हजारों पक्षियों को दाना खिलाते हैं ये किसान, पक्षियों के नाम है उनके खेत की फसल

By शोभित शील
February 17, 2022, Updated on : Thu Feb 17 2022 04:50:06 GMT+0000
हजारों पक्षियों को दाना खिलाते हैं ये किसान, पक्षियों के नाम है उनके खेत की फसल
हरसुख डोबरिया ने जब इस नेक पहल की शुरुआत की तब उनके पास हर रोज़ करीब 10 से 20 पक्षी आते थे, हालांकि आज उनके पास दाना खाने के लिए आने वाले पक्षियों की संख्या 5 हज़ार से भी अधिक हो गई है।
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गुजरात के एक किसान बीते दो दशकों से लगातार बेजुबान पक्षियों को भोजन उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं, इतना ही नहीं उन्होंने अपना बड़ा सा खेत सिर्फ पक्षियों के दाना-पानी के लिए समर्पित कर दिया है। इन किसान का नाम हरसुख डोबरिया है, जो गुजरात के जूनागढ़ के रहने वाले हैं।


हरसुख डोबरिया ने जब इस नेक पहल की शुरुआत की तब उनके पास हर रोज़ करीब 10 से 20 पक्षी आते थे, हालांकि आज उनके पास दाना खाने के लिए आने वाले पक्षियों की संख्या 5 हज़ार से भी अधिक हो गई है।


बीते 23 सालों से हरसुख डोबरिया इस नेक काम को कर रहे हैं, आज वे जो भी अन्न अपने खेतों में उगाते हैं वो इन पक्षियों को खिला देते हैं। मीडिया से बात करते हुए इस किसान ने बताया है कि उनका पक्षियों के साथ गहरा लगाव है और उन्होंने इसके पीछे की कहानी भी साझा की है।

BIRDMAN FROM GUJRAT

सांकेतिक चित्र

उनके अनुसार कुछ दशक पहले उनके साथ एक दुर्घटना हो गई थी, जिसके बाद उनके एक दोस्त उनके पास ज्वार लेकर आए थे। उन्होंने उस ज्वार को रस्सी से टांग दिया और कुछ ही समय बाद ज्वार के दानों को खाने के लिए उसके पास पक्षी आने लगे। हरसुख इसे देखकर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने तय किया कि वो बड़े स्तर पर इन पक्षियों के लिए प्रयास करेंगे।

पक्षियों को देते हैं बुलावा

अब वे हर साल 10 जून को इन पक्षियों को अपने खेत में आने का निमंत्रण देते हैं और करीब एक हफ्ते के भीतर ही पक्षियों का झुंड उनके खेतों में आना शुरू हो जाता है। यह सिलसिला करीब तीन महीने चलता है और फिर वे पक्षी अपने अगले प्रवास की तरफ बढ़ जाते हैं।


हरसुख के अनुसार, अब ये पक्षी उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गए हैं।


आज हरसूख हर साल करीब डेढ़ लाख रुपये के अनाज और अन्य बीज की खरीद करते हैं। हरसूख के पास उनकी 10 बीघा जमीन भी है, जिससे होने वाली पूरी कमाई को वे इन पक्षियों पर पर खर्च कर देते हैं। हालांकि उनकी कमाई का मुख्य श्रोत सूत उद्योग है और वे अपने व्यवसाय से होने वाली कमाई से जीवनयापन करते हैं।


शुरुआत में उनका परिवार शहर के बीच स्थित एक घर में रहता था, जहां पर एक छोटी सी बालकनी थी। हालांकि जैसे-जैसे पक्षियों की संख्या बढ़ती गई तब साल 2012 में इस किसान ने शहर के बाहरी इलाके में बने अपने घर में शिफ्ट होने का निर्णय ले लिया।

लोगों से की है खास अपील

दो दशक से अधिक समय से पुण्य का काम करने वाले इस किसान का दावा है कि उन्होंने आज तक किसी से एक रुपये का दान नहीं लिया है। पक्षियों के खेतों में रहने के दौरान हरसुख हर दिन उनके साथ ही बिताते हैं।


हरसुख लोगों से भी यह अपील करते हैं कि पक्षियों को उड़ने के लिए भगवान के खुला आसमान दिया है, ऐसे में उन्हें किसी पिंजरे में कैद करके रखना सही नहीं है। पक्षी आकाश में उड़ने के लिए बने हैं और उन्हें किसी भी दशा में कैद नहीं करना चाहिए।


Edited by Ranjana Tripathi

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