Doctors' Day: अमेरिका की लैब से कच्छ के म्यूजिक स्टूडियो, फिर Guinness और GRAMMY तक — डॉ. कृपेश ठक्कर का सफर
Doctors' Day Special: अमेरिका में क्लिनिकल रिसर्च का सफल करियर छोड़ डॉ. कृपेश ठक्कर ने कच्छ में Krup Music की शुरुआत की. जानिए कैसे उनका सफर 100+ एल्बम, 18 गुजराती और हिंदी फिल्मों, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, GRAMMY कंसिडरेशन और HIMA 2026 तक पहुंचा.
हर साल 1 जुलाई को भारत में नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctors' Day) मनाया जाता है. यह दिन उन डॉक्टरों को समर्पित है, जो लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए समर्पित रहते हैं. लेकिन कुछ डॉक्टर ऐसे भी होते हैं, जो अस्पतालों की चारदीवारी से बाहर निकलकर समाज में बदलाव की नई मिसाल बनते हैं. अस्पतालों के बाहर वे अपने काम से लाखों लोगों के जीवन को नए तरीके से प्रभावित करते हैं.
ऐसी ही कहानी है डॉ. कृपेश ठक्कर (Dr. Krupesh Thacker) की.
MBBS की पढ़ाई के बाद डॉ. कृपेश ठक्कर अमेरिका चले गए. वहां उन्होंने हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की पढ़ाई की. इसके बाद करीब छह वर्षों तक क्लिनिकल रिसर्च सेक्टर में काम किया. सुरक्षित करियर और बेहतर भविष्य उनके सामने था. इसके बावजूद उन्होंने अमेरिका छोड़कर वतन वापसी करते हुए कच्छ (गुजरात) लौटने का फैसला किया. यहीं से 2015 में Krup Music की शुरुआत हुई. इस पहल ने न केवल गुजराती संगीत को नई पहचान दिलाई, बल्कि सैकड़ों कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच भी उपलब्ध कराया.
नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर YourStory से खास बातचीत में डॉ. कृपेश ठक्कर ने अपने प्रेरणादायक सफर के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने अमेरिका में क्लिनिकल रिसर्च के करियर से लेकर Krup Music की स्थापना तक की कहानी साझा की.
आज उनका सफर अंतरराष्ट्रीय पहचान तक पहुंच चुका है. उनके नाम 18 से अधिक गुजराती और हिंदी फिल्में और 100 से अधिक स्वतंत्र म्यूजिक एल्बम हैं. उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Records) में जगह मिल चुकी है. उनके काम को ग्रैमी अवॉर्ड्स (Grammy Awards) कंसिडरेशन भी मिल चुका है. वह Recording Academy के Voting Member और GRAMMY U Mentor भी हैं.
हाल ही में उनके काम को Hollywood Independent Music Awards (HIMA) 2026 में भी नामांकन मिला है. वह 30 जुलाई को HIMA के रेड कार्पेट और अवॉर्ड समारोह में भी हिस्सा लेंगे.

डॉ. कृपेश ठक्कर ने 2015 में Krup Music की शुरुआत की थी.
अमेरिका छोड़ स्वदेश लौटे
डॉ. कृपेश ठक्कर ने जामनगर के एम. पी. शाह मेडिकल कॉलेज से MBBS किया. मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही गिटार बजाना, गीत लिखना और संगीत तैयार करना उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका था.
साल 2007 में वे अमेरिका गए, जहां शेर्लोट (Charlotte) की University of North Carolina से Master of Health Administration (MHA) किया. इसके बाद करीब छह वर्षों तक क्लिनिकल रिसर्च में काम किया. इसी दौरान उन्होंने रिकॉर्डिंग इंजीनियरिंग और म्यूजिक प्रोडक्शन की भी पेशेवर ट्रेनिंग ली.
साल 2013 में उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया. यह सिर्फ करियर बदलने का फैसला नहीं था, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और मिट्टी के लिए कुछ करने की शुरुआत थी. कच्छ लौटकर उन्होंने 2015 में Krup Music Studios की स्थापना की. बाद में जब उन्हें महसूस हुआ कि गुजरात में स्वतंत्र कलाकारों के लिए कोई मजबूत म्यूजिक लेबल नहीं है, तो उन्होंने खुद ही इसकी नींव रखी.
