सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में तीसरी बार ऑल वुमन बेंच करेगी सुनवाई

By yourstory हिन्दी
December 01, 2022, Updated on : Thu Dec 01 2022 08:01:03 GMT+0000
सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में तीसरी बार ऑल वुमन बेंच करेगी सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को जस्टिस हिमा कोहली और बेला एम त्रिवेदी की पीठ गठित की थी. यह तीसरी बार है जब एक महिला बेंच सुनवाई के लिए बैठेगी. इससे पहले 2018, 2013 में भी सुप्रीम कोर्ट में ऑल वुमन बेंच बैठी थी.
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सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में गुरुवार 1 दिसंबर, 2022 एक नया इतिहास के नाम रखा जाएगा. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम 11 में सुनवाई के लिए एक महिला बेंच बैठेगी.


मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को जस्टिस हिमा कोहली और बेला एम त्रिवेदी की पीठ गठित की थी. यह तीसरी बार है जब एक महिला बेंच सुनवाई के लिए बैठेगी. पहली बार सुप्रीम कोर्ट में 2013 में एक महिला बेंच बनी थी. उस समय जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और रंजना प्रकाश देसाई एक साथ बैठे थे.


साल 2018 में ऐसा दूसरी बार हुआ, जब जस्टिस आर भानुमति और इंदिरा बनर्जी ने 5 सितंबर को एक बेंच साझा की. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस कोहली और त्रिवेदी की पीठ के पास 32 मामले सूचीबद्ध हैं. इसमें वैवाहिक विवादों से जुड़ी 10 ट्रांसफर याचिकाएं, 10 जमानत मामले, 9 सिविल और 3 आपराधिक मामले शामिल हैं.


सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक कुल 11 महिला जजें हुई हैं. जस्टिस फातिमा बीवी फातिमा सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज थीं. ये 1989 की बात है. जस्टिस बीवी 1992 में रिटायर हुईं और जस्टिस सुजाता मनोहर 1994 में सुप्रीम कोर्ट की जज बनाई गईं.


जस्टिस सुजाता मनोहर 1999 में और 2000 जस्टिस रुमा पाल में आईं और वो भी 2006 में रिटायर हो गईं. चार सालों तक सुप्रीम कोर्ट में कोई महिला जज नहीं आईं. 2010 में जस्टिस ज्ञान सुधा मिसरा को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया. 


सुप्रीम कोर्ट में अकेली महिला जज के आने का सिलसिला 2011 में खत्म हुआ जब जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को भी बेंच में शामिल किया गया. 


जस्टिस रंजना जस्टिस ज्ञान सुधा के साथ बेंच में बैठने वाली दूसरी महिला जज बन गईं. यह पहली बार था जब सुप्रीम कोर्ट में एक से ज्यादा महिला सिटिंग जज थीं. इस तरह सुप्रीम कोर्ट को अपने इतिहास में पहली बार ऑल वुमन बेंच मिली.


जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा अप्रैल 2014 में सेवानिवृत्त हुईं और जस्टिस देसाई अगस्त 2014 में जस्टिस भानुमति को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने तक कुछ समय के लिए एकमात्र महिला जज के रूप में बनी रहीं.


अप्रैल 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा को पदोन्नत किए जाने तक जस्टिस भानुमति बेंच में एकमात्र महिला न्यायाधीश बनी रहीं. न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी को नियुक्त किया गया और जुलाई 2020 में न्यायमूर्ति भानुमति की सेवानिवृत्ति तक शीर्ष अदालत में तीन महिला जजें थीं.


अगस्त 2021 से सितंबर 2022 तक सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार चार सिटिंग महिला जजें देखी गईं. इनमें जस्टिस इंदिरी बनर्जी, हिमा कोहली, वीबी नागरत्ना और बेला त्रिवेदी थीं. जस्टिस बनर्जी इस साल सितंबर में रिटायर हो गईं जिसके बाद महिला जजों की संख्या एक बार फिर तीन हो गई.


फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में केवल तीन महिला न्यायाधीश हैं- जस्टिस कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला एम त्रिवेदी. जस्टिस कोहली का कार्यकाल सितंबर 2024 तक है, जस्टिस त्रिवेदी जून 2025 तक पद संभालेंगी और जस्टिस नागरत्ना 2027 में देश की पहली महिला चीफ जस्टिस बनने वाली हैं.


Edited by Upasana

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