"अमरीका में सत्रह अरब डाॅलर का है योग का कारोबार"

By Pooja Goel
April 07, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000

"अमरीका में सत्रह अरब डाॅलर का है योग का कारोबार"
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योग के असली स्वरूप को तलाशता हिमालय में पैदा हुआ योगी...

अक्षर पावर योगा केंद्र खोल लोगों को सिखा रहे हैं योग...

दुनियाभर में भारतीय योग विद्या को फैलाना है मकसद...

समय के साथ योग क्रिया में कुछ बदलाव कर दिया है नया स्वरूप...

योग से लोगों को मोटापे से मुक्ति दिलवा रहे हैं अक्षर...


‘‘सत्रह अरब डाॅलर,’’ वह अपनी आवाज में अविश्वास के भाव को छिपाते हुए कहते हैं। ‘‘अमरीका में योग का कुल कारोबार आज की तारीख में इतना बड़ा है।’’ और इस रकम को विधिपूर्वक पुष्ट करने के लिये वह अपनी कलम उठाते हैं और पास में रखे कागज के टुकड़े पर ‘‘17’’ लिखकर दिखाते हैं।

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योग को उसकी मातृभूमि में उसका पुराना स्वरूप वापस दिलवाने के लिये अक्षर ने पहल की। वे भारतवर्ष में नेकनीयत से योग की दीक्षा दे रहे योगियों को योग एलायंस इंटरनेशनल के मंच पर लाए और उन्हें इकट्ठा करने का प्रयास किया। अक्षर मानते हैं, 

योग भारत की प्राचीन संपदा है और हम लोग इसे छोड़ रहे हैं। अमरीका द्वारा योग को व्यापार के रूप में दुनिया के सामने पेश करने के बाद ही हमारा ध्यान अपनी इस संस्कृति की ओर गया।

‘‘आखिर कैसे एक माँ अपने बच्चे को किसी दूसरे के पास पालन-पोषण के लिये छोड़ सकती है?’’ अक्षर पूछते हैं। ‘‘अब तक भारत में योग सीखने के लिये हम अमरीका से आए प्रशिक्षकों पर निर्भर थे, लेकिन यह हमारे देश का ज्ञान है। क्या हमारे देश में योग सिखाने वालों को पहले किसी दूसरे देश से प्रमाणपत्र लेना पड़ेगा?’’ वह आगे पूछते हैं।

हमारे देश में योग शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए प्राचीन हिमालयी योग संस्कृति के इस ध्वजवाहक की यह चिंता वाजिब भी लगती है। वर्तमान में भारत में योग की शिक्षा दे रहे शिक्षकों का एक बड़ा तबका अमरीका में बैठे योगियों से प्रमाणित है। अपने देश की इस प्राचीन परंपरा को उसकी ही जन्मभूमि में पहचान दिलवाने के प्रयास के तहत उन्होंने ‘योग एलायंस इंटरनेशनल’ का गठन किया और अब वे इसे मजबूती देने के प्रयासों में लगे हुए हैं।

अपने इस मिशन में उन्हें काफी हद तक कामयाबी भी मिली है और रूस, चीन, यूरोप के अलावा अमरीका के भी कुछ योग संस्थान उनकी इस संस्था से संबद्ध हुए हैं। यह अक्षर के प्रयासों का नतीजा है कि अब भारत से एक विश्व योग संस्थान संचालित हो रहा है जिसके वे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि हैं। इसके अलावा वे योग को बढ़ावा देने के लिये जल्द ही बैंगलोर में एक अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन के आयोजन की भी तैयारी कर रहे हैं।

कंधों तक लहराते लंबे बाल और दाढ़ी में उजला चेहरा लिये और कमर पर धोती बांधे अक्षर पहले-पहल तो अमर चित्र कथा में वर्णित किसी संत जैसे दिखते हैं। बैंगलोर के सबसे सफल और मशहूर योग संस्थान के संस्थापक और मालिक अक्षर किसी आईआईएम स्नातक की तरह व्यापार के बारे में बातें करते हैं। हेबल में अक्षर पावर योगा के पांचवे केंद्र में अपने योग की मुद्रा में पैर पर पैर रखकर बैठे लगभग 30 वर्षीय इस युवा को योग चिकित्सकों और अनुनाइयों से काफी सम्मान हासिल है।

