सिर्फ फंडिंग नहीं, सही मार्गदर्शन भी जरूरी... इसी सोच से शुरू हुआ स्टार्टअप PedalStart
2021 में शुरू हुआ PedalStart आज शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए फाउंडर-फर्स्ट एक्सेलेरेटर के रूप में उभरा है. जानिए कैसे यह प्लेटफॉर्म फंडिंग, मेंटरशिप, निवेशकों तक पहुंच और ऑपरेशनल सपोर्ट के जरिए फाउंडर्स को आइडिया से ग्रोथ तक पहुंचाने में मदद कर रहा है.
भारत में स्टार्टअप शुरू करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. लेकिन हर अच्छा आइडिया सफल कंपनी में नहीं बदल पाता. कई बार वजह सिर्फ फंडिंग की कमी नहीं होती, बल्कि सही मार्गदर्शन, अनुभवी लोगों का साथ और मजबूत नेटवर्क का अभाव भी होता है. यही जरूरत साल 2021 में गुरुग्राम से शुरू हुए PedalStart जैसे प्लेटफॉर्म की नींव बनी. इसे मानस पाल (Manas Pal) और आदित्य डारोलिया (Aditya Darolia) ने मिलकर शुरू किया था.
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से विस्तार कर रहा है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक देश में 2.23 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हो चुके हैं, जिन्होंने 23.36 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं. सिर्फ वित्त वर्ष 2025-26 में ही 55,200 से अधिक नए स्टार्टअप मान्यता प्राप्त हुए, जो Startup India की शुरुआत के बाद किसी एक साल का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
के को-फाउंडर और CEO मानस पाल का मानना है कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है. जरूरत सिर्फ सही समय पर सही सहयोग की है.
हाल ही में YourStory से बातचीत में उन्होंने अपने ऑन्त्रप्रेन्योरशिप के सफर, PedalStart की शुरुआत, भारत के बदलते स्टार्टअप इकोसिस्टम और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की.

कॉलेज के दिनों में शुरू किया पहला स्टार्टअप
मानस पाल ने उद्यमिता (ऑन्त्रप्रेन्योरशिप) की शुरुआत किसी कॉरपोरेट नौकरी के बाद नहीं, बल्कि कॉलेज के दिनों में अपना पहला स्टार्टअप शुरू करके की. इसी अनुभव ने उन्हें सिखाया कि सफल कंपनी बनाने के लिए सिर्फ अच्छा आइडिया काफी नहीं होता. सही टीम, समय पर फैसले और सीमित संसाधनों में काम करने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है.
कॉलेज के बाद उन्होंने Shuttl, WheelsEye और Fella Homes जैसी कंपनियों में मार्केटिंग और ऑपरेशंस की जिम्मेदारियां संभालीं. इसके अलावा करीब तीन साल तक नीति आयोग की विभिन्न पहलों के तहत युवा इनोवेटर्स को मेंटर भी किया. इस दौरान उन्होंने देखा कि अलग-अलग क्षेत्रों के अधिकांश शुरुआती उद्यमी लगभग एक जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
मानस पाल कहते हैं, “कॉलेज में पहला स्टार्टअप शुरू करने के बाद समझ आया कि बिजनेस सिर्फ आइडिया का खेल नहीं है. सही लोगों का साथ, सही फैसले और सही समय पर मिलने वाली सलाह बहुत मायने रखती है.”
एक समस्या से जन्मा PedalStart
इन्हीं अनुभवों के आधार पर 2021 में PedalStart की शुरुआत हुई. मानस और उनकी टीम ने महसूस किया कि कई फाउंडर्स के पास मजबूत बिजनेस आइडिया होने के बावजूद उन्हें सही मेंटर, निवेशकों तक पहुंच और व्यावहारिक सलाह नहीं मिल पाती. संसाधन मौजूद थे, लेकिन वे बिखरे हुए थे.
इसी कमी को दूर करने के लिए PedalStart ने खुद को पारंपरिक एक्सेलेरेटर या इनक्यूबेटर तक सीमित नहीं रखा. कंपनी शुरुआती चरण के चुनिंदा स्टार्टअप्स में निवेश करती है और इक्विटी के बदले उनके साथ लंबे समय तक काम करती है. इस दौरान प्रोडक्ट्स की स्ट्रेटेजी, बाजार तक पहुंच, फंडिंग जुटाने की तैयारी, टीम तैयार करने और बिजनेस स्केलिंग आदि में सहयोग दिया जाता है.
मानस पाल कहते हैं, “फाउंडर्स को सिर्फ फंडिंग नहीं, बल्कि ऐसे लोगों की जरूरत होती है जिन्होंने पहले यह सफर तय किया हो. हर स्टार्टअप अलग होता है, इसलिए हमारा तरीका भी हर कंपनी के लिए अलग होता है.”
