शहर से सिंगल यूज प्लास्टिक प्रोडक्ट को खत्म करने के लिए तांबे को अपना रहा है इंदौर

By yourstory हिन्दी
September 09, 2019, Updated on : Tue Sep 10 2019 11:08:03 GMT+0000
शहर से सिंगल यूज प्लास्टिक प्रोडक्ट को खत्म करने के लिए तांबे को अपना रहा है इंदौर
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25 अगस्त को अपने मन की बात संबोधन के दौरान, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक नया ‘जन-आंदोलन’ शुरू करने की बात कही। इस दौरान उन्होंने देशवासियों से सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल नहीं करने की अपील की। प्रधान मंत्री द्वारा यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब प्लास्टिक कचरे ने पर्यावरण और जैव विविधता पर गंभीर असर डाला है।


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केंद्रीय प्रदूषण समिति बोर्ड, (CPCB) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 62 मिलियन टन नगर निगम का कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से आठ प्रतिशत प्लास्टिक कचरा होता है। इससे भी बुरा यह है कि इसका कुछ अंश ही है जिसे ठिकाने लगाया जाता है।


इस मुद्दे से निपटने के लिए, इंदौर नगर निगम सभी प्लास्टिक की बोतलों और सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं को सरकारी कार्यालयों, निजी कार्यों और सार्वजनिक स्थानों पर पारंपरिक बर्तनों और तांबे के लोटों के साथ बदल रहा है। शहर के कई संस्थान ऐसे हैं जहां पीने के लिए पानी प्लास्टिक की बोतलों की बजाय तांबे के लोटों में दिया जाने लगा है।


NDTV से बात करते हुए, स्वच्छ भारत अभियान के इंदौर नगर निगम के सलाहकार, असद वारसी ने कहा,

“हम तांबे के 'लोटे, स्टील या कांच के गिलास में पानी प्रदान करते हैं। हम धातु या कांच की प्लेटों में स्नैक्स परोसते हैं। हमने प्रमुख सरकारी कार्यालयों में प्लास्टिक की पानी की बोतलों, कपों और प्लेटों पर प्रतिबंध लगा दिया है।”


सभी प्लास्टिक आइटम जैसे फोर्क, चम्मच और कप पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। तांबे के बर्तनों को मेंटेन रखने के लिए, चपरासी और सफाई कर्मचारियों को स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है और आगे, शहर के प्रमुख सरकारी कार्यालयों और बाजारों में एक स्वचालित डिशवॉशर स्थापित किया जाएगा। ये मशीनें केवल 20 प्रतिशत पानी का उपयोग करेंगी जो कि एक चालू नल के तहत इस्तेमाल किया जा रहा है।


असद आगे कहते हैं,

"हम ऐसे बाजारों में भी बड़े स्वचालित डिशवॉशर लगाने की योजना बना रहे हैं जहां फूड शॉप्स हैं, ताकि हम जीरो-वेस्ट मार्केट (zero-waste markets) का लक्ष्य प्राप्त कर सकें। हमने तीन एजेंसियों को चुना है जो कुछ पहले से तय किए गए स्थानों पर डिशवॉशर स्थापित करने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा वे न्यूनतम सर्विस फीस पर, बर्तन एकत्र करेंगे, उन्हें धोएंगे, संबंधित दुकानों और कार्यालयों में वापस देकर आएंगे।"
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बर्तन बैंक

इस पहल को एक कदम आगे बढ़ाते हुए, नगर निगम ने 'बर्तन बैंक' भी शुरू की है, जहाँ आप एक टोल-फ्री नंबर, 0731-4987161 डायल करके मुफ्त में बर्तन प्राप्त कर सकते हैं। जो व्यक्ति अपने आयोजनों में डिस्पोजल बर्तनों का उपयोग नहीं करता, उसे इस बैंक से स्टील के बर्तन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनका उन्हें कोई किराया नहीं देना होता है। डीबी पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ निजी कंपनियों की सीएसआर पहल की मदद से, प्रारंभिक चरण में, निगम ने लगभग 500 लोगों के लिए बर्तनों की व्यवस्था की है।


असद कहते हैं,

“हमने अब तक दो 'बर्तन बैंक’ स्थापित किए हैं, एक-एक बंगाली स्क्वायर और दूसरा सुखलिया में। निगम शहर में सामान्य स्थानों पर 17 और स्थापित करने की प्रक्रिया में है।”


प्रत्येक बैंक में 3,000 बर्तन हैं। इन्हें शहर का कोई भी व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि इसके लिए किसी व्यक्ति को एडवांस में बुकिंग करने के लिए कॉल करना होता है। इसके अलावा, उसे बर्तन ले जाने और आयोजन के बाद उसे निगम के कार्यालय में वापस करना होगा।


निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए बर्तनों में प्लेट, पानी के गिलास और कुछ अन्य सामान शामिल हैं। पहल पर NDTV से बात करते हुए, बर्तन बैंक से बर्तन लेने वाले इंदौर के नंद नगर निवासी विशाल कुलकर्णी ने कहा,

“यह नगर निगम द्वारा एक बहुत अच्छी पहल है। यह न केवल उस कचरे को कम करने के लिए है जो डिस्पोजेबल कटलरी द्वारा उत्पन्न होता है बल्कि यूजर्स के लिए काफी सस्ता भी है। मैंने घर में पार्टी के लिए एक बार 'बर्तन बैंक’ के बर्तनों का उपयोग किया है। मैं उन्हें फिर से उपयोग करूंगा और दूसरों को डिस्पोजेबल प्लेट, पानी के गिलास और कटलरी खरीदने के बजाय इनका उपयोग करने की सलाह दूंगा।"