फरवरी 2022 में सकल GST राजस्‍व संग्रह रहा 1,33,026 करोड़ रुपये, पांचवीं बार 1.30 लाख करोड़ का आंकड़ा पार

फरवरी 2022 के दौरान राजस्व संग्रह पिछले साल के इसी महीने के जीएसटी राजस्व से 18 प्रतिशत अधिक और फरवरी 2020 के जीएसटी राजस्व से 26 प्रतिशत अधिक है।

फरवरी 2022 में सकल GST राजस्‍व संग्रह रहा 1,33,026 करोड़ रुपये, पांचवीं बार 1.30 लाख करोड़ का आंकड़ा पार

Wednesday March 02, 2022,

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फरवरी 2022 के महीने में सकल जीएसटी राजस्व संग्रह 1,33,026 करोड़ रुपये का रहा, जिसमें सीजीएसटी 24,435 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 30,779 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 67,471 करोड़ रुपये (वस्‍तुओं के आयात पर संग्रह किए गए 33,837 करोड़ रुपये सहित) और उपकर 10,340 करोड़ रुपये (वस्‍तुओं के आयात पर संग्रह किए गए 638 करोड़ रुपये सहित) शामिल हैं।

सरकार ने आईजीएसटी से 26,347 करोड़ रुपये का सीजीएसटी और 21,909 करोड़ रुपये का एसजीएसटी में निपटान किया है। फरवरी 2022 के महीने में नियमित निपटान के बाद केन्‍द्र और राज्यों का कुल राजस्व सीजीएसटी के लिए 50,782 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 52,688 करोड़ रुपये रहा।

चार्ट चालू वर्ष के दौरान मासिक सकल जीएसटी राजस्व के रुझान को दर्शाता है।

चार्ट चालू वर्ष के दौरान मासिक सकल जीएसटी राजस्व के रुझान को दर्शाता है।

फरवरी 2022 के महीने के लिए राजस्व पिछले साल के इसी महीने में संग्रह किए गए जीएसटी राजस्व से 18 प्रतिशत और फरवरी 2020 में जीएसटी राजस्व से 26 प्रतिशत अधिक है। इस मास के दौरान, वस्‍तुओं के आयात से प्राप्‍त राजस्व 38 प्रतिशत अधिक रहा और घरेलू लेन-देन से प्राप्‍त राजस्‍व (सेवाओं के आयात सहित) पिछले वर्ष के इसी महीने के दौरान इन स्रोतों से प्राप्‍त राजस्व की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है।

28 दिनों का महीना होने के कारण फरवरी में आम तौर पर जनवरी की तुलना में कम राजस्व प्राप्त होता है। फरवरी 2022 के दौरान इस अधिक वृद्धि को आंशिक लॉकडाउन, सप्ताहांत और रात के कर्फ्यू एवं ओमिक्रॉन लहर के कारण विभिन्न राज्यों द्वारा लगाए गए विभिन्न प्रतिबंधों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए, जो 20 जनवरी के आसपास चरम सीमा पर थे।

ऐसा पांचवीं बार हुआ है जब जीएसटी संग्रह 1.30 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गया है। जीएसटी लागू होने के बाद से, पहली बार जीएसटी उपकर संग्रह 10,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गया है, जो कुछ प्रमुख क्षेत्रों, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल बिक्री में रिकवरी होने का सूचक है।