भारत और जर्मनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप्स के साथ मिलकर करेंगे काम

By रविकांत पारीक
May 04, 2022, Updated on : Wed May 04 2022 06:01:39 GMT+0000
भारत और जर्मनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप्स के साथ मिलकर करेंगे काम
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, साइबर फिजिकल सिस्टम, क्वांटम टेक्नोलॉजीज, फ्यूचर मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल, डीप ओशन रिसर्च जैसे अग्रणी क्षेत्र भारत और जर्मनी के बीच साझेदारी के नए क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
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जर्मन शिक्षा और अनुसंधान मंत्री बेटिना स्टार्क-वाट्जिंगर के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप्स के साथ-साथ एआई अनुसंधान और स्थिरता एवं स्वास्थ्य देखभाल में इसके अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं।


दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक-साथ काम करने की काफी संभावना है, जिसके लिए दोनों पक्षों के विशेषज्ञ पहले ही मिल चुके हैं। इसके लिए शोधकर्ताओं और उद्योग से प्रस्ताव आमंत्रित करते हुए एक इंडो-जर्मन प्रस्ताव की आवश्यकता पेश की जाएगी।


डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि नवंबर 2019 में, चांसलर मर्केल के दिल्ली दौरे के दौरान, जर्मनी और भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम बनाने पर सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने उच्च शिक्षा में इंडो-जर्मन भागीदारी को अगले चार वर्षों के लिए बढ़ाने का भी फैसला किया, जिसमें प्रत्येक का योगदान 35 लाख यूरो था।

जर्मन शिक्षा और अनुसंधान मंत्री बेटिना स्टार्क-वाट्जिंगर के साथ केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

जर्मन शिक्षा और अनुसंधान मंत्री बेटिना स्टार्क-वाट्जिंगर के साथ केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत और जर्मनी ने दोनों देशों के जारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग पर संतोष व्यक्त किया है जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों का एक रणनीतिक स्तंभ है। दोनों देशों के अकादमिक, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत संबंध हैं और वे हमारी रणनीतिक अनुसंधान तथा विकास साझेदारी में उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहे हैं।


बर्लिन में अपने आधिकारिक कार्यक्रम के तीसरे दिन, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों देश अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, साइबर फिजिकल सिस्टम, क्वांटम टेक्नोलॉजीज, फ्यूचर मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल, डीप ओशन सहित विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में अनुसंधान और संयुक्त सहयोग विकसित करने का प्रस्ताव। दोनों देशों ने सस्टेनेबिलिटी अर्थात टिकाऊ विकास और हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे की क्षमता का आकलन करना शुरू कर दिया है।


दोनों मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान प्रशिक्षण समूहों (IRTG) कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार और जर्मन रिसर्च फाउंडेशन (DFG) के बीच हाल ही में संपन्न हुए समझौता ज्ञापन पर संतोष व्यक्त किया जिससे PhD कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय और जर्मन छात्रों के प्रशिक्षण को लक्षित क्षमता निर्माण की दिशा में सहयोग को और प्रोत्साहन मिलेगा। इस कार्यक्रम के तहत भारतीय और जर्मन अनुसंधान समूहों से प्रस्ताव आमंत्रित करने की अपील पहले ही की जा चुकी है।

जर्मन शिक्षा और अनुसंधान मंत्री बेटिना स्टार्क-वाट्जिंगर के साथ केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत और जर्मनी के मंत्री और अन्य सदस्य

दोनों मंत्रियों ने इस बात पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि हाल ही में विज्ञान और इंजीनियरिंग में मानव क्षमता विकास के लिए कई पहलें की गई हैं, जिनमें विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान में महिला भागीदारी (WISER) शामिल है। इससे जारी S&T परियोजनाओं और पेयर्ड अर्ली कैरियर फेलोशिप में महिला शोधकर्ताओं के पार्श्व प्रवेश की सुविधा मिलेगी जो दोनों पक्षों के युवा शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान के साथ भारत-जर्मन S&T सहयोग के लिए एक समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा। औद्योगिक फेलोशिप का उद्देश्‍य जर्मन औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में युवा भारतीय शोधकर्ताओं को अनुभव देना था।


डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार नवाचार को काफी महत्व देती है। वर्तमान सरकार नवाचार, उद्यमिता और आईपी जेनरेशन की मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा देने पर बल देती है। भारतीय नवोन्मेष प्रणाली सामर्थ्य और पहुंच पर ध्यान देने के साथ प्रक्रिया संचालित होने के बजाय ज्यादातर उद्देश्य से प्रेरित है।


बेटिना स्टार्क-वाट्जिंगर ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में भागीदारी करके द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग को और मजबूत करने के विचार का समर्थन किया, जहां जर्मनी और भारत दोनों के पास एक साथ काम करने और दो समाजों की सेवा करने की शक्ति है।

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