अगर आपका ख़ुद से यक़ीन हट रहा है तो इसे ज़रूर पढ़ें, 'मुस्कान देवता' मदद करेंगीं

    माता-पिता के साथ और खुद पर भरोसे ने बनाया मुस्कान को एक मजबूत इंसान....प्रेरणा देती है मुस्कान की जीवन गाथा...पहली लघु कहानी 'माई फ्रेंड गणेशा ' को न्यूज़ीलैंड की मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन द्वारा सराहा गया.... मुस्कान की आत्मकथा 'आई ड्रीम ', पाठ्यक्रम का हिस्सा बनी...मात्र 12 साल की उम्र से ही 'रेडियो तराना ' के लिए बतौर आरजे काम कर रही हैं मुस्कान देवता...

    14th Oct 2015
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    मुस्कान देवता एक ऐसी लड़की है जिसका जन्म मात्र 32 सप्ताह में ही हो गया था और इस वजह से मां के गर्भ में उनके शरीर का पूरी तरह से विकास भी नहीं हो पाया था। जन्म के समय मुस्कान का वज़न मात्र 1.2 किलोग्राम था जोकि बहुत कम था। मुस्कान के फेफड़े भी जन्म के समय पूरी तरह से विकसित नहीं हुए थे और हृदय में तीन छेद भी थे। इन्हीं सभी विषमताओं को देखते हुए डॉक्टरों ने मुस्कान के माता-पिता को सौ दिनों तक इंतजार करने को कहा और साथ ही यह भी बताया कि आमतौर पर इस स्थिति में जन्में बच्चों के लिए शुरुआत के सौ घंटे उनकी जिंदगी के निर्णायक पल होते हैं। 6 अक्टूबर सन 1999 में जन्मी मुस्कान आज 16 साल की हो चुकी है और कई लोगों के लिए प्रेरणास्रोत भी है।

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    मुस्कान की जीवन यात्रा पर नज़र डालें तो यह वह जहां प्रेरणादायक है वहीं, हैरान भी करती है। मुस्कान की मां जैमिनी देवता बताती हैं कि जब उन्होंने नन्हीं मुस्कान को पहली बार देखा तो उन्हें मुस्कान की आंखों में एक उम्मीद दिखाई दी। वह बहुत सुंदर थी और उसकी आंखों में जीने की चाह नज़र आ रही थी। मैं उसे छूना चाहती थी लेकिन वह इतनी कमजोर और नाजुक थी कि डॉक्टरों ने उसे पैदा होते ही इनक्यूबेटर में रख दिया था। और हमें कहा कि सौ घंटे इंतजार करें तभी बच्ची की स्थिति के विषय में कुछ कहा जा सकता है। अब हमारे पास ईश्वर से उसकी सलामती के लिए प्रार्थना करने के सिवा कोई रास्ता नहीं था। डॉक्टरों की मेहनत और ईश्वर की दया से यह सौ घंटे गुजरे और वह सही सलामत घर आ गई। डॉक्टर ने घर आते वक्त हमें कई तरह की सलाह भी थी कि हमें इस बच्ची की बहुत ज्यादा केयर करनी होगी। हमने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। मुस्कान के शरीर का लेफ्ट हिस्सा राइट हिस्से के मुकाबले ज्यादा विकसित था, यह भी चिंता का विषय था। लेकिन धीरे-धीरे मुस्कान ठीक होने लगी और आज हमें अपनी बेटी पर गर्व है।

    डॉक्टरों ने मुस्कान के माता-पिता को सलाह दी कि वे न्यूज़ीलैंड शिफ्ट कर जाएं ताकि मुस्कान का सही इलाज हो सके। साथ ही वहां का समाज ज्यादा खुला है। इस प्रकार मुस्कान के माता-पिता ने सन 2004 में न्यूज़ीलैंड चले गए।

