तो क्या वाकई EPFO का पैसा अडानी ग्रुप में लगा है? वायरल खबरों के बीच जानिए हकीकत

बहस होने लगी है कि सरकार ने लोगों की मेहनत की कमाई को अडानी ग्रुप में क्यों लगाया? खबरें चल रही हैं कि अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में पैसा लगाया गया है. ईपीएफओ ने तमाम मौकों पर साफ किया है कि उसकी तरफ से ईटीएफ में निवेश किया जाता है.

तो क्या वाकई EPFO का पैसा अडानी ग्रुप में लगा है? वायरल खबरों के बीच जानिए हकीकत

Tuesday March 28, 2023,

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हाइलाइट्स

बहस होने लगी है कि सरकार ने लोगों की मेहनत की कमाई को अडानी ग्रुप में क्यों लगाया?

खबरें चल रही हैं कि अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में पैसा लगाया गया है.

ईपीएफओ ने तमाम मौकों पर साफ किया है कि उसकी तरफ से ईटीएफ में निवेश किया जाता है.

ईपीएफओ ने साफ किया है कि उसकी तरफ से किसी भी इंडिविजुअल स्टॉक में पैसे नहीं लगाए गए हैं.

हाल ही में एक खबर वायरल होनी शुरू हुई कि ईपीएफओ (EPFO) ने अडानी ग्रुप (Adani Group) के दो शेयरों में भारी रकम निवेश की हुई है. यह खबर देखते ही देखते वायरल होना शुरू हो गई. हर तरफ लोग ये सवाल उठाने लगे कि आखिर गौतम अडानी (Gautam Adani) ग्रुप में सरकार लगातार निवेश क्यों किए जा रही है. कई जगह तो बहस ये भी चलने लगी कि सरकार ने लोगों की मेहनत की कमाई को अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में लगा दिया, जिससे अब भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. मार्च 2022 तक ईपीएफओ ने शेयर बाजार में करीब 1.57 लाख करोड़ रुपये निवेश किए हुए हैं. सवाल ये है कि क्या वाकई अडानी ग्रुप में ईपीएफओ ने पैसे लगाए हुए हैं?

क्या अडानी ग्रुप में ईपीएफओ ने लगाए हैं पैसे?

ईपीएफओ ने तमाम मौकों पर साफ किया है कि उसकी तरफ से जो निवेश किया जाता है वह ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में किया जाता है. इस बार भी जब अडानी ग्रुप में निवेश की खबर वायरल हुई तो ईपीएफओ ने द हिंदू मीडिया को बताया कि उसकी तरफ से पैसे ईटीएफ में लगाए गए हैं. ईपीएफओ ने साफ किया है कि उसकी तरफ से किसी भी इंडिविजुअल स्टॉक में पैसे नहीं लगाए गए हैं. ये पैसे सेंसेक्स और निफ्टी के ईटीएफ में 50-50 फीसदी के अनुपात में लगाए जाते हैं.

यहां पहले समझिए क्या होता है ईटीएफ

ईटीएफ एक ऐसा फंड है, जो स्टॉक मार्केट पर ट्रेड होता है. यानी इसे आप शेयर बाजार से ही खरीद सकते हैं और रीयल टाइम ट्रैक करते हुए जब चाहे तब बेच सकते हो. हालांकि, इसमें खरीदने-बेचने के लिए दोनों पार्टियों का होना जरूरी है. ना कि म्यूचुअल फंड की तरह, जिसमें आप जब चाहे तब अपना फंड बेच सकते हैं, आपको खरीदने वाली पार्टी की चिंता करने की जरूरत नहीं होती है. यह फंड भी आईपीओ की तरह पहले से तय होने के बाद आता है. यानी इसके लॉन्च होने के बाद इसे म्यूचुअल फंड की तरह बढ़ाया नहीं जा सकता है, सिर्फ इसकी कीमत बढ़ सकती है, इसके तहत जारी शेयरों की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकती. 99.99 फीसदी ईटीएफ फंड सीधे इंडेक्स में पैसे लगाते हैं, जैसे निफ्टी50, सेंसेक्स, बैंक निफ्टी, बीएसई मिडकैप या ऐसे ही अन्य इंडेक्स.

अडानी ग्रुप में नहीं लगे हैं ईपीएफओ के पैसे

ईपीएफओ से मिली जानकारी के अनुसार अडानी ग्रुप में लोगों की गाढ़ी कमाई का एक भी पैसा निवेश नहीं किया गया है. जैसा कि ईपीएफओ हर बार कहता रहा है कि उसकी तरफ से ईटीएफ के जरिए सेंसेक्स-निफ्टी में पैसे लगाए गए हैं तो यो कहना गलत होगा कि किसी इंडिविजुअल स्टॉक में ईपीएफओ का पैसा लगा है.

तो क्या अडानी के नुकसान से ईपीएफओ पर कोई असर नहीं हुआ?

ऐसा कहना गलत होगा. अडानी ग्रुप की दो कंपनियां- अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स- अभी निफ्टी 50 में लिस्टेड हैं. ऐसे में इन कंपनियों में अगर गिरावट आती है तो उसका काफी हद तक निफ्टी इंडेक्स पर असर पड़ता ही है. अडानी ग्रुप के खिलाफ तमाम खबरें सामने आईं तो बाकी तमाम शेयरों पर थोड़ा-बहुत असर देखने को मिला था, जिससे पूरा शेयर बाजार थोड़ा नीचे आया था, जिसमें सेंसेक्स भी रहा. यानी ईपीएफओ ने अडानी ग्रुप में तो पैसे नहीं लगाए हैं, लेकिन अडानी ग्रुप को हुए नुकसान की वजह से ईपीएफओ को भी थोड़ा नुकसान झेलना पड़ा.

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