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इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट को गावों तक पहुचाने की कोशिश कर रहा है आंध्र प्रदेश का यह स्टार्ट अप

ईवी स्टार्ट अप ई-तेजस एक ओर जहां मार्केट को गाँवों तक फैला रहा है वहीं दूसरी ओर दिसम्बर तक शहरी क्षेत्र के लिए पूरी तरह भारत में बनी पहली मसल ई-मोटरसाइकिल भी बाज़ार में उतारने जा रहा है.

इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट को गावों तक पहुचाने की कोशिश कर रहा है आंध्र प्रदेश का यह स्टार्ट अप

Thursday October 06, 2022 , 6 min Read

इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री दुनिया के सबसे तेजी से उभरते उद्योगों में से हैं. ऐसा अनुमान है कि अगले कुछ सालों  में भारत समेत दुनिया भर में वे पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाले पर्यावरण और जीवन की दृष्टि से असुरक्षित वाहनों की जगह ले लेंगे. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इनका प्रचलन शहरों तक सीमित रहेगा और ग्रामीण उपभोक्ताओं तक ले जाना एक चुनौती रहेगा.  आंध्र प्रदेश के अनंतपुर से उत्पादन करने वाला स्टार्ट अप ईको-तेजस (Eko Tejas) इस चुनौती का हाल निकालने की कोशिश कर रहा है. 

ईको-तेजस  ई-मोबिलिटी (e-mobility) को देश के अर्बन और रूरल (urban and rural) दोनों बाज़ारों में बढ़ावा देने और इलेक्ट्रिक व्हीकल इको सिस्टम को सशक्त करने की दिशा में काम कर रहा है.  दोनों को-फ़ाउंडर्स का मानना है कि कोई भी सेक्टर तभी सफल माना जा सकता है जब उसकी पहुंच देश के सुदूर ग्रामीण इलाको तक हो. 


लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिन्स्टर से मैनेजमेंट पढ़ने वाले वेंकटेश तेज उनमें से एक हैं और वे आंध्र प्रदेश के एक व्यापारिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं. स्टील उत्पादन, एडिबल ऑयल, शुगर प्रोडक्शन इनका पारिवारिक व्यापार था लेकिन इनके पिता ने इन्हें कुछ नया करने और न्यू-एज बिजनेस की तरफ सोचने को प्रोत्साहित किया.आज वेंकटेश मोबिलिटी सेक्टर के सबसे नए लक्ष्य - ई-मोबिलिटी- की तरफ सफलतापूर्वक कदम बढ़ा रहे हैं.  


कंपनी के दूसरे को-फ़ाउंडर श्रीयल ठाकरे का ताल्लुक महारष्ट्र के एक छोट-से गांव चन्द्रपुर से है. कोर्पोरेट सेक्टर में आने से पहले श्रीयल 10 साल तक इन्डियन आर्मी में थे. सर्विस देने के बाद वे कोर्पोरेट सेक्टर में आने का मन बना चुके थे. आर्मी के बाद श्रीयल ने एक रीक्रुटमेंट कंपनी में काम किया, फिर 2009 में खुद की  रीक्रुटमेंट कंपनी खोली और 2018 में ई-व्हीकल की एक कंपनी ज्वाइन की. 2 साल बाद काम के सिलसिले में वेंकटेश और श्रीयल एक कॉन्फ़्रेन्स में मिले और वहां से शुरू हुआ इनका सफ़र. 


देश में ई-व्हीकल के भविष्य को समझने के सिलसिले में योरस्टोरी हिंदी ने ईको तेजस के दोनों को-फाउनडर्स से बात की. 


योरस्टोरी: इको-तेजस के शुरूआती दिनों के बारे में बताइए? 

वेंकटेश: शुरुआत में हम सिर्फ थ्री-व्हीलर्स ई-व्हीकल बना रहे थे, जैसे ई-कार्गोज़ और ई-रिक्शा. ई-कार्गोज़ हमारे बेस्ट-सेलर्स थे- FMCG डीलर्स, रिक्शा वाले, स्ट्रीट वेंडर्स - ये सभी के काम की चीज़ थी. इसके अलावा, हम एक साल की वारंटी दे रहे थे जो उन्हें किसी भी प्रकार के मेंटेनेंस खर्च से बचा रही थी.  हमारे ई-कार्गोज़ का फ्यूल खर्च पारम्परिक वाहनों पर होने वाले फ़्यूल खर्च का 8-10 प्रतिशत है. ये वजहें मिल-जुल कर हमारे ई-कार्गोज़ को ख़रीदने वाले के लिए भी फायदे का सौदा बना रही थी. 


उदाहरण के तौर पर, एक ऑटो ड्राइवर को हर दिन फ्यूल पर 800 से 1000 रुपये खर्च करने पड़ते  हैं. ईको-तेजस के ई-व्हीकल पर आपका खर्च सिर्फ 10 रुपये प्रति दिन है. ज़ाहिर सी बात है, वो इसे प्रेफर करेंगे. 


योरस्टोरी: नए सेक्टर में काम करने के अपने चैलेंजेस होते हैं, आपके क्या रहे?

