एक प्रोडक्ट से की थी शुरुआत, आप भी जानें कैसे कोयंबटूर स्थित इस उद्यमी ने खड़ी की 120 से अधिक SKU वाली FMCG कंपनी

By Bhavya Kaushal
August 17, 2021, Updated on : Mon Aug 23 2021 06:26:46 GMT+0000
एक प्रोडक्ट से की थी शुरुआत, आप भी जानें कैसे कोयंबटूर स्थित इस उद्यमी ने खड़ी की 120 से अधिक SKU वाली FMCG कंपनी
तमिलारासन प्रवीण को जब महसूस हुआ कि भारत में डिस्पोजेबल टॉयलेट सीट कवर की मांग है तो उन्होंने 2016 में सौबर इंटेक (Sauber Intech) की शुरुआत की। आज सौबर एक एफएमसीजी कंपनी बन गई है जिसके तहत नौ ब्रांड हैं।
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

"IBEF की एक रिपोर्ट के अनुसार, फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर भारत का चौथा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जिसमें घरेलू और व्यक्तिगत देखभाल का देश के FMCG की बिक्री में 50 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, बाजार में आईटीसी, टाटा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले और ब्रिटानिया जैसे कई प्रमुख खिलाड़ियों के साथ-साथ अपेक्षाकृत छोटे खिलाड़ियों की भीड़ है।"

कई वर्षों तक, तमिलारासन प्रवीण ने जर्मनी में एक टेक्सटाइल टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में काम किया। 2015 में भारत वापस आने के बाद, वह अपने कोयंबटूर स्थित पारिवारिक व्यवसाय, थॉमसन ग्रुप (उनके पिता द्वारा शुरू किया गया) में शामिल हो गए, जिसमें स्टील, आयरन और टेक्सटाइल के क्षेत्र में कई काम होते हैं।


हालांकि, जर्मनी में जिन चीजों को प्रवीण ने बहुत ही खास पाया उनमें से एक डिस्पोजेबल टॉयलेट सीट कवर थी। वह योरस्टोरी के साथ बातचीत में याद करते हुए कहते हैं, "मैंने महसूस किया कि भारत में भी इन सीट कवर की आवश्यकता थी।" चूंकि ज्यादा कंपनियां इस प्रोडक्ट को नहीं बना रहीं थीं, इसलिए उन्होंने इसमें गोता लगाने का फैसला किया।


2016 में, उन्होंने एक अलग वर्टिकल - सौबर इंटेक के तहत भारतीय बाजार के लिए टॉयलेट सीट कवर बनाना शुरू किया। प्लांट और मशीनरी में करीब 25 लाख रुपये का निवेश किया गया था। प्रवीण का कहना है कि इसके अलावा वाहन खरीदने/किराए पर लेने के लिए भी कर्ज लिया गया था। कुल मिलाकर, कारोबार शुरू करने के लिए कुल 1.5 करोड़ रुपये की पूंजी लगाई गई थी। आज सौबर एक फुल एफएमसीजी कंपनी के रूप में विकसित हो गई है, जिसके नौ ब्रांड हैं - कॉम्फी केयर, कैरी केयर, प्राइमा डोना, मिल्ली बेली, विप्पी, कोको एलिक्सिर, करुक मुरुक, जेड और डेसी गैजी।


इसके अलावा, 2016 में केवल एक प्रोडक्ट - गैर-बुनी फाइबर टॉयलेट सीट कवर - लॉन्च करने से लेकर आज, कंपनी के पास 120 से अधिक SKU हैं, जिनमें साबुन, डिटर्जेंट, स्नैक्स, पेय पदार्थ, टिश्यूज, खाद्य तेल, रेडी-टू-ईट एंड ड्रिंक आदि जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं।

भीड़ भरे बाजार में प्रवेश करना

IBEF की एक रिपोर्ट के अनुसार, फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर भारत का चौथा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जिसमें घरेलू और व्यक्तिगत देखभाल का देश के FMCG की बिक्री में 50 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, बाजार में आईटीसी, टाटा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले और ब्रिटानिया जैसे कई प्रमुख खिलाड़ियों के साथ-साथ अपेक्षाकृत छोटे खिलाड़ियों की भीड़ है।


प्रवीण का कहना है कि भले ही बाजार में भीड़-भाड़ हो, फिर भी इसमें काफी संभावनाएं हैं। प्रवीण कहते हैं, ''मुझे लगता है कि नए ब्रांडों के आने के लिए काफी जगह है। प्रवीण को बाजार का सर्वेक्षण करने और पहला प्रोडक्ट लॉन्च करने में लगभग आठ महीने लगे। वह कहते हैं कि वह आपूर्तिकर्ताओं, वितरकों और सुपर स्टॉकर्स का एक मजबूत नेटवर्क बनाने के लिए देश भर में यात्रा करते थे।


