संस्करणों
विविध

IIT रिसर्चर ने खोजा ऐसा पौधा जिससे खत्म किया जा सकेगा कैंसर

yourstory हिन्दी
13th Nov 2018
9+ Shares
  • Share Icon
  • Facebook Icon
  • Twitter Icon
  • LinkedIn Icon
  • Reddit Icon
  • WhatsApp Icon
Share on

भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान के कुछ शोधकर्ताओं ने भी ऐसा ही एक अविष्कार किया है जिससे कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में मदद मिल सकती है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


पिछले एक दशक में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी ने 8 लाख से भी अधिक लोगों को अपने चपेट में ले लिया। हालांकि वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं और इससे मुक्ति पाने की दवाएं विकसित करने में लगे हैं। 

वैसे तो इंसान ने काफी तरक्की कर ली है और बीमारियों से लड़ने के लिए कई तरह की दवाएं भी विकसित कर ली हैं, लेकिन कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे दुनियाभर के लोग प्रभावित हैं। जनसांख्यिकी आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में इस खतरनाक बीमारी ने 8 लाख से भी अधिक लोगों को अपने चपेट में ले लिया। हालांकि वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं और कैंसर से मुक्ति पाने की दवाएं विकसित करने में लगे हैं। भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान के कुछ शोधकर्ताओं ने भी ऐसा ही एक अविष्कार किया है जिससे कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में मददगार साबित हो सकती है।

आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने फ्लोरोसेंट कार्बन नैनौडॉट विकसित किए हैं जो एक साथ ही कैंसर कोशिकाओं का पता लगा सकते हैं और उन्हें नष्ट भी कर सकते हैं। यह पदार्थ काफी सूक्ष्म आकार का है जिसे एक प्रकार की वनस्पति से निकाला गया है। इस पौधे में गुलाबी रंग के फूल होते हैं। इसलिए इन्हें फ्लोरेसेंट कार्बन नैनो डॉट्स नाम दिया गया है। जिस टीम ने इस पर रिसर्च किया उसका नेतृत्व कर रहे डॉ. पी गोपीनाथ के मुताबिक नैनो आकार (10-9 मीटर) के कार्बन कण को रोजी पेरिविंकल प्लांट की पत्तियों से तैयार किया गया है।

शोधकर्ताओं की इस उपलब्धि को साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और भारत सरकार ने भी सराहा है। गोपीनाथ ने कहा, 'नैनो कार्बन पार्टिकल की मदद से कैंसर कोशिकाओं को आसानी से देखा जा सकता है। इतना ही नहीं इमेजिंग सिस्टम की मदद से कहां जा रही हैं इसका भी पता लगाया जा सकता है। कैंसर कोशिकाओं की सही स्थिति का का पता चलने के बाद इसे खत्म करने में आसानी हो जाती है। गोपीनाथ के अनुसार नैनोटैग आधारित रिसर्च जानवरों और क्लीनिकल ट्रायल में सफल रही है। यह एक कम लागत नैनो दवा है जो कैंसर जैसे खतरनाक रोग को दूर करने में मदद करेगी। '

आईआईटी की टीम के इस शोध को साइंस एंड इंजीनयरिंग रिसर्च बोर्ड (सर्ब) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सहयोग प्राप्त हुआ है। गोपीनाथ ने कहा कि कैंसर कोशिकाओं की पहचान और उन्हें नष्ट करना कैंसर उपचार और इसकी औषधि पर शोध के क्षेत्र में कई साल से चुनौती है। उन्होंने आगे कहा, 'हम आगे का मूल्यांकन करने के लिए इन नैनोमटीरियल्स को जानवरों पर प्रयोग करेंगे ताकि जांच और उपचार का पता लगाया जा सके।' कैंसर कोशिकाओं का पता लगाना काफी मुश्किल काम है और इस पर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातारा शोध कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: एक आईपीएस अफसर ने बंजर पहाड़ी को कर दिया हरा-भरा

9+ Shares
  • Share Icon
  • Facebook Icon
  • Twitter Icon
  • LinkedIn Icon
  • Reddit Icon
  • WhatsApp Icon
Share on
Report an issue
Authors

Related Tags