भारत की GDP घटकर 7.5 प्रतिशत रह सकती है: वर्ल्ड बैंक

भारत की GDP घटकर 7.5 प्रतिशत रह सकती है: वर्ल्ड बैंक

Thursday June 09, 2022,

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विश्व बैंक (World Bank) ने मंगलवार को बढ़ती मुद्रास्फीति (inflation), सप्लाई-चेन में रुकावट और रूस-यूक्रेन संघर्ष के हानिकारक प्रभाव का हवाला देते हुए, अप्रैल में अनुमानित 8% से भारत के लिए अपने वित्त वर्ष 2023 विकास पूर्वानुमान को घटाकर 7.5% कर दिया.

इसके साथ ही वर्ल्ड बैंक ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से दूसरी बार भारत के विकास अनुमान को संशोधित किया है. इससे पहले अप्रैल में इस पूर्वानुमान में 70 आधार अंकों की कटौती की थी. वित्त वर्ष 2022 में देश की जीडीपी 8.7% बढ़ी.

ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स के अपने ताजा अंक में, वर्ल्ड बैंक ने भारत की वित्त वर्ष 2024 की वृद्धि 7.1% आंकी है, जो अप्रैल के पूर्वानुमान से 30 bps ऊपर है, लेकिन चालू वित्त वर्ष के लिए 7.5% की ताजा अनुमानित वृद्धि की तुलना में धीमी है.

इसने 2022 के लिए अपने वैश्विक विकास अनुमान को 120 bps से घटाकर केवल 2.9% कर दिया है. वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी कि यूक्रेन संघर्ष ने महामारी के बाद आग में घी डालने जैसा काम किया है और कई देश संभावित रूप से मंदी का सामना कर सकते हैं.

इसके साथ, वर्ल्ड बैंक कई एजेंसियों में शामिल हो गया, जिन्होंने हाल के महीनों में देश के लिए अपने विकास अनुमानों को कम कर दिया है. यूक्रेन युद्ध के बाद वस्तुओं, विशेष रूप से तेल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि हुई है. मूडीज ने हाल ही में कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए जीडीपी अनुमान को 9.1% से घटाकर 8.8% कर दिया है. S&P ने अपने वित्त वर्ष 2023 के अनुमान को 7.8% से घटाकर 7.3% कर दिया. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अप्रैल में अपने भारत के पूर्वानुमान को 9% से घटाकर 8.2% कर दिया था.

बैंक ने कहा कि भारत में विकास 2022 की पहली छमाही में धीमा हो गया, क्योंकि कोविड के बढ़ते मामलों का असर आर्थिक गतिविधियों पर दिखा. वहीं, सप्लाई-चेन और यूक्रेन युद्ध दोनों के चलते अलग-अलग स्तर पर देश को खामियाजा उठाना पड़ा. बढ़ते मुद्रास्फीति के दबाव से सुधार को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है. खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में लगभग आठ साल के उच्च स्तर 7.79% पर पहुंच गई, जबकि थोक मूल्य मुद्रास्फीति 30 साल के उच्च स्तर 15.08% पर पहुंच गई.

जबकि बेरोजगारी दर पूर्व-महामारी के स्तर तक गिर गई है, श्रम बल की भागीदारी दर पूर्व-कोविड स्तर से नीचे बनी हुई है और श्रमिक कम-भुगतान वाली नौकरियां करने पर मजबूर हो गए हैं.

हालांकि हमारी सरकार और RBI हालातों पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं और पुर-ज़ोर कोशिश कर रहे हैं.