मुंबई का यह लड़का चीन जाकर बन गया वॉरियर मॉन्क, कुंग-फू में हासिल की महारत

By शोभित शील
February 18, 2022, Updated on : Sat Feb 19 2022 06:15:28 GMT+0000
मुंबई का यह लड़का चीन जाकर बन गया वॉरियर मॉन्क, कुंग-फू में हासिल की महारत
कुंग फू मास्टर हर्ष वर्मा यूं तो प्रोफेशनल फुटबॉलर बनना चाहते थे, लेकिन आज उन्हें लोग एक वॉरियर मॉन्क के रूप में अधिक जानते हैं।
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चीन का शाओलिन टेंपल दुनिया भर में मशहूर है, जहां से दुनिया के सबसे बेहतरीन कुंग-फू वॉरियर निकलते हैं। इसी शाओलिन टेंपल जाकर एक भारतीय ने भी कुंग फू में महारत हासिल की है और आज वे भारत में भी शाओलिन कल्चर को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। कुंग फू मास्टर हर्ष वर्मा यूं तो प्रोफेशनल फुटबॉलर बनना चाहते थे, लेकिन आज उन्हें लोग एक वॉरियर मॉन्क के रूप में अधिक जानते हैं।


हर्ष जब 21 साल के थे तब उन्हें उनके पैर में एक तरह के ट्यूमर का पता चला था और इसके चलते उन्हें सर्जरी से गुजरना पड़ा था। हर्ष के अनुसार, उनके लिए वह समय काफी कठिन था क्योंकि उन परिस्थितियों में वे अपना आत्मविश्वास खो रहे थे, इसी के साथ उन्हें डिप्रेशन का भी शिकार होना पड़ा था।

धीमी रिकवरी से थे परेशान

अपने इलाज के बाद धीमी रिकवरी हर्ष को बराबर परेशान कर रही थी और वे लगातार इसके उपचार से जुड़े विकल्प की खोज करने में लगे हुए थे। न्यूज़ प्लेटफॉर्म ब्रूट से बात करते हुए हर्ष ने बताया है कि उन्होंने टोमोरोलैंड जाने के लिए कुछ पैसे जमा किए थे, हालांकि तब उन्होंने तय किया कि वे अपनी बचत का उपयोग अपने उपचार में करेंगे।

कुंग-फू मास्टर हर्ष वर्मा

कुंग-फू मास्टर हर्ष वर्मा

तभी हर्ष ने चीन के शाओलिन टेंपल के बारे में जानकारी जुटाई, जहां ज़ेन बौद्ध फ़िलॉसफी, कुंग फू और मेडिसिन के बारे में लोगों को प्रशिक्षित किया जाता है। कहा जाता है कि इस शाओलिन टेंपल की स्थापना भारत से चीन गए एक बौद्ध मॉन्क ने की थी।

ट्रेनिंग ने दिखाया कमाल

हर्ष साल 2014 में शाओलिन टेंपल पहुंचे थे, हालांकि तब उन्हें वहाँ पर बोली जाने वाली मैंडरिन भाषा नहीं आती थी। शाओलिन टेंपल पहुंचते ही हर्ष को यह समझ आ गया था कि वो सही जगह आए हैं। ट्रेनिंग शुरू करने के साथ ही हर्ष को उनके शरीर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलने लगे।


इस दौरान हर्ष हर्बल दवाओं का सेवन कर रहे थे और साथ ही वो अपने उपचार के लिए एक्यूपंचर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी कर रहे थे। महज कुछ ही महीनों के भीतर हर्ष अपने पैर के साथ कसरत करने के लिए तैयार हो गए थे।

बन गए वॉरियर मॉन्क

शाओलिन टेंपल में हर्ष ने कुंग फू सीखने से अपनी शुरुआत की, लेकिन उन्हें जल्द ही समझ आ गया था कि यहाँ उन्हें जो भी सिखाया जा सकता है वो सबकुछ सीखना चाहते हैं। हर्ष ने इस बीच मैंडरिन भाषा भी सीखनी शुरू कर दी। इसी दौरान हर्ष के पास उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई और उन्हें उस दौरान घर वापस जाने के लिए तैयार होना पड़ा।


हालांकि जब उन्होंने यह बात अपने मास्टर को बताई तब शाओलिन टेंपल की तरफ से उन्हें वॉरियर मॉन्क बनने का ऑफर दिया गया। इसके बाद हर्ष ने अगले कुछ सालों तक शाओलिन टेंपल में रहकर अपनी ट्रेनिंग पूरी की। मालूम हो कि हर्ष दुनिया के 30 सबसे काबिल वॉरियर मॉन्क के समूह के साथ दुनिया का भ्रमण कर चुके हैं।


हर्ष लॉस एंजिलिस जाकर दुनिया के सबसे बेहतरीन एक्शन हीरो कहलाए जाने वाली जैकी चेन की स्टंट टीम के साथ भी काम कर चुके हैं। हाल ही में, मुंबई में हर्ष ने अपना खुद का स्कूल खोला है, जहां वे युवाओं को शाओलिन कल्चर के बारे में सिखाते-पढ़ाते हैं।


Edited by Ranjana Tripathi