेक्टर से उनका जुड़ाव भी उनकी पेशेवर यात्रा का अहम हिस्सा रहा. उन्होंने Ayushman Bharat Digital Mission जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया और SEEDS India के बोर्ड में भी रहीं. इसी दौरान उन्हें आपदा के बाद राहत और पुनर्वास से जुड़े कामों को करीब से देखने का मौका मिला.
YourStory से बात करते हुए सम्हिता बताती हैं, “मैंने देखा कि आपदाओं का सबसे ज्यादा असर कमजोर समुदायों पर पड़ता है. इससे मेरे भीतर यह विश्वास बना कि मजबूती को आपदा आने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले तैयार करना चाहिए.”
Resilience AI की शुरुआत
Resilience AI की शुरुआत 2023 में हुई. कंपनी का विचार मौसम की भविष्यवाणी करने वाली टेक्नोलॉजी से आगे की जरूरत को समझने से आया.
सम्हिता के मुताबिक, Cyclone Yaas और उसके बाद की घटनाओं ने इस अंतर को और स्पष्ट किया. किसी चक्रवात के आने की जानकारी मिल सकती है, लेकिन उसके बाद प्रशासन या कारोबार के सामने कई व्यावहारिक सवाल होते हैं.
कौन सी संपत्ति सबसे ज्यादा जोखिम में है? किस जगह पहले निवेश किया जाए? कौन सा कदम नुकसान को सबसे ज्यादा कम कर सकता है?
इसी समस्या को हल करने के लिए कंपनी ने Resilience360 डेवलप किया है. यह एक AI-समर्थित decision intelligence प्लेटफॉर्म है, जिसमें जलवायु विज्ञान, भू-स्थानिक जानकारी, मशीन लर्निंग (ML) और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े डेटा का इस्तेमाल किया जाता है.
कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल जोखिम का नक्शा तैयार करना नहीं, बल्कि उस जानकारी को ऐसे फैसलों में बदलना है जिन पर संगठन कार्रवाई कर सकें.
बढ़ता कारोबार
Resilience AI का बिजनेस मॉडल एंटरप्राइज SaaS (Software as a Service) और इंस्टीट्यूशनल लाइसेंसिंग पर आधारित है। कंपनी सरकारों, कारोबारों और बड़े संस्थानों के साथ काम करती है.
कंपनी के अनुसार, उसके पास 15 से ज्यादा भुगतान करने वाले ग्राहक हैं और उसके समाधान 105 से ज्यादा शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और कारोबारी संपत्तियों तक पहुंचे हैं. इसके बताए ग्राहकों में National Disaster Management Authority, Delhi Disaster Management Authority, Indian Railways और कुछ Urban Local Bodies शामिल हैं.
कंपनी हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट, डेटा सेंटर, बिजली और ऑयल-गैस जैसे क्षेत्रों में भी काम करती है. UNICEF, United Nations, GIZ और Mercy Corps Ventures जैसी संस्थाओं के साथ काम करने का भी उसका दावा है.
शुरुआत में कंपनी ने खुद से कारोबार खड़ा किया. दिसंबर 2024 में Kalaari Capital की CXXO पहल की अगुवाई में Java Capital की हिस्सेदारी के साथ इसे 1 मिलियन डॉलर की सीड फंडिंग मिली.
कंपनी के मुताबिक, इस फंडिंग का इस्तेमाल प्रोडक्ट डेवलपमेंट, AI और इंजीनियरिंग टीम को मजबूत करने तथा नए डिप्लॉयमेंट्स को बढ़ाने में किया गया.
Resilience AI का दावा है कि पिछले दो से तीन वर्षों में उसका कारोबार 30 गुना बढ़ा है. कंपनी के अनुसार, क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट में लगने वाला समय तीन से आठ महीने से घटकर 72 घंटे तक आ सकता है और असेसमेंट की लागत 40 गुना तक कम हो सकती है. ये कंपनी द्वारा बताए गए आंकड़े हैं और इनके स्वतंत्र सत्यापन की जानकारी उपलब्ध नहीं है.