फिलहाल अक्षर अपने पावर योगा केंद्रों के विस्तार की दिशा में रात-दिन एक करके लगे हुए हैं और कुर्ग में एक नया केंद्र खोलने की तैयारी में हैं जो उनके अनुसार योग के अनुयाइयों के लिये किसी धर्मस्थान से कम नहीं होगा। ‘‘इस केंद्र में योग सीखने वालों को कमांडो की तर्ज पर प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके अलावा यह दुनिया का ऐसा अकेला योग प्रशिक्षण केंद्र होगा जहां योग से संबंधित हर प्रकार की जानकारी मिल सकेगी।’’ इसके अलावा वे जल्द ही भारत के योग केंद्र मैसूर में भी जल्द एक नया संस्थान प्रारंभ करने वाले हैं।

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योग की मुद्राओं के बारे में जानकारी देते हुए अक्षर बताते हैं कि उनके यहां वर्तमान में योग के तीन विदेशी जानकार, जिनमें से एक ईरान के हैं और दो पेरिस के, प्रशिक्षण ले रहे हैं। सुबह के सत्र में वे प्रशिक्षुओं को विभिन्न योगासन करवाते हैं। ‘‘दिन के समय मैं प्रशिक्षुओं को उन ऋषियों का आह्वाहन करने के महत्व के बारे में समझाता हूँ जिनके नाम पर विभिन्न योगासनों का नामकरण किया गया है।’’

हर सत्र के समाप्त होने के बाद छात्र उन्हें दण्डवत प्रणाम करते हैं तब समझ आता है कि कैसे इनके संस्थान में आने वालों को भारतीय परंपरा और आध्यामिकता का पाठ पढ़ाया जाता है। इनके हर केंद्र में कक्षा की शुरूआत ‘ओम’ के उच्चारण और ‘सूर्य नमस्कार’ के साथ होती है।

अक्षर जगन्नाथ परम्परा के अनुयायी हैं और पुरी के जगन्नाथ मंदिर में सूर्य देवता को पूजते हैं। हिमालय में अमित के रूप में जन्मे अक्षर खुद को पैदाइशी योगी मानते हैं। ‘‘योगियों के दो प्रकार के होते हैं, एक जो योग के अभ्यास के माध्यम योगी बनता है और दूसरा जो जन्म से ही योगी होता है। अगर आपकी पैदाइश हिमालय की है, तो आप निश्चित ही एक योगी हैं,’’ वे कहते हैं।

अक्षर ने समय की मांग को देखते हुए और उसे पूरा करने के लिये प्राचीन योग पद्धति में कुछ बदलाव किया है। इस संस्थान में वजन घटाने के लिये आने वाले ग्राहकों की लंबी सूचि इसी बदलाव की द्योतक है। इसके अलावा शहर के विभिन्न सामरिक बिंदुओं पर अक्षर के विभिन्न योग मुद्राओं में बैठे बड़े-बड़े होर्डिंग लोगों को 15 दिन में तीन किलो वजन करने का वायदा करते हुए अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

‘‘परंपरागत रूप से योग परमात्मा से जुड़ाव का एक तरीका है जो समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार बदल जाता है। यही कारण है कि हम योग की सच्ची भावना को बदले बिना लोगों को यह सिखा रहे हैं। जैसे 19वीं सदी में किये जाने वाले अभ्यास को अब पारंपरिक माना जाता है वैसे ही भविष्य में इसे भी पारंपरिक योग माना जाएगा।’’

अक्षर पावर योगा की अधिकतर योग कक्षाएं वजन कम करने की इच्छा रखने वालों से भरी रहती हैं। ‘‘मोटापे की समस्या हमारे देश में बहुत तेजी के साथ फैल रही है और हम अमरीका की राह पर है। हम अपने यहां आने वाले सभी लोगों को पहले कठोर परिश्रम करवाकर उनका वजन कम करते हैं फिर उन्हें वास्तविक योग ‘आसन’ से रूबरू करवाया जाता है। इस तरह बढ़ा हुआ वजन योग के अभ्यास में आड़े नहीं आता।’’ इसके अलावा अक्षर दुनियाभर के भविष्य के योग शिक्षकों को भी योग का प्रशिक्षण देते हैं।

अक्षर को पूरा भरोसा है कि भारत में योग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और उन्हें विश्वास है कि भविष्य में भारत दुनिया का योगगुरू बनकर अपनी पुरानी ख्याति को पाकर रहेगा।

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