दानवीर: दुनिया में सबसे अधिक दान दिया है Tata Group ने

YourStory हिंदी की 'दानवीर' सीरीज में आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के सबसे बड़े दानवीर रतन टाटा द्वारा समाज, शिक्षा और देशहित में दिए गए दान के बारे में.

दानवीर: दुनिया में सबसे अधिक दान दिया है Tata Group ने

Sunday February 05, 2023,

4 min Read

23 जून, 2021 को हुरुन रिसर्च (Hurun Research) और एडेलगिव फाउंडेशन (EdelGive Foundation) ने पिछली सदी के दुनिया के सबसे बड़े दानवीरों की सूची बनाई थी. दुनिया भर के बड़े फिलॉन्‍थ्रोपिस्‍ट की इस लिस्‍ट में टाटा समूह (Tata Group) के संस्‍थापक जमशेतजी नुसरतवानजी टाटा का नाम सबसे ऊपर है, जिन्‍होंने अपनी संपत्ति से 102.4 अरब डॉलर सामाजिक कार्यों में खर्च किए हैं. बिल गेट्स और वॉरेन बफे जैसे लोगों का नाम भी जमशेतजी टाटा के बाद आता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, जमशेतजी टाटा के नाम पर हुए दान की रकम टाटा संस की लिस्टेड कंपनियों की कीमत का 66% है. टाटा ने 1870 के दशक में सेंट्रल इंडिया स्पिनिंग वीविंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी शुरू की थी. फिर हायर एजुकेशन के लिए 1892 में जे.एन. टाटा एंडोमेंट की स्थापना की थी, जो टाटा ट्रस्ट की शुरुआत थी. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने हमेशा जमशेतजी टाटा को 'वन मैन प्लानिंग कमीशन' के रूप में याद किया.

जमशेतजी के बाद उनकी विरासत को संभालने वाले रतन टाटा (Ratan Tata) भी दान के मामले में पीछे नहीं हैं. टाटा संस के चेयरमैन एमरिटस (अवकाश प्राप्त) रतन टाटा ना केवल दिग्गज उद्योगपति के तौर पर जाने जाते हैं बल्कि समाजिक कार्यो के साथ साथ देश के नए उभरते स्टार्टअप्स को भी वे खुलकर सपोर्ट देने के लिए भी विख्यात है. दो दशक से ज्यादा समय तक टाटा संस के चेयरमैन पद रहते हुए दिग्गज कंपनियों का दुनियाभर में अधिग्रहण कर टाटा समूह को वे नए मुकाम पर ले गए.

danveer-indias-biggest-donor-ratan-tata-charity-donation-philanthropy-harvard-business-school

रतन टाटा

रतन टाटा अपनी सादगी और दरियादिली के लिए जाने जाते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतन टाटा की नेटवर्थ करीब 3500 करोड़ रुपये है. दिसंबर, 2022 में IIFL वेल्थ हुरुन इंडिया रिच लिस्ट के मुताबिक वे अमीरों की सूची में 433 वें स्थान पर थे.

रतन टाटा के 65 फीसदी शेयर चैरिटेबल ट्रस्ट में निवेशित है. जिसमें कॉरनेल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को टाटा स्कॉलरशीप फंड के जरिए वित्तीय सहायता दी जाती है. उन्होंने साल 2010 में हावर्ड बिजनेस स्कूल में एग्जीक्यूटिव सेंटर के निर्माण के लिए 50 मिलियन डॉलर का दान दिया था. साल 2014 में आईआईटी मुंबई को भी 95 करोड़ रुपये दान में दिए थे.

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने संज्ञानात्मक प्रणालियों और स्वायत्त वाहनों में अनुसंधान की सुविधा के लिए कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय (Carnegie Mellon University) को भव्य 48,000 वर्ग फुट की इमारत के लिए 35 मिलियन डॉलर का दान दिया, जिसे TCS हॉल कहा जाता है.

टाटा समूह ने IITs को बड़ी आर्थिक सहायता दी और सीमित संसाधनों के साथ लोगों की आवश्यकताओं के अनुकूल डिजाइन और इंजीनियरिंग सिद्धांतों को विकसित करने के लिए टाटा सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एंड डिज़ाइन का गठन किया. उन्होंने संस्थान को 950 करोड़ रुपये दिए.

रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा समूह ने संसाधन-विवश समुदायों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में एमआईटी टाटा सेंटर ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड डिज़ाइन का गठन किया.

चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों के लिए बेहतर पानी मुहैया करने के लिए कैपेसिटिव डीऑनाइजेशन विकसित करने के लिए न्यू साउथ वेल्स संकाय के इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय की आर्थिक सहायता की.

danveer-indias-biggest-donor-ratan-tata-charity-donation-philanthropy-harvard-business-school

रतन टाटा

टाटा समूह ने कोरोना से लड़ने के लिए 1500 करोड़ रुपए का दान किया था, जो भारतीय बिजनेस घरानों द्वारा किया गया सबसे बड़ा दान था.

26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले के दौरान रतन टाटा का नया व्यक्तित्व उभरकर सामने आया था. वे खुद ताज होटल के बाहर डटे रहे और पीड़ितों को मदद सुनिश्चित करने के लिए खुद होटल के बाहर डटे रहे. हमले में मारे या फिर घायल हुए होटल के सभी 80 कर्मचारी के घर वे खुद गए और परिवार वालों से मुलाकात की. आतंकी हमले में ताज होटल पैलेस को काफी नुकसान हुआ था. लेकिन ताज होटल्स ग्रुप की कंपनी इंडियन होटल्स के चेयरमैन होने के नाते उन्होंने फिर से होटल का जीर्णोधार कराया.

रतन टाटा को वर्ष 2007 में परोपकार के लिए कारनेगी मेडल (Carnegie Medal of Philanthropy) से सम्मानित किया गया था.

उन्हें भारत के दो सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म विभूषण (2008) और पद्म भूषण (2000) से सम्मानित किया गया है.

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि, यह उनके पूर्वजों के व्यवसाय नहीं बल्कि उनकी दादी की उदारता है जिसने उन्हें प्रेरित किया.चैरिटी का काम करने की प्रेरणा उन्हें उनकी दादी से मिली.