महिला संगीत कलाकारों ने अपने दम पर लिया अपना हक: शिल्पा राव

योरस्टोरी के 'वूमन ऑन मिशन समिट' में भारत की टॉप सिंगर में से एक, शिल्पा राव ने अपनी म्यूजिक यात्रा को याद किया और अपनी पसंद को लेकर चर्चा की, साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि कैसे महामारी के दौरान म्यूजिक बनाया। उन्होंने भारतीय संगीत उद्योग में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर भी खुलकर बात की।

महिला संगीत कलाकारों ने अपने दम पर लिया अपना हक: शिल्पा राव

Sunday March 13, 2022,

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पुरस्कार विजेता गायिका शिल्पा राव ने योरस्टोरी के वूमन ऑन मिशन समिट 2022 में कहा, “रातोंरात सफलता जैसा कुछ नहीं है। यदि आप एक सॉन्ग बनाते हैं और यह लोगों से कनेक्ट करता है, तो यह हमेशा के लिए रहता है और मैं उन प्रकार के गानों में विश्वास करती हूं।”

शिल्पा बॉलीवुड की कई हिट फिल्मों के पीछे मधुर आवाज रही हैं। फिल्म अनवर का गाना जावेदा जिंदगी से लेकर द ट्रेन के वो अजनबी, बचना ऐ हसीनों के खुदा जाने और मनमर्जियां टाइटल ट्रैक जैसे कई अन्य गानों में उन्होंने अपनी मधुर आवाज दी है।

वह योरस्टोरी के वूमन ऑन मिशन 2022 में बोल रही थीं।

शिल्पा को भारतीय शास्त्रीय रागों पर उनकी शानदार महारत के लिए जाना जाता है और उन्होंने अग्नि से लेकर नूरी और अनुष्का शंकर तक कई शीर्ष संगीतकारों के साथ सहयोग किया है। करीब डेढ़ दशक से अधिक समय से संगीत बनाने वाली शिल्पा 'तोसे नैना' गाने को अपने दिल के सबसे करीब देखती हैं।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह उन बेहद खूबसूरत गानों में से एक है, जो समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं।"

जहां महामारी ने पूरी दुनिया को तबाह कर दिया, तो वहीं संगीत जैसे मनोरंजन के रूप लोगों के जीवन में विभिन्न भावनाओं और उथल-पुथल से गुजर रहे लोगों के लिए एक तारणहार रहा है। शिल्पा का मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि संगीत इतना "नम्य" है और इसे केवल इसके बोल और ऑडियो से परिभाषित किया जाना चाहिए, न कि दृश्यों से।

वे कहती हैं, "संगीत अपने आप में इतना शक्तिशाली और करिश्माई है। चूंकि संगीत एक सोलो प्रोसेस है, यहां तक कि एक महामारी भी लोगों को संगीत बनाने से नहीं रोक सकती। इसलिए, हमने महामारी के माध्यम से बहुत सारे संगीत बनाए और ऑडियो फाइलों और गीतों के आदान-प्रदान के लिए इंटरनेट का लाभ उठाया। महामारी ने हमें जो सिखाया है, वह यह है कि स्वच्छ भोजन, हवा, पानी, भोजन और कला आपको खुश करती है, इसका कोई विकल्प नहीं है।”

कोक स्टूडियो, पाकिस्तान पर जाने वाली एकमात्र भारतीय संगीतकार शिल्पा भारतीय संगीत उद्योग में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के बारे में बेहद मुखर हैं। उनका मानना है कि महिला कलाकारों ने दूसरों को उनका हक देने की प्रतीक्षा करने के बजाय खुद को बदलकर अपना हक लिया।

वे कहती हैं, "एक ऐसा दौर था जहां महिला स्वर एक गीत में सिर्फ दो पंक्तियों या छोटे दूसरे अंतरा में सिमट कर रह गए थे। लेकिन 2021 में, बड़े पैमाने पर महिला-नेतृत्व वाले गाने, एल्बम आए और इसका श्रेय महिला कलाकारों को जाता है क्योंकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हमें गाने नहीं मिल रहे थे इसलिए हमने उन्हें बनाया और एक जगह बनाई। हमने अपने स्वयं के एल्बम और वीडियो बनाए और हमने महिलाओं की आवाज को शाब्दिक और रूपक रूप से जारी रखा।”

शिल्पा ने अनुष्का शंकर के साथ उनके एल्बम लव लेटर के लिए कौलैबोरेशन किया जिसमें उन्होंने 'दोज वर्ड्स' गीत गाया था। एल्बम को ग्रैमी अवार्ड्स 2021 के लिए नोमिनेट किया गया था। भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर योग्य मान्यता मिलने की बात करते हुए, उन्होंने कहा कि जब कोई भारतीय संगीत के बारे में सोचता है, तो वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत या कर्नाटिक (Carnatic) संगीत के बारे में नहीं सोचते हैं, जो कि होना चाहिए।

वे कहती हैं, "उपमहाद्वीप की असली पहचान यही है। यह दुनिया भर में कला और संस्कृति की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति रही है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, उस्ताद अमजद अली खान, मेहदी हसन जैसे दिग्गज इस संगीत के साथ दुनिया भर में गए, और यही वह संगीत है जो वास्तव में हमें परिभाषित करता है।”

उन्होंने आगे कहा, "यह एक ऐसी चीज है, जिसे मैं चाहती हूं कि युवा गर्व अपनाएं क्योंकि जब मैं उनसे पूछती हूं कि सच्चा भारतीय संगीत क्या है? तो वे अभी भी थोड़ी झिझक में रहते हैं। यह बॉलीवुड नहीं है। यह हमारा भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, कर्नाटिक है और सूची में और भी बहुत कुछ है। मुझे नहीं लगता कि किसी भी देश में इतना विविध संगीत है, जो इतना मजबूत है।"


Edited by रविकांत पारीक