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71 साल में पहली बार आर्मी डे परेड का नेतृत्व करेंगी पहली महिला लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी

71 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि आर्मी डे परेड का नेतृत्व कोई महिला लेफ्टिनेंट कर रही हैं। उस लेफ्टिनेंट का नाम है भावना कस्तूरी।

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10th Jan 2019
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भावना कस्तूरी


हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना द्वारा आर्मी डे मनाया जाता है औऱ परेड होती है। यह परेड 1949 से हो रही है। दरअसल इसी दिन भारतीय सेना के फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान ले ली थी। इसके बाद उन्हें भारत के पहले कमांडर इन चीफ बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। तब से इस दिन को आर्मी डे परेड के नाम से जाना जाता है। 71 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि आर्मी डे परेड का नेतृत्व कोई महिला लेफ्टिनेंट कर रही हैं। उस लेफ्टिनेंट का नाम है भावना कस्तूरी।


लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी 144 पुरुषों वाले सैन्यदल का नेतृत्व करेंगी। हालांकि 2015 में तीनों सेनाओं की महिला ऑफिसर्स ने गणतंत्र दिवस के मौके पर 148 सैनिकों वाले सैन्यदल का नेतृत्व किया था, लेकिन आर्मी डे परेड का नेतृत्व पहली बार कोई महिला लेफ्टिनेंट कर रही हैं। भावना भारतीय सेना की सर्विस कॉर्प्स सैन्यदल (ASC) का नेतृत्व करेंगी। यह परेड इसलिए भी खास होने जा रही थी क्योंकि ASC पिछले 23 सालों से इसमें हिस्सा नहीं ले रहा था। दो दशक बाद इस ग्रुप को परेड में शामिल होने का मौका मिला है।


भावना ने एक इंटरव्यू में कहा, 'ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी लेडी अफसर कंटिंजेंट को लीड कर रही है। इससे पहले किसी लेडी अफसर ने जवानों की कंटिंजेंट को लीड नहीं किया है। सभी जवान बेहद मेहनत कर रहे हैं और हम पिछले छह महीनों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। भावना के साथ दो पुरुष जवान भी प्रैक्टिस कर रहे हैं।


नवभारत टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में भावना कहती हैं कि जब उन्हें परेड कमांड करने के लिए चुना गया तो इंस्ट्रक्टर से लेकर सभी ऑफिसर और जवान भी बेहद गर्व महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'एक लेडी ऑफिसर कमांड दे रही हैं और 144 जवान उसकी कमांड फॉलो कर रहे हैं यह अपने आप में बिल्कुल अलग अनुभव है। जब सीनियर हम पर गर्व करते हैं तो हमारा हौसला और भी बढ़ता है। हम किसी को यह कहने का मौका नहीं देना चाहते हैं कि कोई यह कहे कि लेडी ऑफिसर नहीं कर पाएंगी।'


यह भी पढ़ें: कलेक्टर ने दूर किया जातिगत भेदभाव, दलित महिला के हाथ से पानी पीकर दिलाया हक



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