InTranSE-II प्रोग्राम के तहत लॉन्च किए गए भारतीय यातायात परिदृश्य के लिये स्वदेशी इंटेलीजेंट ट्रांस्पोर्ट सिस्टम्स सॉल्यूशंस

By रविकांत पारीक
April 12, 2022, Updated on : Tue Apr 12 2022 06:04:57 GMT+0000
InTranSE-II प्रोग्राम के तहत लॉन्च किए गए भारतीय यातायात परिदृश्य के लिये स्वदेशी इंटेलीजेंट ट्रांस्पोर्ट सिस्टम्स सॉल्यूशंस
इस प्रोडक्ट को प्रगत संगणन विकास केंद्र (CDAC) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT-M) की संयुक्त पहल के जरिये विकसित किया गया है। महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने परियोजना के लिये औद्योगिक सहयोग दिया।
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इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इंडियन सिटीज फेज-II के लिये इंटेलीजेंट ट्रांस्पोर्ट सिस्टम्स (ITS) के तहत स्वदेशी ऑनबोर्ड ड्राइवर असिस्टेंस एंड वार्निंग सिस्टम (ODAWS), बस सिग्नल सिस्टम तथा कॉमन स्मार्ट आई-ओटी कनेक्टिव (CoSMiC) सॉफ्टवेयर का शुभारंभ कर दिया गया है।


इस प्रोडक्ट को इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार ने जारी किया। इस अवसर पर मंत्रालय के जीसी (इलेक्ट्रॉनिक R&D) अरविन्द कुमार, अमेरिका के पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के डॉ. सतीस वी. उक्कूसूरी, InTranSE कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. एचपी किन्चा, ESDA की विभागाध्यक्ष और साइंटिस्ट-‘जी’ सुनीता वर्मा तथा मंत्रालय के साइंटिस्ट ‘डी’ कमलेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस प्रोडक्ट को प्रगत संगणन विकास केंद्र (CDAC) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT-M) की संयुक्त पहल के जरिये विकसित किया गया है। महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने परियोजना के लिये औद्योगिक सहयोग दिया।

Indigenous Intelligent Transportation Systems (ITS) Solutions for Indian Traffic Scenario  launched under InTranSE -II Program

सांकेतिक चित्र

ऑनबोर्ड ड्राइवर असिस्टेंस एंड वार्निंग सिस्टम (ODAWS): विकसित राजमार्ग अवसंरचना और वाहनों की अधिकता के साथ-साथ सड़कों पर गति में इजाफा हुआ है, जिसके कारण सुरक्षा की चिंता भी बढ़ गई है। केंद्रीय सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार दुर्घटना के लगभग 84 प्रतिशत मामले “चालक की गलती” से होते हैं। इसलिये वाहन चालन में गलतियां न्यूनतम करने के लिये चालकों की सहायता तथा चेतावनी के सम्बंध में सक्षम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल महत्त्वपूर्ण हो जाता है।


ODAWS में चालक के नजदीक आने की निगरानी के लिये वाहन-आधारित सेंसर लगाने का प्रावधान है। साथ ही चालक की सहायता के लिये वाहन के आसपास सुनने और नजर आने वाले अलर्ट भी इसमें शामिल हैं। परियोजना में नौवहन इकाई, चालक सहायता केंद्र और एमएम-वेव रडार सेंसर जैसे उपायों का विकास किया जा रहा है। आसपास के वाहनों की स्थिति और उनकी दशा के बारे में जानने के लिये एमएम-सेंसर का इस्तेमाल होता है। नौवहन सेंसर से वाहन की सटीक जियो-स्पेशल स्थिति पता चलेगी। साथ ही वाहन किस तरह चलाया जा रहा है, इसके बारे में भी पता चलेगा। ODAWS एलगॉरिद्म को सेंसर के डेटा को समझने में इस्तेमाल किया जाता है और इनसे वाहन चालक को वास्तविक समय में सूचना दी जाती है, जिससे सड़क सुरक्षा बढ़ जाती है।


