Khadim’s Success Story: जूते की दुकान से 400 करोड़ रु रेवेन्यू वाला फुटवियर ब्रांड बनने तक का सफर
कोलकाता की छोटी सी दुकान से शुरू हुआ Khadim’s आज भारत का बड़ा फुटवियर ब्रांड बन चुका है. जानिए कैसे सत्य प्रसाद रॉय बर्मन ने संघर्ष, मेहनत और बिजनेस की सही समझ के दम पर 428 करोड़ रु रेवेन्यू वाला ब्रांड खड़ा किया और लाखों उद्यमियों के लिए प्रेरणा बने.
हर बड़ा बिजनेस किसी छोटे कदम से शुरू होता है. Khadim’s की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. यह सिर्फ एक कंपनी की सफलता नहीं, बल्कि मेहनत, समझदारी और दूरदर्शिता की मिसाल है.
सत्य प्रसाद रॉय बर्मन (Satya Prasad Roy Burman) का जन्म कोलकाता में हुआ था. उनका बचपन आसान नहीं था. जीवन में कई चुनौतियां थीं. लेकिन उन्होंने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. बेहतर भविष्य की तलाश में वह मुंबई पहुंचे. वहां उन्होंने एक जूते की दुकान में काम किया. यह नौकरी छोटी जरूर थी, लेकिन यहीं से उनके भीतर बिजनेस की समझ पैदा हुई.
मुंबई में काम करते हुए उन्होंने ग्राहकों की जरूरतों को करीब से समझा. उन्होंने देखा कि आम लोग ऐसे जूते चाहते हैं जो सस्ते भी हों और लंबे समय तक चलें. यही सोच आगे चलकर उनके बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत बनी.
साल 1965 में सत्य प्रसाद रॉय बर्मन वापस कोलकाता लौटे. वहां उन्होंने चितपुर इलाके में एक छोटी सी दुकान शुरू की. उस समय इस दुकान का नाम KM Khadim था. शायद तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह छोटी दुकान एक दिन देश के बड़े फुटवियर ब्रांड में बदल जाएगी.
दुकान शुरू करने के बाद सत्य प्रसाद रॉय बर्मन ने बाजार को ध्यान से समझा. उन्होंने महसूस किया कि लोगों के पास अच्छे और टिकाऊ फुटवियर के ज्यादा विकल्प नहीं हैं. उन्होंने इसी कमी को अवसर में बदला. कम कीमत में मजबूत और भरोसेमंद फुटवियर बेचना शुरू किया.
धीरे धीरे उनके प्रोडक्ट लोगों को पसंद आने लगे. ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और कारोबार तेजी से आगे बढ़ने लगा. कुछ ही समय में वह पश्चिम बंगाल और आसपास के इलाकों के बड़े फुटवियर होलसेलर बन गए.
इसके बाद 1980 का दशक Khadim’s के लिए बड़ा बदलाव लेकर आया. इसी दौरान सत्य प्रसाद रॉय बर्मन के बेटे सिद्धार्थ रॉय बर्मन बिजनेस से जुड़े. उन्होंने कंपनी में नई सोच और नई ऊर्जा दी. पिता और बेटे की इस जोड़ी ने बिजनेस को नए स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया.
कंपनी ने पश्चिम बंगाल से बाहर कदम बढ़ाना शुरू किया. तमिलनाडु जैसे राज्यों में विस्तार हुआ. धीरे धीरे Khadim’s देश के अलग अलग हिस्सों में अपनी पहचान बनाने लगा.
आज Khadim India भारत के बड़े फुटवियर रिटेल ब्रांड्स में गिना जाता है. कंपनी के देशभर में लगभग 890 स्टोर हैं. Khadim’s ने अलग अलग ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए कई सब ब्रांड्स भी लॉन्च किए. इनमें British Walkers और Cleo जैसे नाम शामिल हैं.
साल 2013 में सत्य प्रसाद रॉय बर्मन इस दुनिया को अलविदा कह गए. लेकिन उनका सपना यहीं नहीं रुका. परिवार और कंपनी ने उनकी सोच को आगे बढ़ाया.
साल 2014 में Khadim’s ने डिजिटल दुनिया में कदम रखा. कंपनी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी पहुंच गई. इसके बाद 2017 में कंपनी ने IPO लॉन्च किया और शेयर बाजार में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई.
कंपनी को CNBC ने भारत का दूसरा सबसे बड़ा रिटेल फुटवियर ब्रांड बताया. यह उपलब्धि किसी भी बिजनेस के लिए बहुत बड़ी मानी जाती है.
हाल के वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹428 करोड़ (31 मार्च 2025 तक) तक पहुंच गया. यह आंकड़ा बताता है कि Khadim’s आज कितनी बड़ी कंपनी बन चुकी है.
Khadim’s की सफलता हमें सिखाती है कि बड़ा सपना देखने के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती. जरूरत होती है सही सोच, मेहनत और लोगों की जरूरत को समझने की.
एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ यह सफर आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है. सत्य प्रसाद रॉय बर्मन ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो साधारण शुरुआत भी असाधारण सफलता में बदल सकती है.
Edited by Ravi Pareek




