सहारनपुर में कॉमन सर्विस सेंटर का उद्घाटन, हस्तशिल्पियों को मिलेगी मदद

By yourstory हिन्दी
January 31, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
सहारनपुर में कॉमन सर्विस सेंटर का उद्घाटन, हस्तशिल्पियों को मिलेगी मदद
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सांकेतिक तस्वीर

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने बुधवार को सहारनपुर में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उन्नत सामान्य सुविधा केंद्र (अपग्रेडेड कॉमन सर्विस सेंटर) का उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि सहारनपुर के सांसद राघव लखनपाल थे। इसके साथ ही ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार और सहारनपुर के गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।


दुनिया के बाजारों में भारत से हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली नोडल एजेंसी हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCH) विश्व पटल पर अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखते हुए उच्च गुणवत्ता के होम, लाइफस्टाइल, फैशन फर्नीचर और टेक्सटाइल्स जैसे भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की सशक्त छवि का निर्माण करती है।


राकेश कुमार ने कहा, “हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए ईपीसीएच अनेक गतिविधियों का आयोजन कर रहा है। इनमें निर्यात बढ़ाने के लिए उत्पादकों और निर्यातकों के बीच जागरूकता बढ़ाना, उत्पाद विकसित करने के लिए सहायता प्रदान करना, तकनीक और स्किल अपग्रेडेशन और डिजाइन डेवलपमेंट जैसी चीजें शामिल हैं।“


देश के दूर-दराज इलाकों में फैले कारीगरों और शिल्पकारों द्वारा हस्तशिल्प का उत्पादन किया जाता है, इसे ध्यान में रखते हुए ईपीसीएच ने अपनी सुनियोजित रणनीति के तहत निर्यातकों को नवीनतम मशीनें देकर विभिन्न शिल्प समूहों में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित करने का फैसला लिया है ताकि अंतरराष्ट्रीय मांग के मुताबिक हस्तशिल्प का उत्पादन किया जा सके।


लकड़ी और लकड़ी के हस्तशिल्प के लिए सहारनपुर को पुराना गढ़ माना जाता है। सहारनपुर में 400 से ज्यादा इकाइयां हैं जहां हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण किया जाता है। इन वस्तुओं को दुनिया के विभिन्न हिस्सों खासकर यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है।


 कुमार ने आगे बताया कि प्रतिस्पर्धी देशों में हस्तशिल्प मशीनों की मदद से बड़ी मात्रा में उत्पादित किए जाते हैं, जिससे तालमेल बनाने के लिए ईपीसीएच ने वाणिज्य मंत्रालय और हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय ASIDE योजना के तहत 2003 में नेशनल सेंटर फॉर फोटो एंड पिक्चर फ्रेमिंग टेक्नोलॉजी के लिए नई मशीनें स्थापित कीं। इन मशीनों में ऑटोमेटिक फोर साइड प्लानर, ऑटोमेटिक हाइड्रो कॉपी के लिए कॉपियर लेथ, स्पिंडल मोल्डर, ऑटो आउटर कॉपी शेपर, ऑटो इनर कॉपी शेपर शामिल हैं। केंद्र में समय-समय पर वुड सीजनिंग और केमिकल ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर अपग्रेड किया गया ताकि निर्माता अच्छी गुणवत्ता के लकड़ी के हस्तशिल्प तैयार कर सकें।


सहारनपुर से लकड़ी के हस्तशिल्प की अच्छी मांग को देखते हुए और वर्तमान में सामान्य सुविधा केंद्र में बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता न होने के कारण नई आधुनिक तकनीकी मशीनों के साथ वुड सीजनिंग के नए कक्ष स्थापित करने का फैसला किया गया। कुमार ने कहा कि इसलिए वुड सीजनिंग और केमिकल ट्रीटमेंट प्लांट को उन्नत करने के लिए कंप्रेसर के साथ न्यूमैटिक क्लैंपिंग कैरियर, डस्ट एक्सट्रैक्शन सिस्टम के साथ डबल साइड प्लानर, वाइड बेल्ट सैंडर, स्ट्रेट लाइन आरआईपी आरा, स्लाइडिंग कंपाउंड माइटर आरा, लकड़ी के लिए वैक्यूम प्रेशर इम्प्रेग्नेशन प्लांट, स्टीम बॉयलर और सीजनिंग किल्न स्थापित की गईं।


 राकेश कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि नई मशीनें लग जाने के बाद सामान्य सुविधा केंद्र का उत्पादन दोगुना हो जाएगा और इससे लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यातकों को बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और देश के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी। वर्ष 2017-18 में देश का लकड़ी का हस्तशिल्प निर्यात 4267.37 रुपये था जिसमें से 20 फीसदी योगदान सहारनपुर का है। 


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