AI के जरिए क्लाइमेट रिस्क को समझना
Resilience360 में जलवायु से जुड़े जोखिम, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक-आर्थिक कमजोरियों को एक साथ समझने की कोशिश की जाती है.
कंपनी digital twins का भी इस्तेमाल करती है. इनके जरिए किसी असेट की स्थिति और उस पर मौजूद अलग-अलग जोखिमों को एक साथ समझने की कोशिश की जाती है. इसके बाद संगठन तय कर सकते हैं कि किन जगहों पर निवेश या सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जाए.
कंपनी Climate Action Plan, Disaster Management Plan और Business Continuity Plan तैयार करने में भी मदद करती है. इसके अलावा TNFD, ESRS, GRESB और LEED जैसे फ्रेमवर्क से जुड़ी जरूरतों के लिए भी इसके समाधान इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
सम्हिता के मुताबिक, “सवाल केवल यह नहीं है कि जोखिम कहां है. सवाल यह भी है कि क्या करना है, कहां करना है और किस काम को पहले करना है.”
यह सोच उस बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसमें जलवायु अनुकूलन को सिर्फ पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी बड़ा जोखिम माना जा रहा है. World Bank की 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन और गर्मी जैसी चरम मौसम की घटनाएं लगभग हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को प्रभावित कर रही हैं.
आगे की राह
सम्हिता का मानना है कि भारत का क्लाइमेट-टेक इकोसिस्टम आगे चलकर केवल उत्सर्जन घटाने या सस्टेनेबिलिटी तक सीमित नहीं रहेगा. बैंकिंग, इंश्योरेंस, मैन्युफैक्चरिंग, यूटिलिटीज और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में क्लाइमेट रिस्क को फैसलों का हिस्सा बनाना जरूरी होगा.
World Bank की 2025 की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की शहरी आबादी 2050 तक करीब 95.1 करोड़ हो सकती है. तेजी से बढ़ते शहरों के साथ गर्मी और शहरी बाढ़ का जोखिम भी बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, समय रहते इसे अपनाने में निवेश करने से भविष्य में अरबों डॉलर के नुकसान और हजारों जानों को बचाने में मदद मिल सकती है.
Resilience AI अब फाइनेंशियल सर्विसेज, पावर और यूटिलिटीज, मैन्युफैक्चरिंग, ऑयल और गैस, ट्रांसपोर्टेशन और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में विस्तार करना चाहती है.
सम्हिता का व्यक्तिगत लक्ष्य 2030 तक 10 अरब डॉलर के नुकसान को टालने और 50 करोड़ लोगों की सुरक्षा में योगदान देना है. यह कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य है, जिसका वास्तविक प्रभाव आने वाले वर्षों में उसके डिप्लॉयमेंट्स और स्वतंत्र रूप से मापे जा सकने वाले परिणामों से तय होगा.
उनके मुताबिक क्लाइमेट-टेक सेक्टर में काम करने वाले उद्यमियों के लिए लंबे समय तक काम करने का संकल्प सबसे जरूरी है.
सम्हिता कहती हैं, “ऐसी समस्या चुनिए, जिसे हल करने में आपको अपनी जिंदगी का एक दशक लगाने में खुशी हो. सामाजिक और पर्यावरणीय असर पैदा करने वाले काम में परिणाम तुरंत नहीं मिलते. इसलिए दृढ़ विश्वास जरूरी है.”
Resilience AI की कहानी अभी शुरुआती दौर में है. लेकिन जिस समस्या पर यह काम कर रही है, वह तेजी से बड़ी हो रही है. भारत जैसे देश में जहां जलवायु जोखिम का असर आबादी, शहरों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े हिस्से पर पड़ता है, अगली चुनौती सिर्फ यह पता लगाना नहीं होगी कि खतरा कहां है. चुनौती यह होगी कि उस जानकारी के आधार पर समय रहते सही फैसला कैसे लिया जाए.




