महज थोड़े से पैसे से शुरू हुए थे देश के ये 5 बड़े व्यवसाय और बन गए सुप्रसिद्ध

By Palak Agarwal
January 21, 2022, Updated on : Thu Jan 27 2022 05:57:05 GMT+0000
महज थोड़े से पैसे से शुरू हुए थे देश के ये 5 बड़े व्यवसाय और बन गए सुप्रसिद्ध
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व्यवसाय में लाभदायक बनने से पहले कम से कम पहले कुछ वर्षों तक बढ़ने के लिए एक मजबूत पूंजी प्रवाह की आवश्यकता होती है। किसी भी व्यवसाय की शुरुआत में प्रारंभिक निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं। योरस्टोरी ने उन उद्यमियों से बात की जिन्होंने बहुत कम या बिना पैसे शुरुआत करते हुए बड़े व्यापारिक साम्राज्य स्थापित किए। उनका मानना ​​है कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें कड़ी मेहनत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


यहाँ योरस्टोरी आपके लिए भारत के पांच बड़े व्यवसायों की कहानियां लेकर आया है, जो यह बताता है कि एक बड़ी पूंजी से अधिक एक आइडिया के क्लिक करने की आवश्यकता होती है।

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एलटी फूड्स (LT Foods)

लगभग 70 साल पहले चावल एजेंट रघुनाथ अरोड़ा ने अमृतसर में अपने गांव भिखीविंड के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चावल खिलाने का एक मिशन शुरू किया था। उन्होंने साल 1965 में एक छोटी चावल ट्रेडिंग कंपनी शुरू की, जो बाद में 1977 में एक साझेदारी फर्म लालचंद तीरथ राम राइस मिल्स (एलटी फूड्स) में बदल गई। यहाँ से रघुनाथ के पास उनकी बड़ी योजनाएँ थीं।


वह चाहते थे कि देशी बासमती चावल जो पुलाव और बिरयानी में प्रसिद्ध है, वो मेहनती किसानों के लिए उचित मूल्य का त्याग किए बिना अमृतसर से आगे देश और विदेश के अन्य हिस्सों तक पहुंचें। रघुनाथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए चावल के प्रत्येक बैच का हाथ से निरीक्षण करते थे।

ऐसे सिद्धांतों का पालन करते हुए एलटी फूड्स को आज हम दावत बासमती चावल ब्रांड के रूप में जानते हैं।


ब्रांड इतने सालों तक कैसे प्रासंगिक रहा? दूसरी पीढ़ी के उद्यमी और एलटी फूड्स के प्रबंध निदेशक अश्विनी अरोड़ा योरस्टोरी से बातचीत में कहते हैं, "कंपनी के मूल्य को बरकरार रखते हुए है।"


अश्वनी कहते हैं, “मेरे पिता ने व्यवसाय शुरू किया और मेरे भाई विजय कुमार अरोड़ा ने इसे विश्व स्तर पर पेश किया। गुणवत्ता को लगातार बनाए रखने और बदलते समय के साथ इनोवेशन करने के लिए हमने अपने पिता द्वारा व्यवसाय पैदा किए गए मूल्यों को आगे बढ़ाया।”


इंडिया गेट, कोहिनूर आदि ब्रांडों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच दावत ने भारत में बाजार हिस्सेदारी का लगभग 20 प्रतिशत कब्जा कर लिया है। वर्तमान में यह 60 देशों में उपलब्ध है। अश्विनी का दावा है कि एलटी फूड्स ने वित्त वर्ष 2011 में 4,686 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है।


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विनोद कुमार अग्रवाल, MD और प्रमोटर, GR Infra

जीआर इन्फ्रा (GR Infra)

1960 के दशक में गुमानी राम अग्रवाल (जीआर अग्रवाल) राजस्थान में चुरू जिले के रेगिस्तान जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में रहते थे। वहाँ सड़कें नहीं थीं और अनाज व्यापारी को काम के लिए पड़ोसी गांवों और कस्बों में जाना मुश्किल हो जाता था।


अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सीमित संसाधनों के साथ वहाँ जीवनयापन कठिन था। जीआर अग्रवाल ने महसूस किया कि सरकार उस समय ऐसे क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रही थी। उन्होने हार ना मानते हुए स्वयं कार्यभार संभाला और 1965 में राज्य में सड़क बनाने का व्यवसाय शुरू किया।


जैसलमेर के पास एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के साथ उनकी छोटी साझेदारी फर्म ने जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स की नींव के रूप में कार्य किया। आज कंपनी एक एकीकृत सड़क इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) व्यवसाय में आगे बढ़ रही है और इसने वित्त वर्ष-20 में 6,028 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। हाल के वर्षों में, इसने रेलवे परियोजनाओं में भी प्रवेश किया है।


योरस्टोरी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में उनके बेटे और एमडी व फर्म के प्रमोटर विनोद कुमार अग्रवाल कहते हैं,

“हमारे गाँव में कठिन परिस्थितियों में हमारे परिवार को अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ा। मेरे पिता ने खुद को एक अंतर बनाने और एक बुनियादी ढांचा कंपनी शुरू करने की चुनौती दी। हममें से अधिकांश ने गाँव में उचित शिक्षा प्राप्त नहीं की और एक-एक करके हम अपने पिता के व्यवसाय में शामिल हो गए। इन वर्षों में हमारे पारिवारिक व्यवसाय में वृद्धि हुई क्योंकि देश में सड़क निर्माण के अवसर सामने आए।”


1995 में पारिवारिक व्यवसाय को जीआर अग्रवाल बिल्डर्स और डेवलपर्स के रूप में शामिल किया गया था और 1996 में संस्थापक पिता की साझेदारी फर्म का अधिग्रहण किया। बाद में 2007 में इसका नाम बदलकर जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स कर दिया गया और निगमन का एक नया प्रमाण पत्र लिया गया।


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केआरबीएल (KRBL)

जैसा कि भारत ने बासमती चावल के लिए भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग हासिल करने के लिए अपने रुख को मजबूत किया है, यह चावल पारंपरिक रूप से भारत में उगाया जाता है। योरस्टोरी ने भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पैक किए गए रूप में लंबे पतले अनाज वाले सुगंधित चावल को पेश करने वाले पहले चावल ब्रांडों में से एक के साथ बातचीत है।


दो भाई खुशी राम और बिहारी लाल ग्राहकों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवश्यक चीजें लाना चाहते थे। 1889 में उन्होंने लायलपुर (अब पाकिस्तान में) में चावल, खाद्य तेल और गेहूं में काम करने वाला एक छोटा व्यवसाय स्थापित किया था।


हालाँकि जैसे-जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेद बढ़े भाइयों ने इसे छोड़ दिया और भारत के लिए अपना रास्ता बना लिया। उन्होंने शुरुआत से शुरुआत की और लाहौरी गेट, नई दिल्ली में केआरबीएल (उनके नाम का एक संक्षिप्त नाम) नामक एक कंपनी बनाई।


कई छोटे उद्यमियों की तरह, उन्हें कंपनी को बनाए रखने के लिए संघर्ष और बाधाओं के खिलाफ काम करना पड़ा। अगले कुछ वर्षों में केआरबीएल अपने 'इंडिया गेट बासमती राइस' ब्रांड के माध्यम से चर्चित ब्रांड बन गया। यह कंपनी का प्रमुख उत्पाद है, जो 100 से अधिक वर्षों से ग्राहकों की सेवा कर रहा है।


योरस्टोरी के साथ बातचीत में पांचवीं पीढ़ी की उद्यमी और केआरबीएल लिमिटेड की पूर्णकालिक निदेशक प्रियंका मित्तल परिवार के स्वामित्व वाले व्यवसाय के संचालन के बारे में चर्चा की है। इसी के साथ उन्होने केआरबीएल के प्रभाव के बारे में भी बात करते हुए बताया है कि दुनिया भर में भारतीय बासमती चावल को लेकर यह ब्रांड कई गुना बढ़ गया है।


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ज्ञानी आइसक्रीम (Giani Ice Cream)

क्या आप जानते हैं कि हम जो कई आइसक्रीम खाते हैं वे वास्तव में फ्रोजन डेसर्ट हैं?


