KITG 2026: 8 गोल्ड, 1 सिल्वर… KITG में छाए मणिकांता एल, अब एशियाई खेलों पर नजर
Khelo India Tribal Games (KITG) 2026 में कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल ने आठ गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर दमदार प्रदर्शन किया. लगातार रेस, कम समय और शारीरिक दबाव के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और हर इवेंट में शानदार खेल दिखाते हुए सफलता हासिल की.
पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल (Manikanta L) का जीवन किसी ऐसे खिलाड़ी जैसा रहा है जिसे हर कुछ मिनटों में खुद को फिर से तैयार कर अगली चुनौती के लिए उतरना होता है.
21 वर्षीय मणिकांता ने रायपुर में जारी पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ 2026 (Khelo India Tribal Games - KITG 2026) में शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किए. नौ गोल्ड मेडल का लक्ष्य भले ही अधूरा रह गया, लेकिन उनका दबदबा पूरे प्रतियोगिता में साफ नजर आया.
इस दौरान उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ रेस जीतना नहीं, बल्कि हर रेस के बीच बहुत कम समय होने के कारण खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना भी था. कई बार उन्हें पूल से निकलकर सीधे पदक समारोह में जाना पड़ता और फिर तुरंत अगली रेस के लिए लौटना होता था.
ब्रेस्टस्ट्रोक एक्सपर्ट मणिकांता ने खुद को चुनौती देते हुए चारों स्ट्रोक—ब्रेस्टस्ट्रोक, फ्रीस्टाइल, बटरफ्लाई और बैकस्ट्रोक—में भाग लिया, ताकि अपनी टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा पदक जीत सकें.
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण के सबसे सफल खिलाड़ी मणिकांता ने कहा, “अलग-अलग स्ट्रोक्स के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं होता, क्योंकि हर रेस की रणनीति अलग होती है. ऊपर से रेस के बीच समय भी बहुत कम था, जो इसे और चुनौतीपूर्ण बना रहा था.”

कर्नाटक के 21 साल के मणिकांता एल (बीच में) ने रायपुर में जारी पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किए. (image: KITG 2026)
प्रतिदिन सिर्फ छह रेस होने के बावजूद मणिकांता पहले तीन दिनों में लगभग हर दूसरी रेस में उतर रहे थे. इस दौरान उन्हें रेस के बीच पदक समारोह में भी शामिल होना पड़ता था.
इस कठिन शेड्यूल का असर तीसरे दिन की आखिरी रेस में दिखा, जहां 50 मीटर फ्रीस्टाइल में उन्हें अपने ही राज्य के धुनीश एम से पीछे रहते हुए सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा.
उन्होंने कहा, “उस रेस तक पहुंचते-पहुंचते मेरे पेट की मांसपेशियों में जकड़न होने लगी थी, जिससे मेरी गति प्रभावित हुई. लेकिन कुल मिलाकर मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं. पहली बार मैंने इतने सारे इवेंट्स में, वो भी अलग-अलग स्ट्रोक्स में हिस्सा लिया.”
मणिकांता को तैराकी की प्रेरणा उनके चाचा मंजूनाथ से मिली, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के तैराक रह चुके हैं. इससे पहले वह इस साल जयपुर में हुए खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में चार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं, जिनमें 100 मीटर और 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक के व्यक्तिगत खिताब शामिल हैं.
दिलचस्प बात यह है कि अपने करियर की शुरुआत में मणिकांता बटरफ्लाई इवेंट पर ज्यादा ध्यान देते थे, लेकिन 2019 में कंधे की चोट के बाद उनके कोच सिन्जो ने उन्हें ब्रेस्टस्ट्रोक पर फोकस करने की सलाह दी.
मणिकांता ने कहा, “मुझे लगता है कि मैं ब्रेस्टस्ट्रोक के लिए ही बना हूं. जब मैं बटरफ्लाई की ट्रेनिंग करता था, तब भी मेरा पहला राष्ट्रीय पदक 2016 में एक रिले रेस में आया था, जिसमें मैंने ब्रेस्टस्ट्रोक तैरा था.”
दावणगेरे के रहने वाले मणिकांता वर्तमान में बेंगलुरु के बसवनगुड़ी एक्वाटिक सेंटर में कोच राजीव आरएस के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रहे हैं.
हालांकि रायपुर में कई इवेंट्स में सफलता पाने के बावजूद मणिकांता अपने भविष्य को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं.
उन्होंने कहा, “कई इवेंट्स में हिस्सा लेना शरीर पर काफी दबाव डालता है और इससे मेरे मुख्य इवेंट में प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है. मैं अब पूरी तरह ब्रेस्टस्ट्रोक पर ध्यान देना चाहता हूं और इस साल होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना चाहता हूं.”
खेलो इंडिया में 20 से अधिक पदक जीत चुके मणिकांत के पास सीनियर नेशनल्स में भी दो सिल्वर और एक ब्रोंज मेडल है. हालांकि एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करने के लिए उन्हें अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार करना होगा.
200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में एशियाई खेलों का क्वालीफिकेशन समय 2:13.03 सेकंड है, जबकि मणिकांत का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 2:20.55 सेकंड है. इस इवेंट का भारतीय रिकॉर्ड संदीप सेजवाल के नाम है, जिन्होंने 2009 में 2:12.02 सेकंड का समय दर्ज किया था.
मणिकांता ने कहा, “पिछले दो महीनों से मैं इसी लक्ष्य के साथ कड़ी मेहनत कर रहा हूं और यही वजह है कि मैं यहां इतने सारे इवेंट्स में अच्छा प्रदर्शन कर पाया. मुझे पता है कि एशियाई खेलों की टीम में जगह बनाना आसान नहीं है, लेकिन अगर मैं लगातार मेहनत करता रहा तो यह संभव है.”
मणिकांता का सपना भविष्य में अपनी तैराकी उपलब्धियों के आधार पर कर्नाटक पुलिस में नौकरी हासिल करना भी है.
(images: KITG 2026)