बस सिग्नल प्रायोरिटी सिस्टमः सार्वजनिक यातायात प्रणाली का कम भरोसेमंद होने के कारण लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। इसमें सुधार लाना बहुत जरूरी है, ताकि लोग सार्वजनिक यातायात के प्रति आकर्षित हों। इस तरह ज्यादा वहनीय यातायात समाधान होगा। शहरी इलाकों में सार्वजनिक बसों के विलंब का प्रमुख कारण सिग्नल वाले अति व्यस्त चौराहे होते हैं।

Indigenous Intelligent Transportation Systems (ITS) Solutions for Indian Traffic Scenario  launched under InTranSE -II Program

सांकेतिक चित्र

बस सिग्नल प्रायोरिटी सिस्टम परिचालन रणनीति है, जो सामान्य यातायात सिग्नल संचालन को बेहतर बनाने के लिये है, ताकि सार्वजनिक वाहनों को सिग्नल द्वारा नियंत्रित चौराहों पर आराम से निकाला जा सके। आपातकालीन वाहनों के लिये तुरंत प्राथमिकता के विपरीत, यहां शर्त आधारित प्राथमिकता दी जाती है। यह तभी दी जाती है, जब सभी वाहनों के लिये विलंब में कटौती हो रही हो। यह विकसित प्रणाली सार्वजनिक बसों को प्राथमिकता देकर अन्य वाहनों के विलंब में कमी लायेगी। इसके लिये हरी बत्ती के अंतराल को बढ़ाया जायेगा और लाल बत्ती के अंतराल को कम किया जायेगा। यह प्रणाली उस समय काम करना शुरू कर देगी, जब किसी चौराहे पर वाहन पहुंच रहे होंगे।


कॉमन स्मार्ट आई-ओटी कनेक्टिव (CoSMiC): यह मिडिलवेयर सॉफ्टवेयर है, जो oneM2M आधारित वैश्विक मानक का पालन करते हुये आईओटी की तैनाती करता है। इससे उपयोगकर्ताओं तथा विभिन्न क्षेत्रों के सेवा प्रदाताओं को एक सिरे से दूसरे सिरे तक संचार के मामले में मुक्त इंटरफेस प्रदान करता है। ये सभी सेवा प्रदाता oneM2M मानक का पालन करते हैं। इसे ध्यान में रखकर कॉस्मिक सामान्य सेवा को किसी भी विक्रेता के इंटरफेस के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके विशिष्ट मानक हैं। इसका इस्तेमाल स्मार्ट सिटी डैशबोर्ड के संचालन को बढ़ाकर किये जाने के लिये है।


एक निश्चित केंद्र पर आधारित यह परिचालन व्यवस्था और आंकड़ों का आदान-प्रदान आईओटी उपकरणों तथा एप्लीकेशनों के बीच होता है, ताकि वेंडर लॉक-इन को टाला जा सके। CoSMiC में 12 सामान्य सेवायें शामिल हैं – पंजीकरण, खोज, सुरक्षा, सामूहिक प्रबंधन, डेटा प्रबंधन, डेटा प्रबंधन एवं भंडारण, सब्सक्रिप्शन एवं सूचना, उपकरण प्रबंधन, एप्लीकेशन एवं सेवा प्रबंधन, संचार प्रबंधन, आपूर्ति, नेटवर्क सेवा, लोकेशन, सेवा शुल्क और लेखा परीक्षण।


कॉस्मिक प्लेटफॉर्म से कनेक्टिंग non-oneM2M (NoDN) उपकरण या तीसरे पक्ष के एप्लीकेशन के लिये इंटरवर्किंग प्रॉक्सी एंटिटी (IPE) API मिलता है, ताकि वे CoSMiC प्लेटफॉर्म से जुड़ सकें। CoSMiC एक डैशबोर्ड पेज भी मुहैया कराता है, जहां आईओटी इकाइयों, उत्पादों, एप्लीकेशनों और जियोग्राफीकल इंफर्मेशन सिस्टम (GIS) मानचित्र में प्रत्यक्ष डेटा दिखता है। चार्टों और रिपोर्टों के लिये दूसरे क्रम के आंकड़े भी उपलब्ध हैं। CoSMiC में आईओटी उपकरणों तथा एप्लीकेशनों के निर्बाध संपर्क के लिये आमूल समाधान भी मिलता है।


Edited by Ranjana Tripathi