अब मुकेश अंबानी की होगी अनिल अंबानी की यह कंपनी, NCLT ने दी मंजूरी

By yourstory हिन्दी
November 22, 2022, Updated on : Tue Nov 22 2022 06:50:16 GMT+0000
अब मुकेश अंबानी की होगी अनिल अंबानी की यह कंपनी, NCLT ने दी मंजूरी
Jio ने नवंबर 2019 में Reliance Infratel की टावर और फाइबर संपत्तियां हासिल करने के लिए 3,720 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी.
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने रिलायंस इन्फ्राटेल (Reliance Infratel Ltd) के अधिग्रहण के लिए रिलायंस जियो (Reliance Jio) को मंजूरी दे दी है. रिलायंस इन्फ्राटेल, अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) के टॉवर और फाइबर एसेट्स के लिए होल्डिंग कंपनी है. रिलायंस इन्फ्राटेल के लिए सफल समाधान आवेदक, Reliance Project & Property Management Services Limited ने अधिग्रहण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए NCLT मुंबई में एक नया आवेदन दिया था. एनसीएलटी ने साल 2020 में रिलायंस इन्फ्राटेल की समाधान योजना को मंजूरी दी थी.


NCLT (National Company Law Tribunal) ने जियो को आरकॉम (Reliance Communications) के टावर और फाइबर संपत्तियों के अधिग्रहण को पूरा करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के एस्क्रो खाते में 3,720 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा है. जियो ने रिलायंस इन्फ्राटेल के अधिग्रहण को पूरा करने के लिए 6 नवंबर को एक एस्क्रो खाते में 3,720 करोड़ रुपये जमा करने का प्रस्ताव दिया था. रिलायंस इन्फ्राटेल दरअसल दिवाला समाधान प्रक्रिया का सामना कर रही है.

Jio ने 2019 में लगाई थी बोली

उद्योगपति मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली जियो ने नवंबर 2019 में अपने छोटे भाई अनिल अंबानी के प्रबंधन वाली कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस की कर्ज में डूबी अनुषंगी की टावर और फाइबर संपत्तियां हासिल करने के लिए 3,720 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) ने जियो की समाधान योजना को 4 मार्च, 2020 को शत प्रतिशत मत के साथ मंजूरी दे दी थी. RITL के पास देश भर में लगभग 1.78 लाख रूट किलोमीटर की फाइबर संपत्ति और 43,540 मोबाइल टावर है.

समाधान योजना के कार्यान्वयन में क्यों देरी

जियो की सहायक कंपनी रिलायंस प्रोजेक्ट्स एंड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सर्विसेज द्वारा दायर आवेदन के अनुसार, राशि के वितरण और 'कोई बकाया नहीं' प्रमाण पत्र जारी करने की कार्यवाही लंबित होने के कारण समाधान योजना के कार्यान्वयन में देरी हो रही है. समाधान निधियों के वितरण पर अंतर-ऋणदाता विवाद के सुलझने के बाद धन को ऋणदाताओं के बीच वितरित कर दिया जाएगा. दोहा बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और एमिरेट्स बैंक सहित एसबीआई और कुछ अन्य बैंक धन के वितरण को लेकर कानूनी लड़ाई में लगे हुए हैं. मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है. दोहा बैंक ने समाधान पेशेवर द्वारा आरआईटीएल के अप्रत्यक्ष लेनदारों के दावों के वित्तीय लेनदारों के रूप में वर्गीकरण को चुनौती दी थी. आरकॉम ने जिस समय दिवाला आवेदन किया था, उस वक्त तक उसपर कुल 46,000 करोड़ रुपये का कर्ज था.



Edited by Ritika Singh