डॉ. कृपेश ठक्कर बताते हैं, “मैं हमेशा मानता रहा हूं कि मेरी जिंदगी का कर्ज मेरी मां, मातृभाषा, मातृभूमि और भारत माता पर है. अमेरिका से लौटना मेरे लिए सिर्फ घर वापसी नहीं थी. यह अपनी मिट्टी को कुछ लौटाने की कोशिश थी. जब मुझे लगा कि गुजरात के स्वतंत्र कलाकारों के लिए कोई मंच नहीं है, तब मैंने इंतजार करने के बजाय खुद वह मंच बनाने का फैसला किया. उसी सोच से Krup Music की शुरुआत हुई.”
जब हर जिम्मेदारी खुद निभानी पड़ी
शुरुआती दौर आसान नहीं था. क्षेत्रीय संगीत उद्योग में व्यवस्थित रिकॉर्ड लेबल की कमी थी. कलाकारों को कॉपीराइट, डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन और म्यूजिक बिजनेस की जानकारी भी सीमित थी. निवेशकों का भरोसा जीतना भी आसान नहीं था.
डॉ. कृपेश ने बिना किसी बाहरी निवेश के काम शुरू किया. शुरुआती गुजराती फिल्मों में रिकॉर्ड लेबल का लगभग हर काम उन्होंने खुद संभाला. रिकॉर्डिंग से लेकर कॉपीराइट, वितरण, मार्केटिंग और कलाकारों के साथ समन्वय तक, हर जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी.
यही अनुभव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना. धीरे-धीरे Krup Music ने गुजराती फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना ली और स्वतंत्र कलाकारों के लिए भरोसेमंद मंच बन गया.
डॉ. कृपेश बताते हैं, “शुरुआत में किसी ने मेरे विजन पर निवेश नहीं किया. इसलिए रिकॉर्डिंग से लेकर कॉपीराइट, डिस्ट्रीब्यूशन, मार्केटिंग और कलाकारों के साथ काम करने तक हर जिम्मेदारी मुझे खुद निभानी पड़ी. उस समय यह मजबूरी थी, लेकिन बाद में यही मेरी सबसे बड़ी ताकत बन गई. इससे मुझे संगीत उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को समझने का मौका मिला.”

(Left) Hungama IMA Music Awards के दौरान डॉ. कृपेश ठक्कर।
(Right) Krup Music के ‘Awareness Through Arts’ प्रोजेक्ट के लिए गुजरात के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के साथ डॉ. कृपेश ठक्कर और पर्व ठक्कर।
गुजराती संगीत को दिया नया मंच
समय के साथ Krup Music का दायरा लगातार बढ़ता गया. कंपनी ने 100 से अधिक एल्बम जारी किए, 18 गुजराती फिल्में और हिंदी फिल्मों से जुड़ी. साथ ही स्वतंत्र कलाकारों को मंच देने के लिए Sur Gujarat Ke और बाद में Sur Hindustan Ke जैसे प्लेटफॉर्म शुरू किए.
डॉ. कृपेश की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में उनके बेटे पर्व ठक्कर (Parv Thacker) का एल्बम भी शामिल है. महज एक साल 342 दिन की उम्र में पर्व ने दुनिया के सबसे कम उम्र के गायक के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया.
डॉ. कृपेश बताते हैं कि यह केवल एक रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि इसमें उनकी मेडिकल शिक्षा, क्लिनिकल रिसर्च और म्यूजिक थेरेपी की समझ का भी महत्वपूर्ण योगदान था.
उनकी 14 साल की बेटी वाचा ठक्कर (Vacha Thacker) एक युवा लेखिका और गायिका हैं. वह 12 किताबें लिख चुकी हैं, 50 से अधिक गाने गाए हैं और अपनी पब्लिशिंग कंपनी चला रहीं हैं.
डॉ. कृपेश कहते हैं, “पर्व का एल्बम मेरे लिए सिर्फ एक म्यूजिक प्रोजेक्ट नहीं था. इसमें मेरी मेडिकल पढ़ाई, क्लिनिकल रिसर्च, म्यूजिक थेरेपी और संगीत का अनुभव एक साथ जुड़ा. इसने मुझे विश्वास दिलाया कि स्वास्थ्य और संगीत दो अलग दुनिया नहीं हैं. सही सोच के साथ दोनों मिलकर समाज पर गहरा असर छोड़ सकते हैं.”
क्षेत्रीय संगीत से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
Krup Music की पहचान धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. उनके कुछ गीतों को Grammy Awards के लिए कंसिडरेशन मिला. इसके बाद उन्हें Recording Academy का Voting Member और GRAMMY U Mentor बनने का अवसर मिला. हाल ही में उनके काम को Hollywood Independent Music Awards (HIMA) 2026 में नामांकन भी मिला है. वह 30 जुलाई को HIMA के रेड कार्पेट और अवॉर्ड समारोह में भी हिस्सा लेंगे.
