केरल सरकार का बड़ा फैसला- उच्च शिक्षा विभाग के तहत हर यूनिवर्सिटी में छात्राओं को मिलेगी पीरियड लीव

By yourstory हिन्दी
January 18, 2023, Updated on : Thu Jan 19 2023 05:38:05 GMT+0000
केरल सरकार का बड़ा फैसला- उच्च शिक्षा विभाग के तहत हर यूनिवर्सिटी में छात्राओं को मिलेगी पीरियड लीव
कुछ दिन पहले केरल की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने पीरियड लीव देने की घोषणा की थी.
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केरल सरकार की ओर से लिया गया यह अपनी तरह का एक बड़ा फैसला है. केरल सरकार ने इस फैसले में कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले राज्‍य के सभी विश्वविद्यालयों की छात्राओं को पीरियड लीव दी जाएगी. केरल की छात्राओं समेत सभी लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्‍वागत किया है.  

 

अभी कुछ दिन पहले ही केरल के कोचीन में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (सीयूएसएटी) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपनी फीमेल स्‍टूडेंट्स को हर महीने पीरियड लीव दिए जाने की घोषणा की थी. सीयूएसएटी के इस फैसले को दोहराते हुए केरल की उच्च शिक्षा मंत्री आर. बिंदू ने कहा यह एक सही और जरूरी फैसला है. इसी के साथ केरल सरकार ने उच्‍च शिक्षा विभाग के दायरे में आने वाली राज्य की सभी यूनिवर्सिटीज में इस नियम को लागू करने का फैसला किया है.


आर. बिंदु ने फेसबुक पर एक पोस्‍ट लिखकर इस बात की जानकारी दी है. आर. बिंदु लिखती हैं, “पीरियड्स के दौरान छात्राओं को होने वाली मानसिक और शारीरिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए सभी यूनिवर्सिटीज में पीरियड लीव लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.”


न सिर्फ केरल, बल्कि देश के विभिन्‍न राज्‍यों में इस तरह की मांग कुछ समय से उठती रही है. न सिर्फ स्‍कूल-कॉलेज, बल्कि नौकरीपेशा महिलाओं के लिए भी पीरियड लीव की मांग को लेकर सवाल उठाया जाता रहा है.


केरल यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के फैसले की काफी सराहना की जा रही थी. हालांकि इसके पहले कोचीन यूनिवर्सिटी ने पीरियड लीव का नाम दिए बगैर महिला छात्राओं को अनिवार्य उपस्थिति थोड़ी छूट दी थी. जैसेकि उस यूनिवर्सिटी में मेल स्टूडेंट्स के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन फीमेल स्‍टूडेंट्स के लिए 73 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है. इस दो फीसदी की छूट का लाभ छात्राएं प‍ीरियड के दौरान उठा सकती हैं.  


हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में भी पेड प‍ीरियड लीव की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी. इस याचिका को दायर करने वाले वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठीने कहा कि महिलाओं को प्रेग्‍नेंसी के वक्‍त तो वैतनिक अवकाश मिलता है, लेकिन पीरियड्स को लेकर इस तरह का कोई नियम नहीं है. कुछ कंपनियां स्‍वैच्छिक रूप से एक या दो दिन की छुट्टी देती हैं. साथ ही भारत के कुछ राज्‍यों में भी पीरियड्स के दौरान महिलाओं को दो दिन की पेड लीव मिलती है. लेकिन इसे लेकर कोई एक देशव्‍यापी एक नियम नहीं है, जो सभी राज्‍यों और कंपनियों पर समान रूप से लागू होता हो.  


देश में कुछ कंपनियां जैसेकि ज़ोमैटो (Zomoto), इविपनन (Ivipanan), स्विगी (Swiggy), बायजू (Byju), मैग्टर (Magzter), मातृभूमि (Matrubhumi), फ्लाईमाईबिज़ (FlyMyBiz), एआरसी (ARC) और गूज़ूप आदि में महिला कर्मचारियों को एक से दो दिन की पेड पीरियड लीव दिए जाने का नियम है. लेकिन यह नियम कंपनी और प्रबंधन की स्‍वेच्‍छा पर निर्भर करता है.


Edited by Manisha Pandey