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    मात्र साढ़े चार साल की मुस्कान के लिए न्यूज़ीलैंड में खुद को एडजेस्ट करना इतना आसान नहीं था। शुरुआती दौर में मुस्कान चीज़ों को समझने में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लेती थी। इस कारण मुस्कान को बाकी बच्चों के साथ घुलने-मिलने में थोड़ी दिक्कत आ रही थी। लेकिन यह स्थिति थोड़े समय के लिए ही थी फिर मुस्कान ने चीज़ों को समझना शुरु कर दिया। आज मुस्कान एक लेखक, एक रेडियो जॉकी और एक प्रेरणादायक स्पीकर है। उन्होंने अपनी इच्छा शक्ति से सभी बाधाओं को दूर किया। न्यूज़ीलैंड के एक पब्लिक अस्पताल में मुस्कान के सीधे पैर की करेक्टिव सर्जरी हुई। मुस्कान नज़र का चश्मा पहनती है और थोड़ा धीरे-धीरे चलती है। लेकिन मुस्कान के हृदय में जो तीन छेद थे वह अब समय के साथ-साथ खुद ही भर चुके हैं।

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    जब मुस्कान 6 साल की थी तब उनके भाई अमन का जन्म हुआ। भाई के जन्म ने मुस्कान की जिंदगी में एक नया उत्साह भर दिया। भाई के आने पर वह बहुत खुश हुई और मुस्कान ने एक बड़ी बहन की तरह अपनी जिम्मेदारियां निभानी शुरु कीं। वे अमन के साथ खेलती और अमन की हर छोटी बड़ी चीज़ का ख्याल रखती। इन सब छोटी-छोटी बातों ने मुस्कान के भीतर आत्मविश्वास भरना शुरु किया। आज मुस्कान एक लेखक हैं। उन्होंने अपनी पहली लघु कहानी 'माई फ्रेंड गणेशा' लिखी। इस कहानी को मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन न्यूज़ीलैंड सरकार द्वारा सलेक्ट किया गया। उसके बाद मुस्कान ने अपनी आत्मकथा 'आई ड्रीम' लिखी। और आज उनकी आत्मकथा वेसली गल्र्स हाई स्कूल के पाठयक्रम का हिस्सा है। मुस्कान भी इसी स्कूल में पढ़ती है। मुस्कान बताती है कि उनके बहुत कम दोस्त थे जिस कारण उन्होंने लिखना शुरु किया। कैड टॉक्स में वे बोल चुकी हैं कि कैसे इंसान अपने भीतर की हिम्मत के बलबूते कई विपरीत परिस्थितियों का सामना कर सकता है। हाल ही में उन्होंने फेस्टीवल ऑफ फ्यूचर में भी बतौर वक्ता हिस्सा लिया। मुस्कान बताती हैं कि उनके साथ जो भी कठिन परिस्थितियां आईं वे एक अच्छे कारण के लिए आईं। उन्हें दोस्त बनाने में दिक्कत होती थी और वे खुद को अकेला महसूस करती थीं। इस स्थिति ने उन्हें लेखन की ओर प्रेरित किया। मुस्कान अपनी कलम के द्वारा अपने मन को हल्का करती हैं। उनके मन में जो भी ख्याल व विचार आता है वह उसे अच्छे से शब्दों में पिरोकर कागज़ पर उतार देती हैं। उनके लेखन से लोग प्रेरित होते हैं और इसी वजह से उन्हें बतौर आरजे रेडियो तराना में भी काम करने का मौका मिला। रेडियो तराना न्यूज़ीलैंड का एक प्रसिद्ध रेडियो स्टेशन है और मुस्कान वहां बच्चों का एक प्रोग्राम होस्ट करती हैं। यह काम वे मात्र 12 साल की उम्र से कर रही हैं। बड़ी होकर मुस्कान एक फॉरसिंक साइनटिस्ट बनना चाहती हैं। मुस्कान 11वीं कक्षा में पढ़ती हैं अंग्रेजी, स्पैनिश और कैमिस्ट्री उनके प्रिय विषय हैं। उनका भाई अमन उनका बहुत अच्छा दोस्त है। दोनों माता-पिता के घर पर न होने की स्थिति में घर का ख्याल रखते हैं। मुस्कान को कुकिंग करना भी बहुत पसंद है खासकर बेकिंग मैथर्ड से बनने वाली चीज़ें बनाना उन्हें बहुत अच्छा लगता है।

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