BharatPe के यूनिकॉर्न बनने से लेकर बिखरने तक का सफर

भारतपे के शुरुआत कोफाउंडर्स के तौर पर भाविक कोलाडिया और शास्वत नकरानी और अशनीर ग्रोवर का नाम आता है. हालांकि अशनीर ने 28 फरवरी, 2022 को कंपनी से इस्तीफा दे दिया. उसके कुछ ही महीनों बाद भाविक ने भी कंपनी छोड़ दी.

BharatPe के यूनिकॉर्न बनने से लेकर बिखरने तक का सफर

Wednesday February 08, 2023,

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आज जो डिजिटल पेमेंट इतना आसान लगता है आज से एक दशक पहले लोग इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे. इंटरेनेट और मोबाइल बैंकिंग के साथ ऑनलाइन पेमेंट की शुरुआत तो हुई लेकिन ओटीपी का झंझट तो कभी सर्वर डाउन हमेशा कंज्यूमर्स के लिए चुनौती बने ही रहते थे.

इसी बीच 2016 में भारत सरकार ने यूपीआई लॉन्च करके ऑनलाइन पेमेंट की दुनिया ही बदल दी. जिस पेमेंट को करने के लिए इतनी मशक्कत लगती थी वो मिनटों में होने लगे. हालांकि यूपीआई को लेकर जागरुकता काफी धीरे-धीरे फैली.

यूपीआई आने के बाद एक और इनोवेशन हुआ जिसने लाखों से लेकर एकाद रुपये के पेमेंट ट्रांजैक्शन को चुटिकयों का काम बना दिया. हम बात कर रहे हैं क्यूआर कोड बेस्ड पेमेंट की. डिजिटल पेमेंट के सफर को यहां तक पहुंचाने में यूपीआई बेस्ड QR कोड्स का बड़ा रोल रहा है.

और इसका क्रेडिट जाता है भारतपे को. भारतपे के शुरुआत कोफाउंडर्स के तौर पर भाविक कोलाडिया और शास्वत नकरानी और अशनीर ग्रोवर का नाम आता है. हालांकि अशनीर ने 28 फरवरी, 2022 को कंपनी से इस्तीफा दे दिया. उसके कुछ ही महीनों बाद भाविक ने भी कंपनी छोड़ दी.

आज यूनिकॉर्न ऑफ इंडिया की सीरीज में हम जानेंगे भारतपे के शुरुआती सफर से लेकर उसके यूनिकॉर्न बनने से लेकर उसके बिखरने की कहानी.

कहां से और कैसे आया आईडिया

IIT दिल्ली में पढ़ते हुए शाश्वत ने bookmyhair.com नाम का स्टार्टअप बनाया था जो चला नहीं. लेकिन उसकी असफलता से सीख कर उन्होंने भारतपे की शुरुआत की.

आईडिया के बारे में बात करते हुए शास्वत एक इंटरव्यू में बताते हैं कि कॉलेज के दिनों में उन्होंने देखा कि यूपीआई होने के बाद भी मर्चेंट्स और शॉपकीपर डिजिटल पेमेंट लेने में काफी हिचक रहे हैं.

दुकानदारों से महीनों तक पूछताछ करने के बाद समझ आया कि मर्चेंट्स पेमेंट प्रोसेसिंग के लिए एमडीआर या कमिशन नहीं देना चाहते थे. अगर कोई उनके पास ज्यादा कस्टमर लाने का वादा करे तो ही वो डिजिटल पेमेंट पर कमिशन देने को राजी थे. 

शास्वत बताते हैं कि उस समय फोनपे, पेटीएम डिजिटल पेमेंट सर्विस दे रही थीं लेकिन सिर्फ कंज्यूमर्स को. कोई ऐसी कंपनी नहीं थी जो मर्चेंट्स को फाइनैंशियल पेमेंट सलूशन देने का काम कर रही हो.

हमें मार्केट में प्रॉडक्ट गैप नजर आया और बस इस तरह शरुआत हुई भारतपे की. जिसे खासतौर पर सिर्फ मर्चेंट्स की परेशानियों को दूर करने और उन्हें सभी तरह के फाइनैंशियल प्रोडक्ट ऑफर करने के लिए बनाया गया था.

शुरुआत

अगस्त 2018 में शाश्वत और उनकी टीम ने क्यूआर कोड फर्स्ट प्रोडक्ट लॉन्च किया. यह इंडिया का पहला इंटरऑपरेबल क्यूआर यूपीआई कोड था. इस क्यूआर प्रोडक्ट को मर्चेंट्स ने हाथों हाथ लिया.

क्योंकि यूजर के पास कोई भी पेमेंट ऐप हो मर्चेंट्स सिर्फ इस एक कोड के जरिए पेमेंट रिसीव कर सकते थे. उन्हें अलग-अलग ऐप के लिए अलग-अलग सिस्टम रखने की झंझट नहीं थी. इससे भी बड़ी बात उन्हें पेमेंट्स पर किसी भी तरह का कमिशन नहीं देना था.