भरोसे से बना मजबूत नेटवर्क
कंपनी के अनुसार अब तक PedalStart को 40,000 से अधिक स्टार्टअप आवेदन मिल चुके हैं. इनमें से सिर्फ 21 स्टार्टअप्स को फंडिंग और एक्सेलेरेशन के लिए चुना गया.
कंपनी का दावा है कि उसके पोर्टफोलियो का संयुक्त मूल्यांकन 2 करोड़ डॉलर से अधिक है. इन स्टार्टअप्स ने मिलकर 1 करोड़ डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल किया है, 10 फॉलो-ऑन फंडिंग राउंड हासिल किए हैं और 300 से अधिक रोजगार पैदा किए हैं.
आज PedalStart का नेटवर्क सिर्फ निवेशकों तक सीमित नहीं है. इसमें अनुभवी फाउंडर्स, ऑपरेटर और इंडस्ट्री के दिग्गज लीडर भी शामिल हैं. गुरुग्राम, बेंगलुरु और हैदराबाद से संचालित यह प्लेटफॉर्म 18 से अधिक राज्यों के ऑन्त्रप्रेन्योर्स के साथ काम कर रहा है.
मानस पाल के मुताबिक, “हमने शुरुआत से संख्या बढ़ाने के बजाय प्रभाव पैदा करने पर ध्यान दिया. अगर किसी फाउंडर को सही मेंटर या सही इन्वेस्टर मिल जाए और वह शुरुआती गलतियों से बच सके, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता है.”

स्टार्टअप PedalStart की टीम
बदल रहा है भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम
मानस पाल का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पहले की तुलना में अधिक परिपक्व हुआ है.
उनके अनुसार अब फाउंडर्स केवल फास्ट ग्रोथ या हाई वैल्यूएशन पर नहीं, बल्कि ग्राहकों की वास्तविक समस्याओं, प्रोडक्ट-मार्केट फिट, यूनिट इकॉनॉमिक्स और सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.
साथ ही ऑन्त्रप्रेन्योरशिप अब महानगरों तक सीमित नहीं रही. छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में ऐसे फाउंडर सामने आ रहे हैं जो टेक्नोलॉजी और मार्केट दोनों की बेहतर समझ रखते हैं.
मानस पाल कहते हैं, “आज के फाउंडर पहले से कहीं ज्यादा व्यावहारिक हैं. वे सिर्फ फंडिंग जुटाने को सफलता नहीं मानते, बल्कि सस्टेनेबल बिजनेस बनाने पर ध्यान दे रहे हैं. सबसे सकारात्मक बदलाव यह है कि अब बेहतरीन आइडिया देश के हर हिस्से से सामने आ रहे हैं.”
PedalStart जैसे प्लेटफॉर्म ऐसे समय में काम कर रहे हैं, जब देशभर में शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है. PIB की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब स्टार्टअप्स देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मौजूद हैं. महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या में अग्रणी हैं, जबकि राजस्थान में भी 8,100 से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जिन्होंने 83,100 से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए हैं.
आगे की योजना
मानस पाल के अनुसार तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच सबसे बड़ी चुनौती क्वालिटी बनाए रखना है. अलग-अलग क्षेत्रों और अलग चरणों के स्टार्टअप्स की जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए हर फाउंडर को उसकी आवश्यकता के अनुरूप सहयोग देना आसान नहीं होता.
आने वाले वर्षों में उनका लक्ष्य PedalStart को भारत के अर्ली-स्टेज फाउंडर्स के लिए सबसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना है.
वे कहते हैं, “भारत ऑन्त्रप्रेन्योरशिप के एक अहम दौर में है. आने वाले वर्षों में अलग-अलग बैकग्राउंड से नए फाउंडर्स सामने आएंगे. हमारी कोशिश रहेगी कि उन्हें सही समय पर सही लोगों से जोड़ा जाए और मजबूत कंपनियां बनाने में मदद मिले.”
PedalStart की कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप प्लेटफॉर्म की नहीं, बल्कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में बदलती सोच की भी कहानी है. यह उस दौर का प्रतिनिधित्व करती है, जहां सफलता का पैमाना केवल फंडिंग जुटाना नहीं, बल्कि मजबूत और टिकाऊ कंपनियां बनाना है. जैसे-जैसे देश में ऑन्त्रप्रेन्योरशिप का दायरा बढ़ेगा, वैसे-वैसे ऐसे प्लेटफॉर्म की भूमिका भी और महत्वपूर्ण होती जाएगी.




