JRD टाटा ने एक ट्रेनी की तरह की थी शुरुआत, फिर उसी कंपनी को बना दिया सबसे बड़े बिजनेस घरानों में से एक

By yourstory हिन्दी
November 29, 2022, Updated on : Mon Jan 30 2023 13:23:51 GMT+0000
JRD टाटा ने एक ट्रेनी की तरह की थी शुरुआत, फिर उसी कंपनी को बना दिया सबसे बड़े बिजनेस घरानों में से एक
1938 में JRD को टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाया गया और इसी के साथ वो टाटा संस के बोर्ड में जाने वाले सबसे युवा सदस्य थे. उन्होंने टाटा ग्रुप का एविएशन, केमिकल्स, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग, कॉस्मेटिक्स, बेवरेजेज, सॉफ्टवेयर सर्विसेज क्षेत्र में भी विस्तार किया.
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आज जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा या जे.आर.डी. टाटा की 29वीं पुण्यतिथि है. रतनजी टाटा वो भारतीय बिजनेसमैन थे और जिन्होंने देश में एविएशन क्षेत्र की तस्वीर बदल दी थी.


उन्होंने ही टाटा एयरलाइन्स की शुरुआत की थी जो बाद में जाकर एयर इंडिया के नाम से मशहूर हुई. इतना ही नहीं उन्होंने JRD टाटा ने टाटा ग्रुप को भी ऊंचे मुकामों पर पहुंचाया.


JRD टाटा का जन्म पेरिस में 1904 में हुआ था. उनके पिता रतनजी टाटा थे और मां का नाम सूनी था, जो एक फ्रांसीसी नागरिक थीं. JRD टाटा की पढ़ाई फ्रांस, जापान और इंग्लैंड में हुई. JRD ने एक साल तक फ्रांसीसी सेना में भी अपनी सेवा दी. 1929 में उन्होंने नागरिकता बदल ली और भारतीय नागरिक बन गए.

टाटा ग्रुप में JRD का योगदान

1868 में शुरू हुआ टाटा ग्रुप भारत के सबसे बड़े बिजनेस घरानों में से एक था. JRDटाटा में एक अनपेड अप्रेंटिस की तरह दिसंबर 1925 में दाखिल हुए. जहां जॉन पीटरसन उनके मेंटर बने जो स्कॉटिश नागरिक थे. JRD टाटा जब 22 साल के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई. उसके बाद JRD को टाटा संस के बोर्ड में शामिल कर दिया गया.


1938 में JRD को टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाया गया और वो टाटा संस के बोर्ड में जाने वाले सबसे युवा सदस्य थे. उन्होंने टाटा ग्रुप के साथ-साथ भारत के औद्योगीकरण की यात्रा को भी अपनी आंखों के सामने देखा.


JRD ने भारतीय कारोबारों में अपने ही परिवार के सदस्यों को रखने की आदत को बदलते हुए बाहर के लोगों को मौका देना शुरू किया. उन्होंने टाटा ग्रुप को बिजनेस फेडरेशन की तरह तैयार किया जहां आंत्रप्रेन्योरियल टैलेंट और एक्सपर्टीज को बढ़ावा दिया जाने लगा.JRD सबसे लंबे समय तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने रहे.

विजन और लीडरशिप

उन्होंने ग्रुप को एविएशन, केमिकल्स, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग, कॉस्मेटिक्स, बेवरेजेज, सॉफ्टवेयर सर्विसेज क्षेत्र में भी विस्तृत किया. उन्होंने टाटा मोटर्स को शुरू किया.


टाटा केमिकल्स के जरिए इंडिया को केमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया. डिजिटल दौर को देखते हुए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की नींव रखी, जो इंडिया की पहली सॉफ्टवेयर मेकर कंपनी थी.

सिविल एविएशन

JRD जब छोटे थे तब उन्होंने उड़ानें काफी आकर्षित करती थीं. 1929 में वो खुद इंडिया के पहले लाइसेंस्ड पाइलट बने. उन्होंने अपने सपने को एक कदम और आगे ले जाने की सोची. उन्होंने 1932 में टाटा एयरलाइन्स नाम से इंडिया की पहली कमर्शल एयरलाइन की शुरुआत की.


यह एयरलाइन पहली इंडियन ग्लोबल एंटिटी बनी, जिसने भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाई. 1948 में एयर इंडिया ने मुंबई से लंदन रूट के साथ अपनी पहली इंटरनैशनल सर्विस शुरू की.


JRD हमेशा से एक्सिलेंस औऱ परफेक्शन को तवज्जो देते थे. उनकी ये चाहत साफ तौर पर उनके बिजनेसेज में झलकती थी. इसी का नतीजा था कि उनकी एयरलाइन को दुनिया की टॉप तीन एयरलाइन्स में जगह मिली.

इंस्टीट्यूशंस को भी बढ़ावा मिला

उनकी अगुवाई में टाटा ग्रुप ने भारत में साइंस से लेकर मेडिकल और आर्ट कई संस्थानों को शुरू किया. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, दी टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, दी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, दी नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवान्स्ड साइसेंज और दी नैशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स इनमें से कुछ नाम हैं.


ये ऐसे संस्थान हैं जो आज अपने क्षेत्र में अव्वल दर्जा रखते हैं. JRD टाटा के योगदान और सपोर्ट के बिना इंडिया में आज इस उच्च स्तर के संस्थान शायद ही होते.

खेल के शौकीन

JRD को हमेशा से खेल का शौक था. 1937 में उन्होंने टाटा स्पोर्ट्स क्लब की शुरुआत की और 1937 से 1980 तक उसके प्रेजिडेंट बने रहे. इस क्लब ने कई एथलीट्स को सपोर्ट दिया.

फिलांथ्रॉपी

JRD का दिमाग जितना बिजनेस में चलता था उतनी ही उनकी दिलचस्पी समाज को लौटाने में थी. 1944 में उन्होंने इसी मकसद के साथ JRD टाटा ट्रस्ट को शुरू किया.


कुछ सालों बाद उन्होंने मुंबई में JRD और थेल्मा टाटा ट्रस्ट को शुरू करने के लिए अपने बहुतायत शेयरों और एक अपार्टमेंट को बेच दिया. यह ट्रस्ट इंडिया में प्रताड़ित महिलाओं को सपोर्ट देने का काम करता है.

सम्मान और पुरस्कार

JRD टाटा को उनके कार्यों के लिए पद्म विभूषण(1957), समेत डेनियल गुगेनहेम मेडल फॉर एविएशन(1988) और यूनाइटेड नेशंस पॉप्युलेशन अवॉर्ड(1992) से नवाजा गया.


1948 में उन्हें इंडियन एयर पोर्स से ऑनररी रैंक ऑफ ग्रुप कैप्टन से भी सम्मानित किया गया. 1947 में उन्हें एयर वाइस मार्शल रैंक पर प्रमोट कर दिया गया. 1992 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया.


Edited by Upasana

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