इस भारतीय कंपनी के लिये डिजाइन करें स्मार्टफोन और पाएं 50 हजार रुपये कैश प्राइज

इस भारतीय कंपनी के लिये डिजाइन करें स्मार्टफोन और पाएं 50 हजार रुपये कैश प्राइज

Thursday July 02, 2020,

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होम ब्रांड लावा ने गुरुवार को अपने "डिज़ाइन इन इंडिया" कॉन्टेस्ट के लिए छात्रों के साथ-साथ उन पेशेवरों से अपील की है जो अगले भारतीय स्मार्टफोन को डिजाइन करने के लिए कंपनी के साथ काम करने के लिए इच्छुक हो सकते हैं। विजेताओं को 50 हजार रुपये तक के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।


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फोटो साभार: LAVA


लावा इंटरनेशनल में प्रोडक्ट हेड तेजिंदर सिंह ने एक बयान में कहा,

“इस अनूठी पहल के माध्यम से, हम अपने देश के युवाओं को इस राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाने के लिए एक मंच देना चाहते हैं। हम उन्हें अपनी क्रिएटिव स्किल्स का इस्तेमाल करने और अपने डिजाइन के तरीकों में नए दृष्टिकोण लाने के लिए आमंत्रित करते हैं।”

लावा की डिजाइन इन इंडिया प्रतियोगिता तीन चरणों में आयोजित की जाएगी - आइडिएशन, प्रोटोटाइप बनाना और जूरी के समाने प्रजेंटेशन। लावा ने कहा कि इसकी डिजाइन टीम उन प्रतियोगियों को "मेंटर" करेगी, जिन्हें तीन पैरामीटर्स - क्रिएटिविटी, फंक्शनेलिटी और विशिष्टता पर आंका जाएगा। जज पैनल का नेतृत्व लावा इंटरनेशनल के मुख्य निर्माण अधिकारी संजीव अग्रवाल करेंगे।


प्रतियोगिता ECE, IT, CS, Mech और औद्योगिक डिजाइन विभागों के B.Tech, B.E, B.Des और M.Des और इंजीनियरिंग पेशेवरों के छात्रों के लिए खुली है। छात्र या पेशेवर 1-3 के समूहों में प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चुन सकते हैं और अंत में, शीर्ष तीन टीमों को लावा में प्री-प्लेसमेंट इंटरव्यू का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, उन्हें क्रमशः 50,000 रुपये, 25,000 रुपये और 15,000 रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा। इस प्रतियोगिता के लिये रजिस्ट्रेशन 2 जुलाई से शुरू हो गए हैं और आगामी 9 जुलाई तक जारी रहेंगे।


इसमें कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान भारत-चीन गतिरोध और पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के लिए आह्वान घरेलू खिलाड़ियों के लिए चमकने का एक बड़ा अवसर है। लावा उनमें से एक है। यह जल्द ही भारत में नए फोन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, ऐसे समय में जब चीन विरोधी भावना सर्वकालिक उच्च स्तर पर है, और इसकी नई चुनौती निश्चित रूप से भारतीयों को बड़े और बेहतर विचारों के साथ आने के लिए प्रोत्साहित करेगी।



Edited by रविकांत पारीक