Grammy Considered एल्बम ‘Sounds of Sanatan: Vol. 1’ का गीत ‘Resonant Roar of Hanuman’ HIMA 2026 में World Music Category में नामांकित हुआ है. यह गीत आगामी हिंदी फिल्म ‘Main Bhi Arjun: Parv’ का मुख्य थीम सॉन्ग भी है. इस गीत को पर्व, वाचा और डॉ. कृपेश ठक्कर ने अपनी आवाज़ दी है.
डॉ. कृपेश के मुताबिक, यह उपलब्धियां सिर्फ व्यक्तिगत सम्मान नहीं हैं, बल्कि इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं का संगीत भी वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकता है.
डॉ. कृपेश बताते हैं, “जब हमारे काम को ग्रैमी के मंच पर पहचान मिली, तब मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि दुनिया भारतीय संस्कृति और क्षेत्रीय संगीत को गंभीरता से सुन रही है. इससे मेरा भरोसा और मजबूत हुआ कि अगर हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें और मौलिक काम करें, तो दुनिया तक पहुंचना बिल्कुल संभव है.”

(Left) Krup Music के ‘Awareness Through Arts’ प्रोजेक्ट के दौरान डॉ. कृपेश ठक्कर। (Right) Krup Music एल्बम लॉन्च के अवसर पर डॉ. कृपेश ठक्कर और पर्व ठक्कर, गुजरात सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल के साथ।
संगीत के साथ सांस्कृतिक विरासत
आज डॉ. कृपेश केवल एक म्यूजिक कंपनी तक सीमित नहीं रहना चाहते. उनका लक्ष्य ऐसा क्रिएटिव इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां संगीत के साथ फिल्में, किताबें, शिक्षा, लाइव अनुभव और सामाजिक पहल भी जुड़ें.
इन दिनों उनका फोकस Main Bhi Arjun Universe पर है, जिसे वे आने वाले वर्षों में फिल्मों और अन्य माध्यमों तक ले जाना चाहते हैं.
वे मानते हैं कि किसी भी वेंचर की शुरुआत बिजनेस से नहीं, बल्कि किसी वास्तविक समस्या के समाधान से होनी चाहिए. अगर उद्देश्य स्पष्ट हो और काम लंबी सोच के साथ किया जाए, तो सफलता अपने आप रास्ता बना लेती है.
डॉ. कृपेश ठक्कर बताते हैं, “मैं हमेशा कहता हूं कि पहले समाधान बनाइए, कारोबार बाद में बनेगा. जल्दी सफलता के पीछे भागने से बेहतर है कि ऐसा काम किया जाए जो वर्षों तक लोगों के काम आए. सबसे जरूरी बात यह है कि आपकी वजह से दूसरे लोगों के लिए भी अवसर पैदा हों. असली विरासत वही होती है, जो आपके बाद भी समाज के लिए मूल्य बनाती रहे.”

डॉक्टर, म्यूजिक और ऑन्त्रप्रेन्योरशिप का अनोखा संगम
डॉ. कृपेश ठक्कर की कहानी बताती है कि करियर बदलना हमेशा जोखिम नहीं होता. कई बार वही फैसला नई पहचान की शुरुआत बन जाता है.
एक डॉक्टर के रूप में उन्होंने इंसानी स्वास्थ्य को समझा, क्लिनिकल रिसर्च में काम किया और फिर संगीत को समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनाया. अमेरिका की लैब से कच्छ के एक छोटे से स्टूडियो तक और वहां से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, ग्रैमी कंसिडरेशन और अंतरराष्ट्रीय पहचान तक पहुंचने का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि जब उद्देश्य केवल सफलता नहीं, बल्कि समाज के लिए मूल्य सृजित करना हो, तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं.
यही संदेश नेशनल डॉक्टर्स डे को भी खास बनाता है. हर डॉक्टर का योगदान केवल अस्पताल या ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं होता. कुछ डॉक्टर अपने ज्ञान और अनुभव से समाज में बदलाव के नए रास्ते भी बनाते हैं.
डॉ. कृपेश ठक्कर की यात्रा इसी सोच का उदाहरण है, जहां चिकित्सा, संगीत और उद्यमिता (ऑन्त्रप्रेन्योरशिप) मिलकर एक ऐसी विरासत तैयार कर रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी.



