अगर फ्लैट की बुकिंग होती है कैंसल तो बिल्डर को लौटाना होगा पूरा जीएसटी

By yourstory हिन्दी
May 09, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:07 GMT+0000
अगर फ्लैट की बुकिंग होती है कैंसल तो बिल्डर को लौटाना होगा पूरा जीएसटी
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सांकेतिक तस्वीर

देश में जीएसटी के रूप में एक समान कर पद्धति लागू तो कर दी गई, लेकिन इसकी वजह से कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ रहा है। अब इन मुश्किलों को आसान करने की कोशिश भी की जा रही हैं। इसी क्रम में घर की बुकिंग करने के बाद उसे कैंसल करने वाले खरीदारों को अब उसकी अमाउंट राशि के साथ-साथ जीएसटी की भी वापसी होगी। बिल्डरों को अब यह राशि खरीदारों को वापस करनी होगी और उन्हें क्रेडिट एडजस्टमेंट के रूप में यह राशि वापस होगी।


केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है। रिएल एस्टेट के क्षेत्र में हाल ही में जीएसटी की दरों में बदलाव किया गया था उसे लेकर यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है। इस बदलाव के बाद अब बिल्डरों को बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट सुविधा का लाभ उठाये सस्ती आवासीय परियोजनाओं पर 1 फीसदी और अन्य श्रेणियों की आवासीय इकाइयों पर पांच प्रतिशत की दर से GST लगाने की अनुमति दी गई है। नई व्यवस्था एक अप्रैल 2019 से लागू हो गई है।


बिल्डरों की जो परियोजनायें 1 अप्रैल 2019 से पहले से चल रही हैं उनके मामले में उन्हें नई व्यवस्था अपनाने का विकल्प दिया गया है। ऐसी परियोजनाओं के लिये या तो वह पुरानी जीएसटी व्यवस्था को जारी रख सकते हैं अथवा 1 प्रतिशत और 5 प्रतिशत की नई दर को अपना सकते हैं। पुरानी व्यवस्था में सस्ती आवासीय परियोजनाओं के लिये आठ प्रतिशत और अन्य श्रेणियों की आवासीय इकाइयों के लिये 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का प्रावधान है। इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट सुविधा का लाभ भी बिल्डर उठा सकते हैं जबकि नई व्यवस्था में दरें घटा दी गईं हैं और इनपुट टैक्स क्रेडिट सुविधा को समाप्त कर दिया गया है।


कर विभाग के जारी किये गये सवाल-जवाब (एफएक्यू) में कहा गया है कि फ्लैट का दाम बदलने या फिर बुकिंग निरस्त होने की स्थिति में डिवेलपर धारा 34 में किये गये प्रावधान के अनुरूप खरीदार के लिये ‘क्रेडिट नोट’ जारी कर सकता है। एफएक्यू में कहा गया है, 'डिवेलपर को इस तरह जारी क्रेडिट नोट की राशि के किये गये कर भु्गतान पर समायोजन की सुविधा उपलब्ध होगी।'


पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि किसी डिवेलपर ने 1 अप्रैल 2019 से पहले की 10 लाख रुपये की बुकिंग राशि पर 12 प्रतिशत की दर से 1.20 लाख रुपये का जीएसटी भुगतान किया है। ऐसी बुकिंग के निरस्त होने की स्थिति में बिल्डर को उसकी अन्य जीएसटी देनदारियों के समक्ष 1.20 लाख रुपये के अडजस्टमेंट की अनुमति होगी। एएमआरजी एण्ड एसोसियेट्स के पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि इस स्पष्टीकरण से निश्चित ही पुरानी बुकिंग निरस्त कराने वाले ग्राहकों का कर बोझ कम होगा।


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