कंपनी ने ग्राहकों और वितरकों के साथ अधिक निकटता से बातचीत करने के लिए केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के लगभग 16 शहरों में कई ब्रांच ऑफिस खोले। प्रवीण ने बताया कि कंपनी शुरू से ही ऑफलाइन माध्यम से बिक्री पर ध्यान केंद्रित कर रही है, भले ही यह अमेजॉन जैसे ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मौजूद है।

f

उत्पाद को शुरू से अंत तक मैप करना

प्रवीण का कहना है कि एफएमसीजी बाजार में जगह बनाने की कुंजी आधुनिक खुदरा स्टोरों के माध्यम से बिक्री करना है। वे कहते हैं, "वितरक अपनी दुकानों के पूरे नेटवर्क में उत्पाद को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे, साथ ही वहां भी जहां आपके लक्षित ग्राहक आ भी सकते हैं या नहीं भी।"


उनका कहना है कि दुकानों का चयन बहुत महत्वपूर्ण है, अन्यथा "स्टॉक वापस होने पर एक उद्यमी बहुत निराश महसूस करेगा।" आज भी, प्रवीण कहते हैं कि सौबर एक स्टोर के माध्यम से बेचने के लिए सहमत होने से पहले ग्राहक आधार और ग्राहकों की संख्या का विश्लेषण करता है। वे कहते हैं, "मुझे लगता है कि यह हमारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसे हमने समय के साथ सीखा भी है।"


Sauber Intech दक्षिण भारत में तीन लाख आउटलेट्स के नेटवर्क में बिक्री करती है, और ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से अखिल भारतीय बिक्री करती है। प्रवीण बताते हैं कि 90 प्रतिशत बिक्री ऑफलाइन चैनलों से होती है।

बोर्ड पर अधिक ब्रांड को जोड़ना

जहां सौबर ने अपने ब्रांड Cari Care, Milly Belly, और Wippy को इन-हाउस विकसित किया, वहीं अन्य ब्रांड मदुरै, नागरकोइल, चेन्नई और अन्य जगहों पर फैले निर्माता हैं जो Sauber Intech के माध्यम से बेचते हैं।


प्रवीण बताते हैं, ''हम उनके प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग में मदद करते हैं क्योंकि वे बड़े ब्रांडों के साथ काम कर रहे हैं और उनके लिए व्हाइट लेबल प्रोडक्ट तैयार करते हैं।" वे कहते हैं कि सौबर इन निर्माताओं से मार्केटिंग शुल्क लेता है और उन्हें Sauber Intech की छतरी के नीचे बेचने की अनुमति देता है।


कोयंबटूर में ही सौबर की अपनी तीन इकाइयाँ हैं। Sauber ने 2016 में टॉयलेट सीट कवर के साथ शुरुआत की और 2017 में डिस्पोजेबल प्रोडक्ट्स की कैटेगरी को पेश किया। 2018 से, इसने अन्य प्रोडक्ट्स कैटेगरी जैसे कि स्नैक्स, रेडी-टू-ईट फूड, और बहुत कुछ शामिल करना शुरू कर दिया।

COVID-19 और आगे का रास्ता

मार्च 2020 में कोरोनावायरस महामारी के आगमन ने दुनिया भर के उद्यमियों के बीच अत्यधिक अनिश्चितता पैदा कर दी, और सौबर भी इससे अछूता नहीं रहा। प्रवीण का कहना है कि टीम के भीतर भी 'डर और दहशत' थी।


वे कहते हैं, "शुरुआती महीनों में यह बहुत मुश्किल स्थिति थी क्योंकि हमें बहुत सारे स्टॉक को खत्म करना पड़ा क्योंकि वे एक्सपायरी के करीब थे।" उनका कहना है कि कंपनी के जीवित रहने का कारण यह था कि उसके पास एक विविध पोर्टफोलियो था। कंपनी ने उसी दौरान सैनिटाइटर बेचना भी शुरू किया, जिससे नुकसान की भरपाई करने और इसे बनाए रखने में मदद मिली।


प्रवीण कहते हैं, “सौभाग्य से, हम महामारी के आने से ठीक पहले सैनिटाइज़र पेश करने की योजना बना रहे थे। समय ने हमारी मदद की क्योंकि उसके बाद सैनिटाइटर की मांग तेजी से बढ़ी।”


हालांकि संस्थापक ने राजस्व का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनका कहना है कि Sauber Intech की अगले 12-18 महीनों में कई योजनाएं हैं। नए उत्पादों और श्रेणियों को पेश करने के अलावा, यह ग्रामीण क्षेत्रों सहित उन स्थानों में भी गहराई से प्रवेश करने की योजना बना रहा है, जहां यह मौजूद है। प्रवीण का कहना है कि वह इसे ऑफलाइन चैनल के जरिए ही करना चाहते हैं।


वे कहते हैं, “हम ऑनलाइन बिक्री को बहुत फायदेमंद नहीं पाते हैं। ऑनलाइन बिक्री तभी लाभदायक है जब न्यूनतम ऑर्डर कम से कम 300 रुपये का हो।”


Edited by Ranjana Tripathi

Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close