छह दशकों से अधिक की विरासत को बनाए रखते हुए ज्ञानी आइसक्रीम के निदेशक और तीसरी पीढ़ी के उद्यमी तरणजीत सिंह ने योरस्टोरी के साथ एक विशेष बातचीत में बताया है कि ब्रांड बड़े पैमाने पर अन्य खिलाड़ियों से क्या अलग करता है।


वे कहते हैं, "लोगों को यह समझने की जरूरत है कि दो बाजार हैं- आइसक्रीम और फ्रोजन डेसर्ट। आइसक्रीम दूध, क्रीम और मक्खन से बनी होती है, जहां वनस्पति तेल का उपयोग नहीं होता है।”


ज्ञानी गुरचरण सिंह के पाकिस्तान से भारत आने के बाद दिल्ली में फतेहपुरी चांदनी चौक की व्यस्त गलियों के बीच 1956 में ज्ञानी आइसक्रीम की शुरुआत हुई थी। एक छोटी सी दुकान में मुट्ठी भर पैसे से कारोबार शुरू हुआ और मिठाई की लालसा को शांत करने के लिए रबड़ी फालूदा बनाना शुरू किया। अब, ब्रांड 210 से अधिक स्टोर के साथ पूरे भारत में अपने नाम के लिए खड़ा है और उनमें से 40 अकेले दिल्ली-एनसीआर में हैं।


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पंसारी ग्रुप (Pansari Group)

शम्मी अग्रवाल के परदादा 1940 के दशक में दिल्ली में पंसारी की दुकान (किराने की दुकान) नामक एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते थे। उसके बाद, उनके दादा गोकुल चंद अग्रवाल ने खाद्य तेलों के थोक व्यापार में उद्यम करके व्यापार का और विस्तार किया और यहाँ से पंसारी समूह की यात्रा शुरू हुई।


बाद में, साल 1962 में शम्मी के दादा ने पश्चिम बंगाल में एक तेल रिफाइनरी भी स्थापित की, जो पंसारी इंडस्ट्रीज के तहत हर दिन 180-200 टन वनस्पति तेल का उत्पादन करती है।


1990 का दशक एक महत्वपूर्ण दशक था जब पंसारी समूह व्यापार से मैनुफेक्चुरिंग की ओर बढ़ रहा था। 1990 और 2005 के बीच, कंपनी ने पूरे उत्तर भारत में लगभग सात इकाइयां स्थापित कीं। आज समूह बाजार में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में विकसित हो गया है। यह कंपनी भारत और विदेशों में तेल, सोया तेल, रिफाइंड तेल और सरसों के तेल के साथ बहुत कुछ बनाती और बेचती है।


बीएल एग्रो, रुचि सोया इंडस्ट्रीज, गोकुल रिफिल्स, अनिक इंडस्ट्रीज, फॉर्च्यून और कई अन्य खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए पंसारी समूह का दावा है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बाजार हिस्सेदारी 17 प्रतिशत से अधिक है। यह उत्तर भारत के सभी राज्यों में मौजूद है।


शम्मी यह भी कहते हैं कि वह दक्षिण भारतीय बाजार के लिए भी कुछ उत्पाद बेचते हैं। उदाहरण के लिए, चावल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बिकता है क्योंकि यह प्रमुख रूप से "बिरयानी बाजार" है। इस बाजार में बेचने के लिए गनपाउडर और डोसा के मिश्रण भी विकसित किए गए।


इसके अलावा, पंसारी ग्रुप आज यूके, यूएस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर आदि सहित 42 देशों में भी मौजूद है।


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Edited by Ranjana Tripathi