कुलसुम शादाब वहाब: एसिड अटैक सर्वाइवर्स को नई ज़िंदगी देने वाली मसीहा
कुलसुम शादाब वहाब ने एसिड अटैक सर्वाइवर्स को समाज में नया सम्मान दिलाया है. उनकी पहल Ara Lumiere ने मिलान फैशन वीक तक पहुंच बनाई. जानिए कैसे कला, हिम्मत और इंसानियत ने मिलकर इन महिलाओं को दूसरी ज़िंदगी दी.
2009 में बेंगलुरु के सेंट जॉन हॉस्पिटल में एक आर्ट थेरेपी सेशन चल रहा था. यह सेशन कुलसुम शादाब वहाब (Kulsum Shadab Wahab) ने दिव्यांग बच्चों के लिए आयोजित किया था. इसी दौरान उन्होंने एक महिला को देखा, जिसका चेहरा डर, दर्द और साहस की कहानी कह रहा था. वह एक एसिड अटैक सर्वाइवर (acid attack survivor) थी. यह शब्द भी तब कुलसुम के लिए नया था.
“मुझे नहीं पता था कि एसिड अटैक क्या होता है. जब नर्स ने बताया, तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि कोई ऐसा कर भी सकता है,” YourStory से बात करते हुए वह याद करती हैं. उस दिन ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी.
अस्पताल में हुई वह मुलाकात एक ऐसे आंदोलन की शुरुआत बनी, जो आज मिलान फैशन वीक (Milan Fashion Week) के रनवे तक पहुंच चुका है. इस आंदोलन ने पूरे भारत में 123 से अधिक एसिड अटैक सर्वाइवर्स को सशक्त बनाया है और न्याय व सम्मान की लड़ाई में दुनिया भर के सहयोगियों का एक मजबूत समुदाय तैयार किया है.
संघर्ष से बदलाव की शुरुआत
कुलसुम के पति, शादाब वहाब, पहले से ही Hothur Foundation चला रहे थे. यह संस्था गरीब और जरूरतमंदों के लिए शिक्षा, चिकित्सा और पुनर्वास पर काम करती थी.
कुलसुम ने फाउंडेशन से जुड़ने के बाद ‘Colors of Hope’ की शुरुआत की. यह पहल बच्चों को कला के ज़रिए आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता सिखाती है.
बच्चों और अस्पतालों के साथ काम करते हुए कुलसुम ने देखा कि समाज के कई हिस्सों में महिलाओं को हिंसा, भेदभाव और अत्याचार का सामना करना पड़ता है.
जब उन्होंने पहली बार एक एसिड अटैक सर्वाइवर से मुलाकात की, तो उन्हें अहसास हुआ कि इन महिलाओं को केवल इलाज नहीं, बल्कि पहचान, आत्मसम्मान और एक मौका चाहिए, खुद को फिर से संवारने का.
पैसे से नहीं, आत्मसम्मान से बदलेगी ज़िंदगी
शुरुआत में कुलसुम ने सर्वाइवर्स को आर्थिक मदद दी. लेकिन जल्द ही उन्होंने पाया कि यह पर्याप्त नहीं है. कई महिलाओं के पति शराबी थे या हिंसक, और वे पैसा छीन लेते थे. महिलाएं फिर से असहाय हो जाती थीं.
वह कहती हैं, “मुझे समझ आया कि अगर किसी को बदलना है, तो उसे अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाना होगा.”
उन्होंने महिलाओं से पूछा कि वे क्या करना चाहती हैं, क्या सीखना चाहती हैं. धीरे-धीरे उन्होंने सिलाई, कढ़ाई, बुनाई और ब्यूटी ट्रेनिंग जैसे स्किल प्रोग्राम शुरू किए. इन वर्कशॉप्स में महिलाएं न केवल काम सीखती थीं, बल्कि एक-दूसरे से ताकत भी पाती थीं.