वेंकटेश: सबसे बड़ा चैलेन्ज रहा मार्केटिंग. हम लोगों को बताना चाहते थे कि ई-व्हीकल उनके लिए अफोर्डेबल है, लेकिन यह आसानी से नहीं हुआ. शुरुआती दिनों में, हमें हर दिन लगभग 25-30 कॉल आते थे लेकिन उनमें से सिर्फ 1 या 2 ही प्रॉडक्ट ख़रीदते थे. फिर हमनें नगरपालिका पर फोकस करना शुरू किया और वहां से चीज़ें बदलनी शुरू हो गईं. एक साल के भीतर हमने 3 राज्यों, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु, में क़रीब 100 नगरपालिकाओं के साथ काम किया. उसके रिजल्ट्स हमारे लिए बहुत अच्छे रहे. आइस-क्रीम वेंडर, फूड-कार्ट, रेलवे, FMCG, स्टील इंडस्ट्री, सीमेंट इंडस्ट्री समेत कुल 80 तरह के कामों के लिए अब ईको-तेजस के ई-व्हीकल यूज किये जा रहे हैं.


योरस्टोरी: कंपनी एक्सपैंड करने का ख़याल कैसे आया?

वेंकटेश: श्रीयल के आने के पहले तक ईको-तेजस थ्री-व्हीलर्स बनाने तक सीमित था. हमें पता ही नहीं था कि हम टू-व्हीलर्स के इतने बड़े मार्केट से पूरी तरह से गायब हैं. 2021 में श्रीयल के ईको-तेजस में आने के बाद कंपनी ने टू-व्हीलर्स मार्केट में कदम रखा. टू-व्हीलर्स के मार्केट में आने का श्रेय श्रीयल को जाता है. 1 साल में श्रीयल के नेतृत्व में कंपनी ने अपने डीलर नेटवर्क में 10 गुणा बढ़ोतरी की है.


योरस्टोरी: ईको-तेजस की पहुंच कहां-कहां तक है? इसकी सफलता के बारे में कुछ बताएं?

श्रीयल: कंपनी आज 70 से ज्यादा डीलर्स के साथ कम कर रही है और 10 राज्यों में हमारे आउटलेट हैं. 10 महीनों में हमनें लगभग 4000 टू-व्हीलर्स बेचा है. हमारे पास दो तरह के टू-व्हीलर्स हैं- लो स्पीड स्कूटर्स और हाई स्पीड स्कूटर्स हैं, EVXTRO और PRIVE. ये ई-व्हीकल Li-ion बैटरियों से पावर्ड हैं.


योरस्टोरी: फ्यूचर प्लान क्या हैं?

श्रीयल: हम बहुत जल्द, इस साल के दिसंबर तक, एक हाई-स्पीड क्रूजर ई-बाइक ‘E-Dyroth’ बाज़ार में उतारने वाले हैं. यह बाइक भारत की पहली Muscle E-Motorcycle होगी, आप कह सकते हैं हार्ले-डेविडसन की तर्ज़ पर बनी हुई ई-बाइक. यह ई-बाइक पूरी तरह से भारतीय है- इसकी डिजाइन से लेकर प्रोडक्शन तक इसको पूरी तरीके से भारत में ही बनाया गया है. अभी ये टेस्टिंग के फेज़ में है. FAME सब्सिडी के तहत इस बाइक पर लगभग 45,000 रुपये की सब्सिडी ली जा सकती है.


योरस्टोरी: ईको-तेजस के ई-मोबिलिटी सेक्टर में आने के क्या कारण रहे हैं?

वेंकटेश: हम ईको-तेजस के माध्यम से पर्यावरण का ध्यान तो रख ही रहे हैं लेकिन हम ईको-तेजस को ‘वेल्थ-क्रिएशन’ के प्लेटफार्म के रूप में भी देखते हैं. हम अपने स्टेकहोल्डर्स, चाहे वो खरीदार हों, डीलर्स हों या इंवेस्टर्स हों, के लिए पैसे बचाने करने का जरिया बन कर उनके लिए वेल्थ-क्रिएट करना चाहते हैं. हम उनकी अच्छी लाइफस्टायल, उनकी इनकम का माध्यम बनना चाहते हैं.


श्रीयल: हम आपके प्लेटफार्म के माध्यम से लोगों को यह बताना चाहते हैं कि हमारी पूरी तरह से भारतीय कंपनी ईको-तेजस अपने आपको यामाहा, बजाज, और महिंद्रा के ट्रेडिशन में देखती है जिसमें गाड़ियों की टेस्टिंग पर बहुत ध्यान दिया जाता है. हम भी यही कर रहे हैं, अपनी हर ई-व्हीकल को कड़ी टेस्टिंग से गुजारने के बाद ही मार्केट में उतारते हैं, मुझे नहीं लगता दूसरे स्टार्ट-अप ऐसा कर रहे हैं. हमें अपनी यह सबसे बड़ी स्ट्रेंथ लगती है. और हमारा टारगेट सिर्फ शहर नहीं हैं, हम टियर-5 तक भी अपनी जगह बनाना चाहते हैं.