अशनीर ग्रोवर की एंट्री

बिना कमिशन मर्चेंट्स को ट्रांजैक्शन की सुविधा देने का आईडिया था तो जबरदस्त लेकिन एक बिजनेस के लिए सबसे जरूरी पहलू होता है कमाई. जो इस स्ट्रैटजी से नहीं होने वाली थी. भारतपे को कमाई की स्ट्रैटजी मिली अशनीर ग्रोवर से. अशनीर IIT दिल्ली के सीनियर थे जो पहले कई इनवेस्टमेंट फर्म्स में काम कर चुके थे. ग्रोफर्स को बनाकर बेच चुके थे.

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उन्होंने अपने काम के दौरान ये नोटिस किया था कि रिटेल बिजनेस में मार्जिन कम होने की वजह से मर्चेंट डिजिटल पेमेंट जैसी सर्विसेज के लिए पैसे देने में हिचकते थे. लेकिन वही दुकानदार लोन के लिए मोटा इंटरेस्ट देने को राजी थे.

मुश्किल ये थी कि इन्हें बैंकों से जल्दी लोन मिलता नहीं था. इस डिमांड को पूरा करते हुए भारतपे ने मर्चेंट्स और शॉपकीपर्स को लोन देने का फैसला शुरू किया.

फंडिंग

कंपनी के आईडिया को मर्चेंट्स के बीच इतना सराहा गया कि ग्रोथ जबरदस्त होने लगी. कंपनी हर तीसरे चौथे महीने नया फंडिंग राउंड जुटाने लगी. भारतपे ने अब तक 12 राउंड में 720 मिलियन डॉलर जुटाए हैं.

भारतपे के निवेशकों में टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट, ड्रैगोनियर इनवेस्टमेंट ग्रुप, रेबिट कैपिटल, आईआईएफएल वेल्थ जैसे नाम शामिल रह चुके हैं. कंपनी कई एंजल इनवेस्टर्स को कई गुना फायदे के साथ एग्जिट भी दे चुकी है.

बिजनेस मॉडल

2018 में कंपनी ने क्यूआर बेस्ड प्रोडक्ट शुरू किया. इसके 6 महीने बाद ही कंपनी ने लोन देना शुरू कर दिया. इसके लिए उसने लिकिलोन्स और लेनदेनक्लब जैसी पीयर-टू-पीयर एनबीएफसी के साथ पार्टनरशिप की.

कंपनी 5 मिनट के अंदर अंदर मर्चेंट्स को लोन उपलब्ध कराती है. डिजिटल लेंडिंग को भी अच्छा रेस्पॉन्स मिला. आज की तारीख में कंपनी सबसे बड़ी बीटूबी फिनटेक लेंडर है और हर महीने करीबन 300 करोड़ से ज्यादा का कर्ज बांटती है.

2020 कोविड के पहले लॉकडाउन में फाउंडर्स ने क्यूआर बेस्ड POS मशीन लॉन्च किया. भारतपे स्वाइप नाम से शुरू यह सेगमेंट भी जीरो कमिशन पर आधारित था. इसकी सफलता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि एक साल के अंदर कंपनी ने एक लाख मशीने बांट दिए थे. 2020 दिसंबर में ही नंबर तीन पेमेंट प्रोसेसर बन गई.

2021 में पेबैक को खरीदा जो एक लॉयल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी थी. उसके खुद के 10 करोड़ कस्टमर थे. जल्द ही हम भारत की पहली फिनटेक कंपनी बन गए जिसे बैंकिंग लाइसेंस मिला. 

माइलस्टोन

लॉकडाउन की वजह से कंपनी की ग्रोथ एकाएक कई गुना बढ़ गई. कंपनी के पास तीन साल के अंदर ही 11 अरब डॉलर से ज्यादा का टीवीपी यानी ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग वैल्यू हो गया.

2021 में ही कंपनी ने 12 पर्सेंट क्लब ऐप की शुरुआत की. जहां इनवेस्टर्स पैसे देकर 12 फीसदी तक रिटर्न पा सकते थे वहीं जिन्हें कैपिटल की जरूरत थी वो 12 पर्सेंट देकर आसानी से लोन ले सकते थे.

उसी महीने दूसरा कंज्यूमर ऐप पोस्टपे लॉन्च किया जो बाय नाउ पे लेटर था. यहां कंज्यूमर बिना किसी एक्स्ट्रा इंटरेस्ट के 10 लाख रुपये तक का क्रेडिट ले सकते थे. इसी बीच कंपनी ने 2.85 अरब डॉलर की वैल्यूएशन के साथ अगले राउंड की फंडिंग जुटाई और कंपनी अगस्त 2021 में यूनिकॉर्न बन गई.