कुलसुम बताती हैं, “उनके चेहरे पर जलने के निशान हैं, लेकिन उनकी आत्मा अब भी खूबसूरत है.”

सबीना बेल्ली, मार्को बिज़ारी और कुलसुम शादाब वहाब
फैशन और हिम्मत का संगम
एक दिन कुलसुम की वर्कशॉप में कुछ महिलाएं बैग सिल रही थीं. उन्होंने मज़े में कुलसुम का एक सिर पर बांधा जाने वाला हेडगियर देखा और उसे कपड़े के टुकड़ों से वैसा ही बना डाला.
जब एक इटैलियन मेहमान ने यह हेडगियर देखा, तो वह हैरान रह गईं. उन्होंने कुलसुम को Milan Fashion Week में आमंत्रित किया.
कुलसुम मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि फैशन हमारे आंदोलन का हिस्सा बनेगा. लेकिन शायद भगवान ने सब कुछ पहले से तय कर रखा था.”
2019 में उन्होंने Ara Lumiere की शुरुआत की. यह एक ऐसा लग्ज़री फैशन ब्रांड है जो एसिड अटैक सर्वाइवर्स द्वारा बनाया गया है. हर डिजाइन, हर सिलाई, हर कढ़ाई के पीछे एक कहानी है — दर्द की, उम्मीद की और पुनर्जन्म की.
दर्द से जन्मी खूबसूरती: Ara Lumiere की कहानी
Ara Lumiere के हर कलेक्शन के पीछे कोई सामाजिक संदेश होता है. इसका लेटेस्ट कलेक्शन “Rewoven Resilience” था, जिसमें सौ साल पुरानी साड़ियों को नए ब्लेज़र्स में बदला गया.
यह केवल फैशन नहीं, बल्कि एक प्रतीक था कि टूटी चीजें भी खूबसूरती से फिर से बुनी जा सकती हैं.
मिलान फैशन वीक में यह कलेक्शन पूरी तरह बिक गया. लोगों ने इसे सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि “कला और करुणा का संगम” कहा.
2024 में, कुलसुम ने Ara Pret लॉन्च किया, एक ऐसा सस्ता लग्ज़री ब्रांड जिससे आम महिलाएं भी इस आंदोलन का हिस्सा बन सकें.
वह कहती हैं, “मैं चाहती हूं कि हर महिला महसूस करे कि वह Ara Lumiere का हिस्सा है. वह भी हिम्मत और सुंदरता की प्रतीक है.”
Phoenix Circle: फैशन वीक का सबसे भावनात्मक पल
पिछले महीने, मिलान फैशन वीक के दौरान, कुलसुम ने Phoenix Circle पेश किया. इसमें दुनिया के कुछ सबसे बड़े फैशन नाम मौजूद थे — एंजेला मिसोनी (Missoni की प्रेसिडेंट), मार्को बिज़ारी (Gucci के पूर्व CEO), और Pomellato की CEO सबीना बेल्ली.
एक विशेष फिल्म दिखाई गई जिसमें सर्वाइवर्स की कहानियां थीं — दर्द, पुनर्निर्माण और आत्मविश्वास की.
जब लाइट्स जलीं, तो दर्शकों की आंखें नम थीं.
कुलसुम बताती हैं, “सबने कहा कि यह फैशन वीक का सबसे सुंदर पल था. क्योंकि इसमें सच्चाई और उम्मीद थी.”
Pomellato की CEO सबीना बेल्ली ने कहा, “ये महिलाएं सिर्फ जली हुई त्वचा नहीं, बल्कि जीती हुई आत्माएं हैं. उनकी जीत हिंसा पर सबसे बड़ा जवाब है.”
