भारत की पहली महिला वर्ल्ड रैपिड चैंपियन बनीं शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हंपी

भारत की पहली महिला वर्ल्ड रैपिड चैंपियन बनीं शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हंपी

Monday December 30, 2019,

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दो साल पहले प्रेगनेंट होने पर शतरंज से दो साल का ब्रेक लेकर पुनः लौटीं कोनेरू हंपी वर्ष 2017 में चैंपियन बने विश्वनाथन आनंद के बाद रैपिड वर्ल्ड टाइटल जीतने वाली दूसरी भारतीय बनकर अपनी शानदार वापसी की है। उन्होंने मॉस्को में चीन की लेई तिंगजी को हराकर फीडे वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप जीती है।


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शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हंपी (फोटो: सोशल मीडिया)



कोनेरू हंपी शतरंज में वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप जीतकर भारत की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी बन गई हैं। उनके प्रोफेसर पिता भी शंतरंज के खिलाड़ी रहे हैं। बेटी के शतरंज खिलाड़ी बनने का सपना पूरा करने के लिए अपनी नौकरी छोड़कर वह हंपी को ट्रेनिंग देने लगे थे। हंपी ने उस समय एक सपना देखा था कि वह अपने पिता को शतरंज में हराना चाहती हैं।


वर्तमान में वह ओएनजीसी में चीफ मैनेजर हैं जबकि उनके पति सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हैं। दो साल पहले प्रेगनेंट होने पर उन्होंने शतरंज से ब्रेक ले लिया था। हंपी जब ब्रेक पर थीं, तब उन्होंने कहा था कि शतरंज के बिना उनकी जिंदगी ज्यादा हेक्टिक है। वे जल्द से जल्द वापसी चाहती हैं। उन्होंने पिछले साल भी फीडे महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था।


अब वर्ल्ड चैंपियन बनकर उन्होंने शानदार वापसी की है। अब वर्ष 2017 में चैंपियन बने विश्वनाथन आनंद के बाद हंपी रैपिड वर्ल्ड टाइटल जीतने वाली दूसरी भारतीय बन गई हैं।


हंपी के शतरंज खिलाड़ी पिता अशोक कोनेरू ने उनकी असाधारण प्रतिभा और शतरंज में दिलचस्पी को उनकी पांच साल की उम्र में ही पहचान लिया था। बेटी के सपने पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। हंपी ने 13 साल की उम्र में नेशनल चिल्ड्रंस चैंपियनशिप में अंडर-14 बॉयज टाइटल जीता था।





अब उन्होंने मॉस्को के लुझनिकी स्टेडियम के वीआईपी जोन में चीन की 22 साल की लेई तिंगजी को हराकर फीडे वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप जीती है। हंपी ने 12 राउंड के रैपिड इवेंट में 7 राउंड जीते। उन्होंने चीन की खिलाड़ी को प्लेऑफ में हराकर गोल्ड जीता। भारत की एक अन्य ग्रैंड मास्टर द्रोणावल्ली हरिका 13वें नंबर पर रहीं। 


हंपी सिर्फ भारतीय शतरंज नहीं बल्कि पूरी दुनिया में चर्चित नाम हैं। इससे पहले भी 32 साल की चेस ग्रैंडमास्टर कोनेरू हंपी के नाम कई चैंपियनशिप खिताब रहे हैं, मसलन, 1997 में वर्ल्ड अंडर-10 चैंपियन, 1998 में वर्ल्ड गर्ल्स अंडर-10 और अंडर-12 चैंपियन, 1999 में एशिया की सबसे युवा महिला इंटरनेशनल मास्टर, 2000 में एशियन गर्ल्स अंडर-20 चैंपियन, 2001 में वर्ल्ड गर्ल्स अंडर-14 चैंपियन, 2001 में वर्ल्ड गर्ल्स अंडर-20 चैंपियन, 2000 में ब्रिटिश लेडीज चैंपियनशिप जीतने वाली सबसे युवा, 2002 में एक बार फिर ब्रिटिश लेडीज टाइटल, 2001 में एशिया की सबसे युवा महिला ग्रैंड मास्टर, 2002 में 15 साल 1 महीने, 27 दिन की उम्र में सबसे युवा ग्रैंड मास्टर चैंपियन, 2003 में अर्जुन अवॉर्ड, 2007 में पद्मश्री, 2019 में वर्ल्ड रैपिड चैंपियन आदि।


उनके पिता अशोक कोनेरू बताते हैं कि हंपी ने 12 की उम्र में इंटरनेशनल मास्टर और 15 की उम्र में ग्रैंड मास्टर टाइटल जीत लिया था। 2009 में 2623 ईएलओ रेटिंग तक पहुंच गईं। 2014 में शादी की और दो साल पहले प्रेगनेंट होने पर ब्रेक लिया था। पिछले साल ओलिंपियाड के लिए उन्होंने वापसी की थी और वापसी के एक साल बाद वर्ल्ड चैंपियन बन गईं।