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बिखरने का सफर

अशनीर ग्रोवर के आने से पहले भाविक ही कंपनी का चेहरा हुआ करते थे. हालांकि दिसंबर 2018 में सिकोया ने कंपनी में यह कह कर निवेश करने से मना कर दिया कि कंपनी के फाउंडर भाविक कोलाडिया के नाम यूएस कोर्ट में 2015 में एक मामला चल रहा था. इस वजह से कंपनी के फाउंडर्स के नाम से भाविक नाम हटा दिया गया और इस तरह अशनीर भारतपे का चेहरा बन गए.

कंपनी ग्रोथ के मुकाम चढ़ रही थी.  हर महीने हर साल कुछ न कुछ नए माइलस्टोन हासिल कर रही थी लेकिन जितनी जल्दी कंपनी ने नाम हासिल किया उतनी ही बुरे तरीके नाम विवादों के बीच भी आ खड़ा हुआ. फरवरी 2022 में खबर आई कि अशनीर ग्रोवर ने कंपनी के एमडी और कोफाउंडर के पद से इस्तीफा दे दिया है.

दरअसल उनका नाम से एक रेकॉर्डिंग वायरल हो गई. उसमें वो कोटक वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी के एक एंप्लॉयी से बदतमीजी से बात करते सुने गए जिसका कारण नाइका के आईपीओ में निवेश न कर पाना था.

इसके कुछ ही समय बाद बोर्ड ने उन्हें दो महीने के लिए छुट्टी पर जाने को कह दिया. बाद में पता चला कि इसकी वजह कॉल रेकॉर्डिंग नहीं कथित तौर कंपनी फाइनैंशियल फ्रॉड को वजह बताया गया था. कुछ ही दिनों बाद ग्रोवर की पत्नी माधुरी ग्रोवर को भी जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया.

कंपनी ने आरोप लगाए कि अशनीर और माधुरी ने मिलकर कंपनी के फंड का निजी कामों के लिए इस्तेमाल किए हैं. हायरिंग में अपने लोगों को प्राथमिकता देना, मार्केटिंग खर्चों में फर्जीवाड़ा जैसे आरोप सामने आए.

भारतपे ने मामले की जांच एक एडवाइजरी फर्म को सौंपी. जिसकी रिपोर्ट में मालूम पड़ा कि अशनीर ने कंपनी में उनकी पोजिशन और 9.5 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहे ये सुनिश्चित करने के लिए एक लीगल कंपनी से संपर्क भी किया था.

इस बीच अशनीर ने कंपनी से कहा कि अगर उन्हें 6 अरब डॉलर की वैल्यूएशन के हिसाब से उनकी हिस्सेदारी के बदले 4000 करोड़ रुपये मिलेंगे तभी वो कंपनी में अपनी हिस्सेदारी छोड़ेंगे.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत और कुछ प्रमुख निवेशकों ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया और अंत में अशनीर को कंपनी छोड़नी पड़ी.

उधऱ कंपनी का कहना था कि जैसे ही अशनीर को मालूम पड़ा कि बोर्ड मीटिंग के एजेंडे में जांच रिपोर्ट है. रिपोर्ट में अशनीर के खिलाफ आरोप साबित होने और उऩपर कारर्वाई की बात कही गई थी. उसके कुछ मिनट बाद ही उन्होंने इस्तीफा सौंपा था.

हालांकि अशनीर ने भले ही कंपनी के एमडी पद से इस्तीफा दे दिया लेकिन अभी भी वो 9.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़े शेयरहोल्डर बने हुए हैं.

हाल ही में खबर आई है कि भारतपे के एक्स फाउंडर और एमडी ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक नई कंपनी रजिस्टर कराई है जिसका नाम थर्ड यूनिकॉर्न प्राइवेट लिमिटेड है.

इस्तीफों की बहार

2022 तक आते आते अशनीर और उनकी पत्नी के अलावा कई सीनियर एग्जिक्यूटिव्स के इस्तीफे देखने को मिले. कंपनी के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर विजय अग्रवाल और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर रजत जैन ने नवंबर,2022 में कंपनी से इस्तीफा दे दिया.

कंपनी के कंज्यूमर प्लैटफॉर्म पोस्टपे के हेड नेहुल मेहरोत्रा ने कंपनी छोड़ दी.भारतपे में टेक्नोलॉजी-वीपी गीतांशु सिंगला से लेकर प्रोग्राम मैनेजर मानस पोद्दार ने भी रिजाइन कर दिया.

घाटे में पहुंच गई कंपनी

कंपनी ने जनवरी 2023 में वित्त वर्ष 2022 के लिए नतीजे पेश किए. जिसमें उसे  5,611.58 करोड़ का घाटा हुआ है. यह इससे पिछले साल हुए 1619.17 करोड़ के घाटे से 3.46 गुना ज्यादा है. हालांकि घाटे में बढ़ोतरी के पीछे CCPS के फेयर वैल्यू में बदलाव को बताया गया.

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