नई पहचान, नई उम्मीद
आज Ara Lumiere में 123 महिलाएं काम करती हैं. कुछ सिलाई करती हैं, कुछ बटन लगाती हैं, कुछ कढ़ाई करती हैं. जिनके हाथ जल चुके हैं, वे भी किसी न किसी तरह काम करती हैं. कोई पैर से मशीन चलाती है, तो कोई केवल एक उंगली से बटन लगाती है.
जो महिलाएं घर से बाहर नहीं जा सकतीं, उनके लिए कुलसुम सिलाई मशीनें घर तक भेजती हैं. उन्होंने हाल ही में ब्लॉक प्रिंटिंग यूनिट भी शुरू की है ताकि और महिलाएं रोजगार पा सकें.
वह कहती हैं, “हम हर महिला की क्षमता के अनुसार उसे काम देते हैं. हम सिर्फ उन्हें कमाने नहीं, बल्कि जीने की वजह दे रहे हैं.”

सर्वाइवर्स के साथ कुलसुम (सफेद ब्लाउज़ में)
दर्द भरी लेकिन प्रेरणादायक कहानियां
कुलसुम एक महिला का ज़िक्र करती हैं जिसका चेहरा पूरी तरह जल गया था और एक आंख चली गई थी. उसका सपना था — ब्यूटीशियन और मॉडल बनना.
कई सर्जरी और थेरेपी के बाद, कुलसुम ने उसे मुंबई में रैंप वॉक करवाया. आज वह एक सैलून चलाती है और दूसरों को सुंदर महसूस कराती है.
एक अन्य महिला पर एक ही आदमी ने दो बार एसिड से हमला किया. एक और को उसके पति और ससुराल वालों ने पांच दिन तक बंद रखा और फिर एसिड फेंका.
इन कहानियों से कुलसुम की टीम हर बार और मज़बूत होती है. वह कहती हैं, “हर सर्वाइवर हमारे लिए हीरो है.”
न्याय की लड़ाई अब भी अधूरी
NCRB (National Crime Records Bureau) की 2023 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 207 एसिड अटैक केस दर्ज हुए.
सबसे ज़्यादा मामले पश्चिम बंगाल में (57 केस) सामने आए. लेकिन इन मामलों में न्याय बेहद धीमा है.
735 केसों में से 649 बीते सालों से लंबित हैं. कई महिलाएं अपने हमलावरों के साथ ही रहने को मजबूर हैं.
कुलसुम बताती हैं, “एक सर्वाइवर जिस पर दो बार हमला हुआ, आज भी उसी आदमी के साथ रह रही है क्योंकि उसे डर है कि उसके बच्चे छिन जाएंगे.”
वह आगे बताती हैं, “वो कोर्ट जाएं या सर्जरी करवाएं? उनके पास न पैसा है, न ताकत.”
इसीलिए Hothur Foundation इन महिलाओं को हर संभव मदद देता है — सर्जरी, शिक्षा, थेरेपी और बच्चों की पढ़ाई तक.
कुलसुम अब स्किन बैंकिंग की भी वकालत कर रही हैं, ताकि एसिड सर्वाइवर्स के लिए बेहतर रिकवरी हो सके.
वैश्विक पुकार
कुलसुम का सपना अब भारत से परे है. आज Ara Lumiere के डिज़ाइन्स मिलान के MODES स्टोर और ब्रांड वेबसाइट पर बिकते हैं.
वह चाहती हैं कि Phoenix Circle अब लंदन, अमेरिका और हर उस जगह पहुंचे जहां इंसानियत की ज़रूरत है.
वह कहती हैं, “मैं अपनी ऊर्जा कहीं और लगाना नहीं चाहती. मैं बस इसे और बड़ा और मजबूत बनाना चाहती हूं. मुझे नहीं लगता कि यह सिर्फ मेरा काम है. मैं चाहती हूं कि और महिलाएं इस पहल से जुड़ें और इसे अपना समझें. यह हर महिला की लड़ाई है, हर उस औरत की जो बदलाव चाहती है.”
(Translated by: रविकांत पारीक)



