Pulse Candy Success Story: कैसे 1 रुपये की इस टॉफी ने बिना विज्ञापन 8 महीने में कमाए 100 करोड़
1 रुपये की Pulse Candy ने बिना बड़े विज्ञापनों के सिर्फ 8 महीने में 100 करोड़ रुपये की कमाई कर इतिहास रचा. जानिए कैसे DS Group की यह खास कैंडी अपने अनोखे स्वाद, सस्ती कीमत और लोगों की जुबान से पूरे भारत में सुपरहिट बन गई.
भारत में टॉफी और कैंडी का बाजार हमेशा से बहुत बड़ा रहा है. हर गली मोहल्ले की दुकान पर अलग अलग तरह की कैंडी मिलती है. लेकिन साल 2015 में एक ऐसी कैंडी आई जिसने पूरे बाजार का खेल बदल दिया. इस कैंडी का नाम था Pulse Candy.
Pulse Candy को बनाने वाली कंपनी है DS Group. यह कंपनी साल 1929 से कारोबार कर रही है. DS Group पहले से ही मसाले, माउथ फ्रेशनर और कई लोकप्रिय प्रोडक्ट्स बनाती थी. बाजार में उसकी अच्छी पहचान थी. लेकिन Pulse Candy ने कंपनी को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया.
Pulse Candy की सबसे बड़ी ताकत उसका अलग स्वाद था. कैंडी को मुंह में रखते ही पहले मीठा स्वाद आता था. ऐसा लगता था जैसे कच्चे आम की मिठास हो. लेकिन कुछ सेकंड बाद अचानक तीखा, खट्टा और नमकीन स्वाद महसूस होता था. यही ट्विस्ट लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आया. लोगों ने ऐसा स्वाद पहले कभी महसूस नहीं किया था.
कैंडी की पैकिंग भी काफी अलग थी. काले और हरे रंग की रैपर दूर से ही नजर आ जाती थी. दुकान पर रखी दूसरी कैंडी के बीच Pulse तुरंत पहचान में आ जाती थी. इसकी कीमत सिर्फ 1 रुपये रखी गई. यही वजह रही कि बच्चे से लेकर बड़े तक हर कोई इसे आसानी से खरीद सकता था.
सिर्फ एक कैंडी खरीदने की बजाय लोग एक साथ कई Pulse Candy खरीदने लगे. कई लोग इसे खाने के बाद दोस्तों को भी खिलाते थे. धीरे धीरे यह कैंडी लोगों की बातचीत का हिस्सा बन गई. जिसने एक बार खाई, उसने दूसरे लोगों को इसके बारे में जरूर बताया.
सबसे दिलचस्प बात यह थी कि कंपनी ने शुरुआत में बड़े विज्ञापनों पर पैसा खर्च नहीं किया. ना टीवी पर बड़े प्रचार हुए और ना ही भारी मार्केटिंग कैंपेन चलाए गए. Pulse Candy की असली मार्केटिंग लोगों ने खुद की. लोग इसके स्वाद की चर्चा करते थे और यही चर्चा इसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई.
कई दुकानों पर हालत यह हो गई कि स्टॉक आते ही खत्म हो जाता था. मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई कि कंपनी पूरी डिमांड भी पूरी नहीं कर पा रही थी. DS Group सिर्फ करीब दो तिहाई मांग के हिसाब से ही कैंडी बना पा रही थी.
Pulse Candy की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लॉन्च के सिर्फ 8 महीने के अंदर इसने 100 करोड़ रुपये की बिक्री कर ली. भारतीय कैंडी बाजार में यह बहुत बड़ी उपलब्धि मानी गई. खास बात यह रही कि यह सफलता बिना बड़े विज्ञापन खर्च के मिली.
इस कैंडी को बनाने के पीछे कंपनी की दो साल की मेहनत थी. कंपनी ने स्वाद को परफेक्ट बनाने के लिए लगातार रिसर्च की. आखिरकार जब सही फ्लेवर तैयार हुआ तो उसे बाजार में उतारा गया. यह मेहनत रंग लाई और Pulse Candy तेजी से भारत की सबसे पसंदीदा कैंडी में शामिल हो गई.
बाद में कंपनी ने इसके कई फ्लेवर लॉन्च किए. इनमें मैंगो, अमरूद, ऑरेंज, पाइनएप्पल और लीची जैसे स्वाद शामिल थे. हर फ्लेवर में वही खास ट्विस्ट रखा गया जिसने Pulse को अलग पहचान दी.
लोग Pulse Candy को सिर्फ मिठाई की तरह नहीं खाते थे. कई लोग इसे खाना खाने के बाद माउथ फ्रेशनर की तरह इस्तेमाल करते थे. कुछ लोग इसे सफर में रखते थे. वहीं दोस्तों के बीच शेयर करने के लिए भी यह पसंदीदा कैंडी बन गई.
Pulse Candy की कहानी यह साबित करती है कि अगर प्रोडक्ट अच्छा हो तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. हर सफलता के पीछे हमेशा बड़े विज्ञापन जरूरी नहीं होते. कई बार ग्राहकों का भरोसा और उनकी पसंद ही सबसे बड़ी ताकत बन जाती है.
आज भी Pulse Candy भारतीय बाजार की सबसे चर्चित कैंडी में गिनी जाती है. 1 रुपये की इस छोटी सी कैंडी ने दिखा दिया कि सही आइडिया, बेहतरीन स्वाद और ग्राहकों का प्यार किसी भी प्रोडक्ट को बड़ी सफलता दिला सकता है.
Edited by Ravi Pareek





